Rajasthan Ke Itihas Ki Mahatvpurn Aitihasik Ghatnayen - राजस्थान के इतिहास की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं



Rajasthan Ke Itihas Ki Mahatvpurn Aitihasik Ghatnayen - राजस्थान के इतिहास की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं 


राजस्थान का इतिहास काफी बड़ा इतिहास है। राजस्थान राज्य में होने वाली परीक्षाओ में भारत के इतिहास के साथ - साथ छात्रों को राजस्थान के इतिहास की तैयारी भी करनी चाहिए। 


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Rajasthan Ke Itihas Ki Mahatvpurn Aitihasik Ghatnayen

राजस्थान पटवारी भर्ती, राजस्थान एलडीसी, राजस्थान आर.ए.एस. आदि सभी महत्वपूर्ण परीक्षाओ में राजस्थान के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओ संबंधित प्रश्न अक्सर पूछ लिए जाते है। 


"Fresh Update (15.10.2020): राजस्थान पटवारी परीक्षा 2020 का कैलेंडर जारी कर दिया गया है और इसके अनुसार पटवारी भर्ती परीक्षा 10.01.2021 से 24.01.2021 को आयोजित की जाएगी! "


राजस्थान के इतिहास की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं में हमसे पूछा जाता है की कौन सी घटना कब घटित हुई और किस स्थान पर घटित हुई यानी की - " महाराणा प्रताप और अकबर की सेना के बिच युद्ध कब हुआ " या फिर आपसे पूछ लिया जाता है की दोनों के मध्य युद्ध किस स्थान पर हुआ था। 


तो ऐसे में आपको पता होना चाहिए की - 


महाराणा प्रताप और अकबर की सेना के मध्य युद्ध 18 जून 1576 को हुआ था। यह युद्ध हल्दीघाटी में हुआ था इसी कारण इसे हल्दीघाटी का युद्ध भी कहते है। 


आइये और विस्तार से पढ़े -


ईसा पूर्व की घटनाएं 


पाषाण युगीन संस्कृतियाँ 


एक लाख वर्ष पूर्व - प्रारंभिक पाषाण काल में संस्कृतिया बसी। 

पचास हजार वर्ष पूर्व - मध्य पाषाण काल में बस्तियाँ बसी। 

दस हजार वर्ष पूर्व - नव पाषाण काल में बस्तियाँ बसी। 

4480 - 3285 ईसा पूर्व - बागौर संस्कृति प्रथम। 

2765 - 500 ईसा पूर्व - बागौर संस्कृति द्वितीय। 

500 - 300 ईसा पूर्व - बागौर संस्कृति तृतीय। 


ताम्र युगनीय संस्कृतियाँ 


2500 - 1200 ईसा पूर्व - गणेश्वर संस्कृति। 

2500 - 200  ईसा पूर्व - जोधपुर संस्कृति। 

2300 - 2000  ईसा पूर्व - कालीबंगा संस्कृति। 

1800 - 1200 ईसा पूर्व - आहद की संस्कृति।

700 - 300  ईसा पूर्व - गिलुण्ड की संस्कृति। 

1200 - 900  ईसा पूर्व - नोह् संस्कृति। 


लौह युगीन संस्कृतियाँ 


300 से 600 ईसा पूर्व - जनपद युग। 

187 ईसा पूर्व - यमन राजा दिमित द्वारा चितौड़ पर आक्रमण। 

150 ईसा पूर्व - मालवगण राजस्थान व मालवा आए। 

75 ईसा पूर्व - शको द्वारा पूर्वी राजस्थान पर कब्जा। 

57  ईसा पूर्व - विक्रम संवत प्रारम्भ। 

33 ईसा पूर्व - शको द्वारा पशिचमी राजस्थान पर कब्जा। 


ईस्वी सन की घटनाएं 


78 ई. - शक संवत प्रारम्भ 

150 ई. - प्रथम रुद्रमान ने पश्चमी राजस्थान को जीता था। 

566 ई. - मेवाड़ में गुहिलों द्वारा राज्य स्थापित किया गया था। 

622 ई. - हिजरी सन की शुरुआत 

647 ई. - हर्षवर्धन की मृत्यु 

728 ई. - बप्पा रावल ने मौर्य राजा से चितौड़ का राज्य छीना था। 

731 ई. - अरबों का राजस्थान से सीधा संघर्ष 

731 ई. - तनोट (जैसलमेर) का किला बना 

736 ई. - गुर्जर राज्य की समाप्ति के बाद चौहान राजस्थान के शासक बने। 

738 ई. - प्रतिहारो ने अपनी राजधानी भीनमाल के स्थान पर जालौर बनाई।

755 ई. - बप्पा रावल ने कुकुटेश्वर से चितौड़ को जीता। 

836 ई.- मिहिरभोज का राजीरोहण 

943 ई. - सांभर के लक्ष्मण चौहान ने नाडोल पर हमला कर स्वतंत्र राज्य स्थापित किया। 

944 ई. - सपादलक्ष के चौहानों ने रणथम्भौर दुर्ग का निर्माण करवाया। 

947 ई. - रामसिंह ने टोकरा (वर्तमान टोंक) बसाया। 

956 ई. - सिंहराज प्रथम ने शेखावाटी में हर्षनाथ पहाड़ पर सीकर पर शिव मंदिर बनवाया। 

972 ई.- मालवा के परमार भूंज ने चितौड़ पर कब्जा किया। 

973 ई.- चौहान प्रतिहारो से स्वतंत्र हुए। मालवा के भूंज परमार ने आहड़ को नष्ट किया।

991 ई. - जयपाल में मुसलमानों के आक्रमण के विरुद सांभर कालिंजर और कनौज के राजाओं का संघ बनवाया। 

1008 ई. - आनंदपाल ने महमूद के खिलाफ उज्जैन, ग्वालियर कालिंजर और कनौज दिल्ली तथा सांभर के राजाओ का संघ बनवाया। 

1013 ई. - लोकदेवता तेजाजी जाट का निधन 

1024 ई. - महमूद गजनवी ने अजमेर पर आक्रमण किया और गढ़ बीठडी पर घेरा डाला लेकिन घायल हो जाने पर वह घेरा उठा कर अन्हिलवाड़ा चला गया। 

अक्टूबर, 1024 ई. - महमूद गजनवी सोमनाथ पर आक्रमण करने के लिए रवाना हुआ था। 

1026 ई. - महमूद गजनवी ने वाराह (जैसलमेर) पर हमला किया 

1031 ई.-  विमल शाह ने आबू पर्वत आदिनाथ जैन मंदिर की स्थापना करवाई 

1040 ई. - यादव विजय पाल ने मथुरा से अपनी राजधानी हटा कर विजय मंदिर गढ़ में स्थापित कर दी। जिसे अब बयाना गढ़ के नाम से जाना जाता है। 

1042 ई. - बसंतगढ़ (सिरोही) को परमार नरेश पूर्णपाल ने अपनी राजधानी बनाई। 

1113 ई. - चौहान अजय राज ने अजमेर नगर को बसाया। 

1119 ई. - मुम्मद बाहलिम ने नागौर का किला बनवाया। 

1135 ई. - अर्णोराज ने मुसलमान आक्रमणकारियों को हराकर युद्ध स्थल पर आनासागर झील (अजमेर) का निर्माण करवाया। 

1137 ई. - दुल्हेराय ने बड़गुजरों को हरा कर दौसा पर कब्जा किया। 

1151 ई. - अजमेर के विग्रहराज - 4 ने चितौड़ पर कब्जा कर मेवाड़ का कुछ हिस्सा अपने राज्य में मिलवाया। 

1152 ई. - बीसलदेव (विग्रहराज - 4) ने अपने पितृहन्ता भाई जगदेव को पराजित कर अजमेर की गद्दी प्राप्त की थी। 

1153 ई. - बीसलदेव "भारत का प्रथम चौहान सम्राट बना" था। 

1155 ई. - राव जैसल द्वारा जैसलमेर दुर्ग की स्थापना। 

1158 ई. - यादव तवनपाल ने बयाना से 15 मील दूर तवनगढ़ बसाया। 

1164 ई. - विग्रहराज चौहान ने शिवलिंग स्तम्भ नामक शिलालेख दिल्ली में खुदवाया। 

1175 ई. - गुहिलवंश सामंत सिंह ने बागड़ पर अधिकार कर लिया। 

1178 ई. - आबू के परमार नरेश धारावर्ष ने मुहमद गौरी को हराया। इसी समय मोहमद गौरी ने नाडोल तथा किराडू को लूटा था। 

1187 ई. - पृथ्वीराज - 3 गुजरात ने गुजरात पर आक्रमण किया एवं आबू के परमार शासक धारावर्ष को हराया। 

1190 ई. - जयानक ने अजमेर में पृथ्वीराज विजय नामक प्रसिद्ध महाकाव्य की रचना की। 

1191 ई. - पृथ्वीराज - 3 ने थानेश्वर के निकट तरावड़ी मैदान में मोहमद गौरी को प्रथम बार हराया (यह तराइन का प्रथम युद्ध था )

1192 ई. - तरावड़ी का दूसरा युद्ध (यह तराइन का द्वितीय था) जिसमें पृथ्वीराज मोहमद गौरी से हारा, मारा गया था। 

1192 ई. - क़ुतुबुद्दीन ऐबक ने अजमेर तथा मेरठ के विद्रोह को दबाया था। बीसलदेव ने सरस्वती मंदिर को तोडा था। हरिराज अजमेर का शसक बना था। 

1193 ई. - हरिराज ने दिल्ली पर आक्रमण कर दिया। 

1194 ई. - कनोज का जयचंद मोहमद गौरी से इटावा के पास चंदावर में मारा गया। क़ुतुबुद्दीन ऐबक ने पुन : अजमेर पर कब्जा कर लिया। 

1195 ई. - ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती अजमेर आया था। मोहमद गौरी ने बयाना के जाटों भट्टी राजपूतों को हराया। 

1196 ई. - क़ुतुबुद्दीन अन्हिलवाड़ा पर आक्रमण करने के लिए रवाना हुआ लेकिन मेरो एवं राजपूतों द्वारा रोक दिया गया। 

1197 ई. - मोहमद गौरी द्वारा तवनगढ़ व बयाना पर कब्जा। 

1206 - 1210 ई. - अढ़ाई दिन के झोपड़े का निर्माण क़ुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा करवाया गया था। 

1210 ई. - लाहौर में चौगान (पोलो) खेलते समय  क़ुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु। अजमेर का सरस्वती मंदिर एक मस्जिद में बदल दिया गया था। जो अढ़ाई दिन का झोपड़ा कहलाया था। 

1226 ई. - दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश ने रणथम्भौर पर कब्जा किया इसके पश्चात उसने बयाना, अजमेर, नागौर, जालौर पर भी कब्जा किया। 

1234 ई. - मेवाड़ के राणा जैत्रसिंह ने शमसुद्दीन इल्तुतमिश को हराया। 

1236 ई. - ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती की मृत्यु। 

1237 ई. - मेवाड़ राणा समर सिंह ने तुर्को को हराया। 

1243 ई. - राव सीहा पाली आया। 

1245 ई. - दिल्ली में सुल्तान का भाई जलालुद्दीन अपनी जान बचाने के लिए चितौड़ की पहाड़ियों में आ छुपा। 

1246 ई. - बारडदेव परमार ने बारडमेर (वर्तमान में जो बाड़मेर) को बसाया। 

1248 ई. - बलबन (उलुंग खा) ने रणथम्भौर, बूंदी, चितौड़ पर हमला किया, तथा यहाँ से काफी धन लूट कर ले गया। 

1252 ई. - नसीरुद्दीन मोहमद ने बयाना विजय की। 

1258 ई. - बलबन ने रणथम्भौर और मेवात पर आक्रमण किया। 

11 जुलाई 1301 - रणथम्भौर पर अलाउद्दीन खिलजी का अधिकार हो गया। 

25 अगस्त 1303 - अलाउद्दीन खिलजी द्वारा चितौड़ पर विजय एवं अपने पुत्र खिज्र खा को चितौड़ का हाकिम नियुक्त किया। (साका हुआ)

9 नवंबर 1308 - सिवाणा का सीतलदेव मारा गया। सिवाणा पर अलाउद्दीन का कब्जा। (यहाँ भी साका हुआ)

1311 - 1312 - अलाउद्दीन ने जालौर पर अधिकार किया। 

1316 ई. - जैसलमेर पर अलाउदीन का अधिकार (साका हुआ)

1326 ई. - हम्मीर सिसोदिया ने चितौड़ पर अपना अधिकार किया। 

1330 ई. - रावघडसी ने घड़सिया तलाब (जैसलमेर में) बनवाया। 

1341 ई. - बम्बावदा के राव देवा ने जेता मीणा से बूंदी जीता। 

21 मार्च 1352  - पीरो के पीर बाबा रामदेव जी का जन्म।

1354 ई. - राव नरसिंह ने तारागढ़ (बूंदी) का दुर्ग बनाया।

1358 ई. - डूंगरसिंह ने डूंगरगढ़ बसाया। 

1362 ई. - रावल मल्लिनाथ का जन्म। 

1364 ई. - क्षेत्रसिंह मेवाड़ की राजगद्दी पर बैठा। 

1382 ई. - मेवाड़ के राणा लाखा का राजयभिषेक। 

1383 ई. - राजपुतो व चरणों की देवी करणी का जन्म। 

1385 ई. - बाबा रामदेव ने समाधि ली। 

1394 ई. - वीरम के पुत्र चूड़ा की सहायता से इन्द्रापतिहार ने मण्डोर पर कब्जा किया तथा उसे चूड़ा राठौड़ को दिया। राव चूडा ने चामुण्डा माता का मंदिर बनवाया। मोहमद तुगलक का बयाना पर आक्रमण। 

1398 ई. - मेवाड़ के चूडा ने राजगद्दी से अपना अधिकार छोड़ा। तैमूर का भारत पर हमला। 

1399 ई. - चूड़ा राठौड़ ने अजमेर पर कब्जा किया। मालानी के रावल मल्लिनाथ का स्वर्गवास। 

1405 ई. - शिवभाण देवड़ा ने शिवपुरी (पुराना सिरोही) बसाया। 

1423 ई. - मालवा के होशगशाह ने 15 दिन के घेरे के बाद गागरोन गढ़ पर कब्जा किया तथा अचलदास खींची मारा गया। 

1425 ई. - सहसमल देवड़ा ने चंद्रावती के स्थान पर सिरोही नगर बसाया। 

1426 ई. - रणमल राठौड़ की सेना ने जैतारण व सोजत पर अधिकार किया। 

1433 ई. - राणा मोकल अहमदाबाद के सुलतान के विरुद लड़ते हुए मारे गए। 

1438 ई. - मण्डोर का रणमल राठौड़, मेवाड़ में मारा गया। 

1440 ई. - रणकपुर में त्रिलोक्य दीपक मंदिर की स्थापना हुई। 

1443 ई. - महाराणा कुम्भा तथा मालवा के सुल्तान महमूदशाह खिलजी के बीच कुम्भलगढ़ के निकट युद्ध। महमूद विफल होकर लोट गया। 

1444 ई. - मालवा के महमूद ने गागरोन पर कब्जा किया। 

2 फरवरी, 1449 - महाराणा कुम्भा का कीर्तिस्तम्भ बनकर पूर्ण। 

1450 ई. - कायम खा ने राजपूतो के राज्य को जीतकर नपा राज्य स्थापित किया, जिसकी राजधानी झुंझुनू बनाई गई। 

1451 ई. - बिश्नोई मत के पर्वतक जांभोजी का पीपासर में जन्म 

1453 ई. - महाराणा कुम्भा ने अचलगढ़ दुर्ग की प्रतिष्ठा करवाई। 

1455 ई. -  मालवा के सुल्तान महमूद ने अजमेर पर कब्जा कर लिया। 

1456 ई. - महाराणा कुम्भा ने गुजरात की सेना को हराकर नागौर जीता। 

1458 ई. - राव जोधा का राज्यअभिषेक। 

1459 ई. - राव जोधा द्वारा जोधपुर नगर बसाया गया। 

1460 ई. - मंडोर की चामुंडा की मूर्ति जोधपुर के किले में स्थापित की गई। 

1465 ई. - राव जोधा का पुत्र बीका, अपने चाचा काथल के साथ जांगल प्रदेश गया, तथा उसको जीतकर अपना नया राज्य स्थापित किया। 

1478 ई. - वल्ल्भ सम्प्रदाय के संस्थापक श्री वलभाचार्य तैलंग का जन्म। 

12 अप्रेल, 1482 - महाराणा संग्राम सिंह का जन्म। 

1483 ई. - राजस्थान में घोर अकाल। 

13, अप्रेल, 1488 - राव बीका ने बीकानेर नगर बसाया। 

1492 ई. - जोधपुर नरेश सातल का कोसाणा के पास अजमेर के मल्लू खा के साथ युद्ध हुआ। यवन सेनापति घडूला मारा गया। सब से राजस्थान में घडूले मेले का प्रचलन है। 

1503 ई. - मालवा के नासिर शाह ने मेवाड़ पर चढ़ाई की वह महाराणा रायमल के सामंत राजा भवानीदास की पुत्री को लेकर लोट गया। वह लड़की बाद में चितौड़ बेगम कहलाई। 

1504 ई. - 12 जुलाई को मीराबाई का जन्म। 

1508 ई. - महाराणा संग्राम सिंह मेवाड़ की राजगद्दी पर बैठा। 

1516 ई. - महाराणा सांगा के ज्येष्ठ कुंवर भोजराज का मीरा बाई से विवाह। 

1517 ई. - दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी और मेवाड़ के महाराणा सांगा के बीच बूंदी के निकट खतौली का युद्ध हुआ। जिसमें महाराणा सांगा की विजय हुई। 

1527 ई. - बिश्नोई धर्म के प्रवर्तक जंभा की तालवा गांव (बीकानेर) में मृत्यु 16 मार्च 1527 - महाराणा सांगा और बाबर के बीच खानवा का युद्ध। इसमें महाराणा सांगा की हार हुई। डूंगरपुर के रावल उदयसिंह रावत, रतनसिंह चुण्डावत, हसन खा मेवाती आदि वीर गति को प्राप्त हुए। भारत में पहली बार इस युद्ध में गोला बारूद का उपयोग हुआ। 

1532 ई. - मालदेव मारवाड़ की राजगद्दी पर बैठा। उसका राज्याभिषेक सोजत दुर्ग में हुआ। 

1535 ई. - मेवाड़ की राजमाता कर्मावती ने बहादुरशाह के 8 मार्च आक्रमण पर 13 हजार स्त्रियों के साथ जौहर किया। 

25 अप्रेल 1535 ई. - चितौड़ पर वापस सीसोदियो का कब्जा। 

1536 ई. - मालदेव ने नागौर के खानजादे पर चढ़ाई कर नागौर पर कब्जा किया। 

9 मई 1540 - "महाराणा प्रताप का जन्म"

30 जुलाई 1541 - राव चन्द्रसेन राठौड़ का जन्म 

5 जनवरी 1554 - रावल मालदेव और शेरशाह की सेनाओ के बीच गिरीसुमेल का युद्ध हुआ। शेरशाह ने मारवाड़, चितौड़, नागोर तथा अजमेर पर कब्जा किया। 

जून 1545 - मालदेव ने पुन : जोधपुर पर अधिकार किया। 

1549 ई. - राजस्थान के प्रसिद्ध कवि पृथ्वीराज का जन्म।  


to be Continued.....

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