Shivling Par Bel Patra Kaise Chadhaye - श‍िवलिंग पर कैसे चढ़ाएं बेलपत्र, क्या है जरूरी नियम | Mahadev Ko Bel Patra Kaise Chadhaye : Bhagwan Shiv Ko Belpatra Kyo Chadhaya Jata Hai



Shivling Par Bel Patra Kaise Chadhaye - श‍िवलिंग पर कैसे चढ़ाएं बेलपत्र, क्या है जरूरी नियम | Mahadev Ko Bel Patra Kaise Chadhaye : Bhagwan Shiv Ko Belpatra Kyo Chadhaya Jata Hai


भोले नाथ की पूजा आप किसी भी दिन कर सकते हो। ज्यादा तर सोमवार के दिन महादेव की पूजा की जाती है। क्योकि इस दिन का विशेष महत्व है। सावन के महीने में भी सोमवार का विशेष महत्व रहता है। 


जल, दूध, भांग, धतूरा, बेलपत्र यह सभी सामग्री भोले नाथ को चढ़ाई जाती है। बहुत से लोग इनको गलत तरीके से चढ़ाते है जिसके कारण उनका कार्य सफल नहीं हो पाता है। 


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Shivling Par Bel Patra Kaise Chadhaye

भगवान शिव एक ऐसे देवता है जो थोड़ी सी पूजा पाठ से प्रसन्न हो जाते है। महादेव को चढ़ाई जाने वाली सभी सामग्रियों में विशेष सामग्री है बेल पत्र। इसके बिना तो भगवान शिव की पूजा अधूरी ही मानी जाती है।


भगवान शिव को बेलपत्र प्रिय क्यों है इस बात को समुद्र मंथन से जोड़ा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माना जाता है कि भगवान शिव ने जब समुद्र मंथन से निकले वाले हलाहल विष का पान किया तो उस विष के प्रभाव से उनके कंठ में जलन होने लगी थी।


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श‍िवलिंग पर कैसे चढ़ाएं बेलपत्र, क्या है जरूरी नियम


इसी जलन को दूर करने के लिए माता पार्वती ने उनके कंठ पर बेल पत्र रखा था। माना जाता है की यह बेलपत्र उनके पसीने से ही उत्प्न हुआ था। जिसके कारण महादेव को विष से आराम मिला था। तभी से ही भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और साथ ही उनको ठंडक प्रदान करने के लिए उन्हें बेलपत्र चढ़ाया जाता है। इसके मूलभाग में सभी तीर्थों का वास होता है।. इससे वह भक्त पर बहुत जल्द ही प्रसन्न हो जाते है। 


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साथ ही यह भी माना जाता है कि बेलपत्र को शिवजी को चढ़ाने से दरिद्रता दूर होती है और व्यक्ति सौभाग्यशाली बनता है।


भगवान शिव को हमेशा उल्टा बेलपत्र चढ़ाया जाता है। बेलपत्र को हमेशा अनामिका, अंगूठे और मध्यमा अंगुली की मदद से चढ़ाएं। शिव जी को बिल्वपत्र अर्पण करने के साथ - साथ जल की धारा जरूर चढ़ाएं।


कुछ तिथियों को बेलपत्र तोड़ना वर्जित होता है। जैसे कि चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या को, संक्रांति के समय और सोमवार को बेल पत्र नहीं तोड़ना चाहिए। ऐसे में पूजा से एक दिन पूर्व ही बेल पत्र तोड़कर रख लिया जाता है।


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