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Mehandipur Balaji Hindi - मेहंदीपुर बालाजी मंदिर की सम्पूर्ण जानकारी एवं इतिहास | Balaji Mandir Rajasthan : Mehandipur Balaji Temple History in Hindi



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भारत आस्था और विश्वास का देश है। यहाँ पर बड़े - बड़े रोग बिना इलाज किए मात्र आस्था और विश्वास से सही हो जाते है। ऐसे में कुछ लोग इसे चमत्कार भी मानते है फिर चाहे राजस्थान का बुटाटी धाम हो जो की लकवे के इलाज के लिए प्रसिद्ध है या फिर राजस्थान का मेहंदीपुर बालाजी का मंदिर हो जो की भूत - प्रेतों के लिए पूरी दुनियाँ में प्रसिद्ध है। बड़े से बड़े वैज्ञानिक और डॉक्टर भी इन मंदिरो के रहस्यों को नहीं समझ पाए है। जो व्यक्ति भूतों में और आत्माओं में विश्वास नहीं करते है उन्हें एक बार इस मंदिर जरूर जाना चाहिए वो अपने आप सब कुछ जान जाएंगे। 


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Mehandipur Balaji Temple History in Hindi - मेहंदीपुर बालाजी मंदिर

- यह मंदिर राजस्थान के दौसा जिले में स्थित मेहंदीपुर के नाम से एक प्रसिद्ध मंदिर है। 


- यह मंदिर दो बड़ी पहाड़ियों के बिच बना हुआ है। जो देखने में बहुत ही आकर्षण लगता है। 


- शुरुआत में इस स्थान पर बहुत बड़ा जंगल था और चारों तरफ काँटेदार झाड़ियाँ थी। 


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- बताया जाता है की सबसे पहले श्री मंहत जी महाराज के पूर्वज को स्वप्न आया और उन्होंने यहाँ पूजा - पाठ शुरू की थी। 


- मंदिर की मूर्ति को किसी कलाकार ने नहीं बनाया अपितु यह वहाँ मौजूद पर्वत का ही एक अंग है। 


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Mehandipur Balaji Hindi 

- मुस्लिम शासनकाल में कुछ बादशाहों ने इस मूर्ति को नष्ट करने की कुचेष्टा की, लेकिन वे असफल रहे। वे इसे जितना ज्यादा खुदवाते गए मूर्ति की जड़ उतनी ही गहरी होती चली गई। थक हार कर उन्हें अपना यह कुप्रयास छोड़ना ही पड़ा।


- ब्रिटिश शासन के दौरान सन 1910 में बालाजी ने अपना सैकड़ों वर्ष पुराना चोला स्वतः ही त्याग दिया। बाद में इस उतारे हुए चोले को गाड़ियों में भरकर श्री गंगा में प्रवाहित करने हेतु बहुत से श्रद्धालु हरिद्वार गए।


- चोले को लेकर जब मंडावर रेलवे स्टेशन पर पहुँचे तो रेलवे अधिकारियों ने चोले को सामान समझकर सामान-शुल्क लेने के लिए उस चोले को तौलना चाहा, किन्तु वे तौलने में असमर्थ रहे। चोला तौलने के क्रम में वजन कभी एक मन बढ़ जाता तो कभी एक मन घट जाता; अन्तत: रेलवे अधिकारी ने हार मान लिया और चोले को सम्मान सहित गंगा जी को समर्पित कर दिया गया। 


- यह मंदिर भूत - प्रेत की बाधाओं के लिए पुरे विश्व भर में प्रसिद्ध है। यहाँ की मान्यता है की जो स्त्री - पुरुष बड़े - बड़े तंत्र - मंत्र के जाल में फसे है और किसी बुरे तांत्रिक की नकारात्मक शक्ति से ग्रसित है तो वह सब बालाजी महाराज के आशीर्वाद से बिना दवा के स्वस्थ हो जाते है। 


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- यहाँ पर 3 देवता विराजमान है - 1 श्री हनुमान जी महाराज 2. श्री प्रेतराज सरकार 3. श्री कोतवाल जी महाराज (भैरव)


-  दुखी कष्टग्रस्त व्यक्ति को मंदिर पहुंचकर तीनों देवगणों को प्रसाद चढाना पड़ता है। बालाजी को लड्डू, प्रेतराज सरकार को चावल और कोतवाल कप्तान (भैरव) को उड़द का प्रसाद चढ़ाया जाता है।


- यहाँ आप पीड़ित लोगो के शरीर से प्रेत बाधा निकलते हुए महसूस कर सकते हो। जिसके शरीर में ऐसी कोई बाधा होती है वो यहाँ आकर जोर - जोर से चिल्लाने और नाचने लगता है। 


- यहाँ के नियमों के अनुसार यहाँ का प्रसाद यही खा लिया जाता है घर नहीं लाया जाता है। 


- इस मंदिर में जाते समय पीछे मुड़ कर नहीं देखना चाहिए और साथ ही साथ अपने साथ आए लोगो का नाम लेकर ही संबोधन करना चाहिए।


आप सभी पर बालाजी महाराज की कृपा बनी रहे। जय महंदीपुर बालाजी महाराज की !! 


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