Teachers Day Nibandh in Hindi || शिक्षक दिवस पर हिन्दी निबंध || टीचर डे पर निबंध || Teachers Day Essay in hindi short



Teachers Day Nibandh in Hindi || शिक्षक दिवस पर हिन्दी निबंध || टीचर डे पर निबंध || Teachers Day Essay in hindi short - Teachers Day 2020 Speech, Bhashan, Essay, Nibandh in Hindi : शिक्षक दिवस, टीचर्स डे के लिए यहां से तैयार करें भाषण, निबंध और स्पीच - Teachers Day Kyu Manaya Jata hai in hindi


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Teachers Day Nibandh in Hindi शिक्षक दिवस पर हिन्दी निबंध || टीचर डे पर निबंध

प्रस्तावना - एक गुरु का जीवन में महत्व केवल शिक्षा तक ही सीमित नहीं है। अपितु एक गुरु ही हमारी अंदर की बौद्धिक एवं तार्किक क्षमता को विकसित करता है। यह गुरु ही है जो हमें जीवन को किस दिशा में जीया जाय और कैसे जीया जाए यह सब सिखाता है। गुरु हमारी चेतना को नव चेतना बनाता है और हमें सही मार्ग पर चलने की सिख भी देता है। यह गुरु शिष्य परम्परा आज की नहीं बल्कि लाखों सालों से चली आ रही परम्परा है। व्यक्ति के सही ज्ञान और कौशल के लिए उसे गुरु की शरण में ही जाना होता है फिर चाहे वह किसी राजा का पुत्र या पुत्री ही क्यों न हो। गुरु वह सूरज है जो स्वम जलकर हमें रोशनी देता है। हमें अंधेरो से निकाल कर उजाले की तरफ लाता है। 


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टीचर डे क्यों मनाया जाता है - देश भर में 05 सितंबर को शिक्षक (Teachers Day 2020) दिवस मनाया जाता है। इसका अपना एक महत्व होता है। टीचर्स (Teachers Day) और स्टूडेंट (Students) का रिश्ता अनोखा होता है। इस दिन हम विद्यार्थी अपने - अपने गुरुओं को धन्यवाद और शुभकामनाएँ देते है। यह दिन गुरु और शिष्य के प्रेम को दर्शाता है। भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म-दिवस के अवसर पर शिक्षकों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए भारतभर में शिक्षक दिवस 5 सितंबर को मनाया जाता है। 


सर्वपल्ली राधाकृष्णन शिक्षा में बहुत विश्वास रखते थे। वे एक महान दार्शनिक और शिक्षक भी थे। उन्हें अध्यापन से गहरा प्रेम था। एक आदर्श शिक्षक के सभी गुण उनमें विद्यमान थे। इस दिन समस्त देश में भारत सरकार द्वारा श्रेष्ठ शिक्षकों को पुरस्कार भी प्रदान किया जाता है और साथ ही साथ बच्चे भी अपने अध्यापक के लिए स्कूल में कुछ तोहफे लाते है। 


इस दिन स्कूल, कॉलेज में गुरु के समान के लिए उन्हें (Teachers Day Wishes) के तौर पर उन्हें उपहार भी दिए जाते है। इस दिन स्कूल, कॉलेजों में स्पीच (Speech) व भाषण (Bhashan) समेत विभिन्न कार्यक्रम किए जाते हैं. लेकिन इस वर्ष 2020 में कोरोना सकंट (Coronavirus) और लॉकडाउन (Lockdown) के कारण शिक्षक दिवस कुछ नए अंदाज से बनाया जा रहा है। इस वक्त सभी विद्यार्थी अपने - अपने शिक्षकों को ऑनलाइन शुभकामनाएँ दे रहे है और शिक्षक भी बच्चो को ऑनलाइन पढ़ा कर अपना धर्म निभा रहे है। एक शिक्षक हमें वह खजाना देता है जिसे चोर भी चुरा नहीं सकते "विद्या को चोर भी नहीं चुरा सकता" 


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Teachers Day Essay in hindi short


शिक्षक दिवस मनाने की शुरुआत - भारत में शिक्षक दिवस मनाने की शुरुआत 1962 से हुई थी। भारत के पूर्व उप-राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने शिक्षा के क्षेत्र में काफी योगदान दिया है। उनके उप-राष्ट्रपति बनने के बाद कुछ छात्रों ने उनका जन्मदिन मनाने की बात की थी। यह सुन कर डॉ. राधाकृष्णन ने कहा मेरा जन्म दिन मनाने की जगह अगर इस दिन शिक्षक दिवस मनाया जाए तो मुझे गर्व होगा। तब से आज तक हर वर्ष हमारे देश में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। 


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शिक्षक दिवस कैसे मनाए - इस दिन को स्कूलों और कॉलेजों में एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। शिक्षकों को इस दिन आराम करने दिया जाता है और छात्र ही एक - दूसरी क्लास में बच्चो को पढ़ाते है। बच्चे इस दिन गुरु के लिए अच्छी - अच्छी कहानियाँ और कविताएँ, शायरियाँ लिखकर लाते है और सभी के सामने अपने अध्यापक को सुनाते है। इस दिन भारत के सभी स्कूल और कॉलेजों में त्यौहार जैसे मौहोल होता है। इस दिन कोई भी शिक्षक बच्चों पर हाथ नहीं उठाते और न ही उन्हें डांटते है। इस दिन सिर्फ गुरु अपने शिष्यों से प्रेम करते है उन्हें आगे बढ़ने और सच्चाई के मार्ग पर चलने की शिक्षा देते है। 


उपसंहार - आज के समय में गुरु और शिष्य का संबंध धीरे - धीरे रुपयों तक सिमित रह गया है। बड़े - बड़े अध्यापक अपने ज्ञान की बोली लगाने लगे है। एक अध्यापक को भी अपनी बात को रखने का सही प्लेटफॉर्म नहीं मिल पा रहा है। छोटे अध्यापक बड़ी - बड़ी स्कूलों के और संस्थाओ के अधीन रह गए है। जब चाहे उन्हें बुला लिया जाता है और जब चाहे निकाल दिया जाता है। अब वर्तमान में गुरु और शिष्य का रिस्ता भी कलंकित होने लगा है। रोज खबरों और टेलीविजन में ऐसी खबरे सुनने को मिलती है जो शर्मसार कर देती है। 


वर्तमान में उचित शिक्षा न मिलने के कारण विद्यार्थी नशीले और जहरीले पदार्थ का सेवन करने लगे है। प्राचीन शिक्षा के आभाव के कारण अब धीरे - धीरे शिष्य अपने मार्ग से भटक रहे है। ऐसे में गुरु और शिष्य का दोनों का ही दायित्व है की वह गुरु - शिष्य परम्परा को कलंकित न होने दे इसे आगे बढ़ाये इस परम्परा को सुंदर बनाए ताकि एक बेहतरीन समाज और देश का निर्माण किया जा सके। 


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