Rajasthan Ke Itihas Ki Mahatvpurn Aitihasik Ghatnayen - राजस्थान के इतिहास की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं



Rajasthan Ke Itihas Ki Mahatvpurn Aitihasik Ghatnayen - राजस्थान के इतिहास की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं 


राजस्थान का इतिहास काफी बड़ा इतिहास है। राजस्थान राज्य में होने वाली परीक्षाओ में भारत के इतिहास के साथ - साथ छात्रों को राजस्थान के इतिहास की तैयारी भी करनी चाहिए। 


यह भी पढ़े - राजस्थान की यह ट्रेन किसी होटल से कम नहीं

Rajasthan Ke Itihas Ki Mahatvpurn Aitihasik Ghatnayen


राजस्थान पटवारी भर्ती, राजस्थान एलडीसी, राजस्थान आर.ए.एस. आदि सभी महत्वपूर्ण परीक्षाओ में राजस्थान के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओ संबंधित प्रश्न अक्सर पूछ लिए जाते है। 


"Fresh Update (15.10.2020): राजस्थान पटवारी परीक्षा 2020 का कैलेंडर जारी कर दिया गया है और इसके अनुसार पटवारी भर्ती परीक्षा 10.01.2021 से 24.01.2021 को आयोजित की जाएगी! "


राजस्थान के इतिहास की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं में हमसे पूछा जाता है की कौन सी घटना कब घटित हुई और किस स्थान पर घटित हुई यानी की - " महाराणा प्रताप और अकबर की सेना के बिच युद्ध कब हुआ " या फिर आपसे पूछ लिया जाता है की दोनों के मध्य युद्ध किस स्थान पर हुआ था। 


तो ऐसे में आपको पता होना चाहिए की - 


महाराणा प्रताप और अकबर की सेना के मध्य युद्ध 18 जून 1576 को हुआ था। यह युद्ध हल्दीघाटी में हुआ था इसी कारण इसे हल्दीघाटी का युद्ध भी कहते है। 


आइये और विस्तार से पढ़े -


ईसा पूर्व की घटनाएं 


पाषाण युगीन संस्कृतियाँ 


एक लाख वर्ष पूर्व - प्रारंभिक पाषाण काल में संस्कृतिया बसी। 

पचास हजार वर्ष पूर्व - मध्य पाषाण काल में बस्तियाँ बसी। 

दस हजार वर्ष पूर्व - नव पाषाण काल में बस्तियाँ बसी। 

4480 - 3285 ईसा पूर्व - बागौर संस्कृति प्रथम। 

2765 - 500 ईसा पूर्व - बागौर संस्कृति द्वितीय। 

500 - 300 ईसा पूर्व - बागौर संस्कृति तृतीय। 


ताम्र युगनीय संस्कृतियाँ 


2500 - 1200 ईसा पूर्व - गणेश्वर संस्कृति। 

2500 - 200  ईसा पूर्व - जोधपुर संस्कृति। 

2300 - 2000  ईसा पूर्व - कालीबंगा संस्कृति। 

1800 - 1200 ईसा पूर्व - आहद की संस्कृति।

700 - 300  ईसा पूर्व - गिलुण्ड की संस्कृति। 

1200 - 900  ईसा पूर्व - नोह् संस्कृति। 


लौह युगीन संस्कृतियाँ 


300 से 600 ईसा पूर्व - जनपद युग। 

187 ईसा पूर्व - यमन राजा दिमित द्वारा चितौड़ पर आक्रमण। 

150 ईसा पूर्व - मालवगण राजस्थान व मालवा आए। 

75 ईसा पूर्व - शको द्वारा पूर्वी राजस्थान पर कब्जा। 

57  ईसा पूर्व - विक्रम संवत प्रारम्भ। 

33 ईसा पूर्व - शको द्वारा पशिचमी राजस्थान पर कब्जा। 


ईस्वी सन की घटनाएं 


78 ई. - शक संवत प्रारम्भ 

150 ई. - प्रथम रुद्रमान ने पश्चमी राजस्थान को जीता था। 

566 ई. - मेवाड़ में गुहिलों द्वारा राज्य स्थापित किया गया था। 

622 ई. - हिजरी सन की शुरुआत 

647 ई. - हर्षवर्धन की मृत्यु 

728 ई. - बप्पा रावल ने मौर्य राजा से चितौड़ का राज्य छीना था। 

731 ई. - अरबों का राजस्थान से सीधा संघर्ष 

731 ई. - तनोट (जैसलमेर) का किला बना 

736 ई. - गुर्जर राज्य की समाप्ति के बाद चौहान राजस्थान के शासक बने। 

738 ई. - प्रतिहारो ने अपनी राजधानी भीनमाल के स्थान पर जालौर बनाई।

755 ई. - बप्पा रावल ने कुकुटेश्वर से चितौड़ को जीता। 

836 ई.- मिहिरभोज का राजीरोहण 

943 ई. - सांभर के लक्ष्मण चौहान ने नाडोल पर हमला कर स्वतंत्र राज्य स्थापित किया। 

944 ई. - सपादलक्ष के चौहानों ने रणथम्भौर दुर्ग का निर्माण करवाया। 

947 ई. - रामसिंह ने टोकरा (वर्तमान टोंक) बसाया। 

956 ई. - सिंहराज प्रथम ने शेखावाटी में हर्षनाथ पहाड़ पर सीकर पर शिव मंदिर बनवाया। 

972 ई.- मालवा के परमार भूंज ने चितौड़ पर कब्जा किया। 

973 ई.- चौहान प्रतिहारो से स्वतंत्र हुए। मालवा के भूंज परमार ने आहड़ को नष्ट किया।

991 ई. - जयपाल में मुसलमानों के आक्रमण के विरुद सांभर कालिंजर और कनौज के राजाओं का संघ बनवाया। 

1008 ई. - आनंदपाल ने महमूद के खिलाफ उज्जैन, ग्वालियर कालिंजर और कनौज दिल्ली तथा सांभर के राजाओ का संघ बनवाया। 

1013 ई. - लोकदेवता तेजाजी जाट का निधन 

1024 ई. - महमूद गजनवी ने अजमेर पर आक्रमण किया और गढ़ बीठडी पर घेरा डाला लेकिन घायल हो जाने पर वह घेरा उठा कर अन्हिलवाड़ा चला गया। 

अक्टूबर, 1024 ई. - महमूद गजनवी सोमनाथ पर आक्रमण करने के लिए रवाना हुआ था। 

1026 ई. - महमूद गजनवी ने वाराह (जैसलमेर) पर हमला किया 

1031 ई.-  विमल शाह ने आबू पर्वत आदिनाथ जैन मंदिर की स्थापना करवाई 

1040 ई. - यादव विजय पाल ने मथुरा से अपनी राजधानी हटा कर विजय मंदिर गढ़ में स्थापित कर दी। जिसे अब बयाना गढ़ के नाम से जाना जाता है। 

1042 ई. - बसंतगढ़ (सिरोही) को परमार नरेश पूर्णपाल ने अपनी राजधानी बनाई। 

1113 ई. - चौहान अजय राज ने अजमेर नगर को बसाया। 

1119 ई. - मुम्मद बाहलिम ने नागौर का किला बनवाया। 

1135 ई. - अर्णोराज ने मुसलमान आक्रमणकारियों को हराकर युद्ध स्थल पर आनासागर झील (अजमेर) का निर्माण करवाया। 

1137 ई. - दुल्हेराय ने बड़गुजरों को हरा कर दौसा पर कब्जा किया। 

1151 ई. - अजमेर के विग्रहराज - 4 ने चितौड़ पर कब्जा कर मेवाड़ का कुछ हिस्सा अपने राज्य में मिलवाया। 

1152 ई. - बीसलदेव (विग्रहराज - 4) ने अपने पितृहन्ता भाई जगदेव को पराजित कर अजमेर की गद्दी प्राप्त की थी। 

1153 ई. - बीसलदेव "भारत का प्रथम चौहान सम्राट बना" था। 

1155 ई. - राव जैसल द्वारा जैसलमेर दुर्ग की स्थापना। 

1158 ई. - यादव तवनपाल ने बयाना से 15 मील दूर तवनगढ़ बसाया। 

1164 ई. - विग्रहराज चौहान ने शिवलिंग स्तम्भ नामक शिलालेख दिल्ली में खुदवाया। 

1175 ई. - गुहिलवंश सामंत सिंह ने बागड़ पर अधिकार कर लिया। 

1178 ई. - आबू के परमार नरेश धारावर्ष ने मुहमद गौरी को हराया। इसी समय मोहमद गौरी ने नाडोल तथा किराडू को लूटा था। 

1187 ई. - पृथ्वीराज - 3 गुजरात ने गुजरात पर आक्रमण किया एवं आबू के परमार शासक धारावर्ष को हराया। 

1190 ई. - जयानक ने अजमेर में पृथ्वीराज विजय नामक प्रसिद्ध महाकाव्य की रचना की। 

1191 ई. - पृथ्वीराज - 3 ने थानेश्वर के निकट तरावड़ी मैदान में मोहमद गौरी को प्रथम बार हराया (यह तराइन का प्रथम युद्ध था )

1192 ई. - तरावड़ी का दूसरा युद्ध (यह तराइन का द्वितीय था) जिसमें पृथ्वीराज मोहमद गौरी से हारा, मारा गया था। 

1192 ई. - क़ुतुबुद्दीन ऐबक ने अजमेर तथा मेरठ के विद्रोह को दबाया था। बीसलदेव ने सरस्वती मंदिर को तोडा था। हरिराज अजमेर का शसक बना था। 

1193 ई. - हरिराज ने दिल्ली पर आक्रमण कर दिया। 

1194 ई. - कनोज का जयचंद मोहमद गौरी से इटावा के पास चंदावर में मारा गया। क़ुतुबुद्दीन ऐबक ने पुन : अजमेर पर कब्जा कर लिया। 

1195 ई. - ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती अजमेर आया था। मोहमद गौरी ने बयाना के जाटों भट्टी राजपूतों को हराया। 

1196 ई. - क़ुतुबुद्दीन अन्हिलवाड़ा पर आक्रमण करने के लिए रवाना हुआ लेकिन मेरो एवं राजपूतों द्वारा रोक दिया गया। 

1197 ई. - मोहमद गौरी द्वारा तवनगढ़ व बयाना पर कब्जा। 

1206 - 1210 ई. - अढ़ाई दिन के झोपड़े का निर्माण क़ुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा करवाया गया था। 

1210 ई. - लाहौर में चौगान (पोलो) खेलते समय  क़ुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु। अजमेर का सरस्वती मंदिर एक मस्जिद में बदल दिया गया था। जो अढ़ाई दिन का झोपड़ा कहलाया था। 

1226 ई. - दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश ने रणथम्भौर पर कब्जा किया इसके पश्चात उसने बयाना, अजमेर, नागौर, जालौर पर भी कब्जा किया। 

1234 ई. - मेवाड़ के राणा जैत्रसिंह ने शमसुद्दीन इल्तुतमिश को हराया। 

1236 ई. - ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती की मृत्यु। 

1237 ई. - मेवाड़ राणा समर सिंह ने तुर्को को हराया। 

1243 ई. - राव सीहा पाली आया। 

1245 ई. - दिल्ली में सुल्तान का भाई जलालुद्दीन अपनी जान बचाने के लिए चितौड़ की पहाड़ियों में आ छुपा। 

1246 ई. - बारडदेव परमार ने बारडमेर (वर्तमान में जो बाड़मेर) को बसाया। 

1248 ई. - बलबन (उलुंग खा) ने रणथम्भौर, बूंदी, चितौड़ पर हमला किया, तथा यहाँ से काफी धन लूट कर ले गया। 

1252 ई. - नसीरुद्दीन मोहमद ने बयाना विजय की। 

1258 ई. - बलबन ने रणथम्भौर और मेवात पर आक्रमण किया। 

11 जुलाई 1301 - रणथम्भौर पर अलाउद्दीन खिलजी का अधिकार हो गया। 

25 अगस्त 1303 - अलाउद्दीन खिलजी द्वारा चितौड़ पर विजय एवं अपने पुत्र खिज्र खा को चितौड़ का हाकिम नियुक्त किया। (साका हुआ)

9 नवंबर 1308 - सिवाणा का सीतलदेव मारा गया। सिवाणा पर अलाउद्दीन का कब्जा। (यहाँ भी साका हुआ)

1311 - 1312 - अलाउद्दीन ने जालौर पर अधिकार किया। 

1316 ई. - जैसलमेर पर अलाउदीन का अधिकार (साका हुआ)

1326 ई. - हम्मीर सिसोदिया ने चितौड़ पर अपना अधिकार किया। 

1330 ई. - रावघडसी ने घड़सिया तलाब (जैसलमेर में) बनवाया। 

1341 ई. - बम्बावदा के राव देवा ने जेता मीणा से बूंदी जीता। 

21 मार्च 1352  - पीरो के पीर बाबा रामदेव जी का जन्म।

1354 ई. - राव नरसिंह ने तारागढ़ (बूंदी) का दुर्ग बनाया।

1358 ई. - डूंगरसिंह ने डूंगरगढ़ बसाया। 

1362 ई. - रावल मल्लिनाथ का जन्म। 

1364 ई. - क्षेत्रसिंह मेवाड़ की राजगद्दी पर बैठा। 

1382 ई. - मेवाड़ के राणा लाखा का राजयभिषेक। 

1383 ई. - राजपुतो व चरणों की देवी करणी का जन्म। 

1385 ई. - बाबा रामदेव ने समाधि ली। 

1394 ई. - वीरम के पुत्र चूड़ा की सहायता से इन्द्रापतिहार ने मण्डोर पर कब्जा किया तथा उसे चूड़ा राठौड़ को दिया। राव चूडा ने चामुण्डा माता का मंदिर बनवाया। मोहमद तुगलक का बयाना पर आक्रमण। 

1398 ई. - मेवाड़ के चूडा ने राजगद्दी से अपना अधिकार छोड़ा। तैमूर का भारत पर हमला। 

1399 ई. - चूड़ा राठौड़ ने अजमेर पर कब्जा किया। मालानी के रावल मल्लिनाथ का स्वर्गवास। 

1405 ई. - शिवभाण देवड़ा ने शिवपुरी (पुराना सिरोही) बसाया। 

1423 ई. - मालवा के होशगशाह ने 15 दिन के घेरे के बाद गागरोन गढ़ पर कब्जा किया तथा अचलदास खींची मारा गया। 

1425 ई. - सहसमल देवड़ा ने चंद्रावती के स्थान पर सिरोही नगर बसाया। 

1426 ई. - रणमल राठौड़ की सेना ने जैतारण व सोजत पर अधिकार किया। 

1433 ई. - राणा मोकल अहमदाबाद के सुलतान के विरुद लड़ते हुए मारे गए। 

1438 ई. - मण्डोर का रणमल राठौड़, मेवाड़ में मारा गया। 

1440 ई. - रणकपुर में त्रिलोक्य दीपक मंदिर की स्थापना हुई। 

1443 ई. - महाराणा कुम्भा तथा मालवा के सुल्तान महमूदशाह खिलजी के बीच कुम्भलगढ़ के निकट युद्ध। महमूद विफल होकर लोट गया। 

1444 ई. - मालवा के महमूद ने गागरोन पर कब्जा किया। 

2 फरवरी, 1449 - महाराणा कुम्भा का कीर्तिस्तम्भ बनकर पूर्ण। 

1450 ई. - कायम खा ने राजपूतो के राज्य को जीतकर नपा राज्य स्थापित किया, जिसकी राजधानी झुंझुनू बनाई गई। 

1451 ई. - बिश्नोई मत के पर्वतक जांभोजी का पीपासर में जन्म 

1453 ई. - महाराणा कुम्भा ने अचलगढ़ दुर्ग की प्रतिष्ठा करवाई। 

1455 ई. -  मालवा के सुल्तान महमूद ने अजमेर पर कब्जा कर लिया। 

1456 ई. - महाराणा कुम्भा ने गुजरात की सेना को हराकर नागौर जीता। 

1458 ई. - राव जोधा का राज्यअभिषेक। 

1459 ई. - राव जोधा द्वारा जोधपुर नगर बसाया गया। 

1460 ई. - मंडोर की चामुंडा की मूर्ति जोधपुर के किले में स्थापित की गई। 

1465 ई. - राव जोधा का पुत्र बीका, अपने चाचा काथल के साथ जांगल प्रदेश गया, तथा उसको जीतकर अपना नया राज्य स्थापित किया। 

1478 ई. - वल्ल्भ सम्प्रदाय के संस्थापक श्री वलभाचार्य तैलंग का जन्म। 

12 अप्रेल, 1482 - महाराणा संग्राम सिंह का जन्म। 

1483 ई. - राजस्थान में घोर अकाल। 

13, अप्रेल, 1488 - राव बीका ने बीकानेर नगर बसाया। 

1492 ई. - जोधपुर नरेश सातल का कोसाणा के पास अजमेर के मल्लू खा के साथ युद्ध हुआ। यवन सेनापति घडूला मारा गया। सब से राजस्थान में घडूले मेले का प्रचलन है। 

1503 ई. - मालवा के नासिर शाह ने मेवाड़ पर चढ़ाई की वह महाराणा रायमल के सामंत राजा भवानीदास की पुत्री को लेकर लोट गया। वह लड़की बाद में चितौड़ बेगम कहलाई। 

1504 ई. - 12 जुलाई को मीराबाई का जन्म। 

1508 ई. - महाराणा संग्राम सिंह मेवाड़ की राजगद्दी पर बैठा। 

1516 ई. - महाराणा सांगा के ज्येष्ठ कुंवर भोजराज का मीरा बाई से विवाह। 

1517 ई. - दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी और मेवाड़ के महाराणा सांगा के बीच बूंदी के निकट खतौली का युद्ध हुआ। जिसमें महाराणा सांगा की विजय हुई। 

1527 ई. - बिश्नोई धर्म के प्रवर्तक जंभा की तालवा गांव (बीकानेर) में मृत्यु 16 मार्च 1527 - महाराणा सांगा और बाबर के बीच खानवा का युद्ध। इसमें महाराणा सांगा की हार हुई। डूंगरपुर के रावल उदयसिंह रावत, रतनसिंह चुण्डावत, हसन खा मेवाती आदि वीर गति को प्राप्त हुए। भारत में पहली बार इस युद्ध में गोला बारूद का उपयोग हुआ। 

1532 ई. - मालदेव मारवाड़ की राजगद्दी पर बैठा। उसका राज्याभिषेक सोजत दुर्ग में हुआ। 

1535 ई. - मेवाड़ की राजमाता कर्मावती ने बहादुरशाह के 8 मार्च आक्रमण पर 13 हजार स्त्रियों के साथ जौहर किया। 

25 अप्रेल 1535 ई. - चितौड़ पर वापस सीसोदियो का कब्जा। 

1536 ई. - मालदेव ने नागौर के खानजादे पर चढ़ाई कर नागौर पर कब्जा किया। 

9 मई 1540 - "महाराणा प्रताप का जन्म"

30 जुलाई 1541 - राव चन्द्रसेन राठौड़ का जन्म 

5 जनवरी 1554 - रावल मालदेव और शेरशाह की सेनाओ के बीच गिरीसुमेल का युद्ध हुआ। शेरशाह ने मारवाड़, चितौड़, नागोर तथा अजमेर पर कब्जा किया। 

जून 1545 - मालदेव ने पुन : जोधपुर पर अधिकार किया। 

1549 ई. - राजस्थान के प्रसिद्ध कवि पृथ्वीराज का जन्म।

1556 ई. - जोधपुर नरेश मालदेव की सेना अजमेर के सूबेदार हाजी खां सेना से हारी। इस युद्ध में मेवाड़ के राणा उदयसिंह एवं बीकानेर के नरेश कल्याण मल ने हाजी खां की सहायता की। 

24 जनवरी 1557 - हरमाड़ा के युद्ध में मालदेव और हाजी खां की सेना ने राणा उदय सिंह व उसके सहायक मेड़ता के जयमल को पराजित किया। डूंगरपुर के महारावल आसकरण ने महाराणा का साथ दिया। 

1559 ई. - महाराणा उदयसिंह ने उदयपुर बसाया।

1560 ई. - महाराणा उदयसिंह ने उदयसागर तालाब बनाया, वल्ल्भ सम्प्रदाय के वल्ल्भाचार्य की मृत्यु, विक्रमसिंह ने देवलिया प्रतापगढ़ को राजधानी बनाया। 

1562 ई. - जनवरी 20 भारमल ने अकबर की अधीनता उसके सांगानेर के पड़ाव पर स्वीकार की। 

6 फरवरी 1562 - आमेर की भारमल की पुत्री हरखा बाई (मरियम उज्जमानी) का विवाह अकबर के साथ हुआ। जिसके गर्भ से बादशाह जहगीर का जन्म हुआ। 

10 फरवरी 1562 आमेर के भगवंत दास व मानसिंह की मुगल दरबार में नियुक्ति। 

10 नवंबर 1562 - मारवाड़ के मालदेव की मृत्यु। 

1564 ई. - अकबर ने हिन्दुओ पर से जजिया कर हटाया, मुगल सेना ने जोधपुर पर अधिकार किया। 

1565 ई. - जोधपुर पर मुगलों का अधिकार हो जाने से वहा मुगल बादशाह के सिक्को का प्रचलन। 

25 फरवरी 1568 चितौड़ का तीसरा साका। 

2 मार्च 1568 मीरा बाई की मृत्यु। 

5 नवंबर 1570 अकबर का नागौर दरबार आयोजित 

1571 ई. - अकबर द्वारा अजमेर की चार दीवारी तथा अपने निवास के लिए महल बनवाया जो वर्तमान में तोपखाना कहलाता है। 

28 फरवरी 1572 - महाराणा प्रताप की गोगुन्दा में राजगद्दी। 

18 जून 1576 - महाराणा प्रताप तथा कछवाह राजा मानसिंह (मुगल सेनापति के बिच युद्ध) हल्दीघाटी का युद्ध। 

3 अप्रेल 1578 - शाहबाज खां ने कुम्भलगढ़ पर कब्जा किया। 

4 अप्रेल 1578 - शाहबाज खां ने उदयपुर पर कब्जा किया। 

1580 ई. - अकबर द्वारा जोधपुर पर पूर्ण कब्जा। 

1581 ई. - राव चन्द्रसेन की मृत्यु। 

1582 ई. - महाराजा रायसिंह ने बीजा देवड़ा से सिरोही छीनकर आधा भाग राव सुरताण को दे दिया। 

1583 ई. - बादशाह अकबर ने जोधपुर के राव मालदेव की पोत्री तथा आमेर के भगवंत दास के चचेरे भाई जयमल कछवाह की पत्नी को सती होने से रोका। 

1585 ई. - आमेर के भगवान दास की पुत्री मानबाई का शहजादा सलीम के साथ लाहौर में विवाह। 

1586 ई. - जोधपुर के राजा उदयसिंह की पुत्री मानमती का शहजादा सलीम से विवाह हुआ। यह बेगम बाद में जोधा बाई कहलाई। 

1589 ई. - बीकानेर के राय सिंह ने किले का शिलान्यास किया। 

1593 ई. - तिलराज में पशुमेला भरना आरम्भ हुआ। 

19 जनवरी 1597 - महाराणा प्रताप की मृत्यु 

1600 ई. - महाराजा रायसिंह को नागौर जागीर में दिया। 

1603 ई. - जयपुर में संत दादू की मृत्यु 

1606 ई. - जोधपुर नगर के बाहर राजा सूर सिंह ने सूर सागर तालाब बनवाया। 

1612 ई. - कृष्ण सिंह राठौड़ ने किशनगढ़ नगर बसाया। 

1614 ई. - आमेर के मिर्जा राजा मानसिंह का देहांत 

5 फरवरी 1615 - कुंवर कर्ण सिंह बादशाह जहांगीर के दरबार में पहुंचना। 

1616 ई. - सर जेम्स का राजदूत टामस रो अजमेर में जहांगीर के दरबार ,इ संधि हेतु पहुंचना। 

1621 ई. - बादशाह जहाँगीर ने गजसिंह को दलथम्भन की पदवी तथा जालोर का परगना मनसब की जागीर में दिया। 

1625 ई. - बूंदी के राव रतन को बादशाह ने 5 हजारी जात व 5 हजार सवार का मनसब तथा राव राय की पदवी दी। 

1627 ई. - बादशाह ने माधोसिह को दलथ्म्भन की पदवी तथा जालौर का परगना मनसब की जागीर में दिया। 

1630 ई. - जोधपुर नरेश गजसिंह को बादशाह जहगीर ने महाराज की पदवी दी। 

1633 ई. - बादशाह ने सेना भेजकर देवलिया (प्रतापगढ़) वर महारावल का कब्जा करवाया। 

1637 ई. - शाहजांह ने अजमेर की आन सागर झील पर बारह्दरियाँ बनवाई। 

1638 ई. - राठौड़ दुर्गादास का जन्म। 

1639 ई. - आमेर नरेश जयसिंह को बादशाह ने मिर्जा राजा की पदवी दी। 

1644 ई. - बीकानेर व नागौर के शासको की सेना के बीच मतीरे के राड की लड़ाई। 

1649 ई. - मिर्जा राजा जयसिंह की मनसब में पांच हजार जात व पांच हजार सवार किये गए। जिसमे तीन हजार सवार दो अस्पा सेई अस्पा थे। 

1652 ई. - उदयपुर में जयसिंह प्रथम ने जगदीश मंदिर का निर्माण पूर्ण करवाया। 

1654 ई. - जोधपुर नरेश जसवंत सिंह को मनसब में 6000 जात व 6000 सवार जिसमे 5000 दो अस्पा सेह अस्पा के दी जाकर महाराज की पदवी दी गई। 

1657 ई. - जोधपुर नरेश जसवंत सिंह का मनसब 7000 जात व 7000 सवार किया गया। 

16 अप्रेल 1658 बूंदी का राव शत्रुसाल सिंह सामूगढ़ के युद्ध में मारा गया। 

15 जनवरी 1659 जोधपुर नरेश जसवंत सिंह खजुवाह का युद्ध प्रारम्भ होने के पूर्व ही शाह शूजा के इशारे पर ओरंगजेब की सेना में लूटमार कर मारवाड़ चला गया। 

14 मार्च 1659 औरंगजेब व दारा शिकोह के बीच दोराई (अजमेर) का युद्ध। 

1660 ई. - महाराणा राजसिह का किशनगढ़ की राजकुमारी से विवाह। 

1662 ई. - राजसमुंद्र (राजसमंद झील) निर्माण प्राम्भ। 

1663 ई. - जसवंत सिंह की हाड़ी रानी में राई का बाग़ बनवा कर हाड़ीपुर बसाया। 

1664 ई. - औरंगजेब ने मिर्जा राजा जयसिंह को शिवजी को दबाने के लिए नियुक्त किया। 

1665 ई. - ओरंगजेब ने आदेश जारी किया की भविष्य में बाहर से लाए जाने वाले माल पर चुंगी मुसलमानों से ढाई प्रतिशत तथा हिन्दुओ से 5 प्रतिशत वसूली जाएगी। 

12 जून 1665 शिवजी ने मिर्जा राजा जयसिंह से पुरन्दर की संधि की। 

1667 ई. - आमेर के मिर्जा राजा जयसिंह की बुरहानपुर में मृत्यु। 

1169 ई. - मथुराधीश की प्रतिमा बूंदी लाई गई जो 1744 में कोटा ले जाई गई। 

1670 ई. - राजसमंद झील का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ। 

1671 ई. -  कल्याणसिंह नरुका को माचेड़ी (अलवर) की जागीर आमेर नरेश रामरसिंह ने दी। 

1672 ई. - नाथद्वार में गोवर्धन नाथ की मूर्ति स्थापित। 

1676 ई. - राजसमुंद्र का नामकरण। 

1678 ई. - बांसवाड़ा का फरमान महारावल कुशल सिंह के नाम पर। जोधपुर नरेश जसवंत सिंह की मृत्यु। 

1679 ई. - बादशाह ने सेना जोधपुर पर कब्जा करने के लिए भेजी। जोधपुर के महाराज अजीत सिंह का लाहौर में जन्म। 

1680 ई. - मुगल सेना ने देबारी (मेवाड़) पर अधिकार किया। औरेगजेब ने आमेर के मंदिरों को तोड़ने का आदेश दिया 22 अक्टूबर 1680 महाराज राजसिंह का देहांत। 

1681 ई. - मुहमद अकबर ने देसूरी में ओरंगजेब के विरुद विद्रोह कर अपने आपको बादशाह घोषित किया। 

1688 ई. - सवाई जयसिंह का जन्म 

1690 ई. - बादशाह ने उदयपुर के महाराणा को उसके लिए पुर तथा बदनौर के परगने वापस दे दिए तथा उनका मनसब 6 हजारी कर दिया। 

1707 ई. - बूंदी का जोधसिंह हाड़ा गणगौर की प्रतिमा सहित तालाब में डूबा तब से प्रसिद्ध है "हाडो ले डुब्यो गणगौर"

1708 ई. - बादशाह आमेर पहुंचा तथा आमेर का नाम मोमोनीबाद रखा। 

1710 ई. - बादशाह ने जोधपुर नरेश अजित सिंह को 4000 जगत व 4000 सवार का मनसब दिया। 

1712 ई. - बादशाह जहाँदार शाह ने जजिया कर बंद करने की घोषणा की। जोधपुर नरेश अजित सिंह ने अजमेर और अधिकार कर लिया। 

1713 ई. - जहाँदार शाह और फर्रुखसियर के बीच सामूगढ़ युद्ध के अंत में चूड़ामन जाट ने दोनों पक्षों को लुटा। 

1714 ई. -  जोधपुर नरेश अजित सिंह को गुजरात का सूबेदार नियुक्त करने का फरमान भेजा। 

1718 ई. - चूड़ामन अपने भतीजे के साथ दिल्ली बादशाह से मिला। बादशाह ने उसे राजराजेश्वर की उपाधि दी। दुर्गादास राठौड़ की मृत्यु। 

1719 ई. - जजिया कर बंद कर दिया गया तथा हिन्दुओ पर धार्मिक स्थानों की यात्रा करने पर प्रतिबंद हटाए गए। 

1720 ई. - कोटा के महाराव भीम सिंह ने बूंदी पर अधिकार किया बादशाह मुहम्मद शाह ने चूड़ामन को ठाकुर की पदवी तथा अधिकार दिए। 

1721 ई. - बादशाह ने आमेर नरेश जयसिंह को "सरमहाराज" की उपाधि दी। 

1727 ई. - जयपुर नगर की नीव सवाई जयसिंह ने रखी। 

1730 ई. - जोधपुर के पास खेजड़ली गांव में हरे वृक्षों को बचाने के लिए 363 स्त्री - पुरुष बलिदान हो गए। 

1733 ई. - सवाई जयसिंह का मराठों से मंदसौर के पास युद्ध। जयसिंह को युद्ध में असफलता होने पर मराठों को चौथे देने का समझौता करना पड़ा।  

1734 ई. - मराठों का मुकाबला करने के लिए मेवाड़ की सीमा पर हुरड़ा नामक स्थान पर राजस्थान के 5 नरेशों - जयपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, किशनगढ़ का सम्मेलन हुआ तथा एक अहमदनामा लिखा गया।, सवाई जयसिंह ने अश्वमेघ यज्ञ किया, जयपुर में गोविन्द देवजी के मंदिर की स्थापना। 
1735 ई. - मराठो ने सांभर को लुटा। गोविन्द देव जी की मूर्ति 1714 में वृंदावन से लाकर आमेर के वृंदावन बाग में रखी और वहाँ से जयपुर में इस वर्ष मंदिर निर्माण के पश्चात स्थापित की गई। 
1736 ई. - पेशवा चौथ वसूलने के उदेश्य से उदयपुर पहुंचा। 
1741 ई. - जोधपुर नरेश अभयसिंह तथा उसके भाई बख्तसिंह द्वारा जयपुर नरेश जयसिंह के साथ मगवाणा के मैदान में युद्ध हुआ जिसमे जोधपुर की सेना ने जयपुर की सेना को काफी नुकसान पहुंचाया। 
1743 ई. - जयपुर नरेश सवाई जयसिंह की मृत्यु। 
1744 ई. - कोटा का बूंदी पर कब्जा। 
1745 ई. - बूंदी नरेश उम्मेदसिंह ने जयपुर की सेना को बिथौड़ा के युद्ध में हराया। 
1748 ई. - जयपुर नरेश ईश्वरी सिंह व अहमदशाही अब्दाली के बीच मानपुर में युद्ध हुआ। ईश्वरी सिंह युद्ध में हारा। 
1750 ई. - बख्त सिंह व रामसिंह की सेना के बीच पीपाड़ के निकट युद्ध। जयपुर नरेश ईश्वरी सिंह ने आत्महत्या की। 
1751 ई. - जयपुर में मराठो के विरुद्ध दंगे। 
1752 ई. - बादशाह अहमदशाह द्वारा भरतपुर के बदनसिंह को महेंद्र की पदवी देकर राजा बना दिया गया और सूरजमल को राजेंद्र की पदवी देकर कुँवर बहादुर बना दिया गया। 
1754 ई. - गंगारडा के युद्ध में जोधपुर नरेश विजयसिह, बीकानेर नरेश गजसिंह व किशनगढ़ नरेश बहादुर सिह मराठ जयअप्पा से हारे। 
1755 ई. - विजय सिंह ने मराठो से संधि की। 
1759 ई. - रणथम्भौर के किले पर कब्जा करने के लिए ककोड़ के मैदान में जयपुर व होल्कर की सेना के बीच युद्ध। 
1760 ई. - अहमदशाह अब्दाली ने डींग के चौफेर घेरा डाला महाराजा विजयसिंह ने जोधपुर नगर में गंग श्याम मंदिर बनवाया। 
1761 ई. - भरतपुर नरेश सूरजमल ने आगरा नगर व किले पर कब्जा किया।, जोधपुर के महाराज के महाराज विजयसिंह ने अपने चाँदी के सिक्कें चलवाये। 
1763 ई. - भरतपुर नरेश सूरजमल का मुगल सेनापति नजीबुद्दौला से दिल्ली के निकट युद्ध। 
1764 ई. - भरतपुर नरेश ने तीन मास तक दिल्ली का घेरा रखकर उठा लिया।
1773 ई. - उदयपुर का महाराणा अरिसिंह बूंदी के राव अजीतसिंह द्वारा मारा गया।  
1774 ई. - मिर्जा नजफ़ ने भरतपुर नरेश से आगरा खाली करवाया। 
1775 ई. - माचेड़ी नरेश प्रताप सिंह ने अलवर से भरतपुर के जाटों का कब्जा हटा कर उसे अपनी राजधानी बना अलवर राज्य स्थपना की। बादशाह ने उसे जयपुर राज्य से स्वतंत्र माना। 
1776 ई. - मिर्जा नजफ़ ने सम्पूर्ण भरतपुर परगने के जाट राज्य पर अधिकार कर लिया परन्तु विपरा रानी की प्राथना पर वापस लौटा दिया। 
1779 ई. - बादशाह ने जयपुर नरेश प्रताप सिंह का टिका किया तथा दोनों के बिच समझौता।, गोहद के महाराज लोकेन्द्र ने अंग्रेजो से संधि की। 
1780 ई. - जोधपुर नरेश विजयसिह ने बादशाह से अनुमति लेकर अपने नाम से विजयसिह चाँदी के रूपये चलवाये तथा जोधपुर और नागौर की टकसाल चालू की। 
1781 ई. - जोधपुर टकसाल में शुद्ध सोने के मोहरे बनने लगी। 
1786 ई. - महादजी सिंधिया तथा बादशाह ने कर प्राप्ति के लिए जयपुर में प्रवेश किया। 
1787 ई. - तुंगा का युद्ध, जिसमें जयपुर तथा जोधपुर की सम्मेलित सेना ने मराठो को हराया। 
1789 ई. - जयपुर नरेश प्रताप सिंह तथा मराठो के बिच "पाटन" का युद्ध जिसमे मराठों की विजय।, मेड़ता का युद्ध जोधपुर नरेश विजय सिंह तथा मराठो के बिच जिसमे मराठो की विजय। 
1791 ई. - अजमेर दुर्ग सिंधिया के सुप्रुद्ध। 
1796 ई. - झाला जालिम सिंह द्वारा झालरापाटन कस्बे की नीव रखी गई। 
1798 ई. - महात्मा रामचरण दास की शाहपुरा में मृत्यु। 
1799 ई. - जयपुर में हवामहल का निर्माण। 
1800 ई. - जॉर्ज टॉमस (थॉमस) ने अपने इतिहास ग्रंथ में सबसे पहले राजपुताना शब्द का प्रयोग किया। 
1803 ई. - गवर्नर वेलिजेली ने तय किया की राजस्थान के नरेश भारत के उत्तर में सुरक्षा के लिए ठीक रहेंगे। अंत उनको स्वतंत्रता को गारंटी दे दी जाये। 
25 सितंबर 1803 ई. - भरतपुर नरेश रणजीत सिंह ने अंग्रेजों से स्थायी मित्रता की संधि की जिसके अनुसार कृष्णगढ़ कठुम्बर, रेवाड़ी, गोकुल और सेहड़ के पाँच परगने भरतपुर राज्य में माने गए। 
1 नवंबर 1803 ई. - अलवर के लसवाड़ी मैदान में मराठों तथा अंग्रेजो सेनापति लेक की फौजो के मध्य युद्ध। जिसमे सिंधिया तथा पेशवा की सम्मलित फौज की करारी  पराजय हुई। अलवर ने इस युद्ध में अंग्रेजो का साथ दिया। 
12 दिसंबर 1803 ई. - जयपुर महाराजा की मित्रता पारस्परिक सहायता के लिए अंग्रेजो से संधि हुई। 
22 दिसंबर 1803 ई. - जोधपुर नरेश मानसिंह और अंग्रेज सरकार के बीच मित्रता एवं पारस्परिक सहयोग हेतु संधि हुई। 
25 नवंबर 1804 ई. - प्रतापगढ़ के महारावल ने अंग्रेजी सरकार से मित्रता व सहायता की संधि की। 
16 अप्रेल 1805 ई. - बीकानेर के सूरत सिंह द्वारा भटनेर दुर्ग मंगलवार के दिन जीता गया तथा इसका नाम हनुमान गढ़ रखा गया। 
1805 ई. - जोधपुर नरेश मानसिंह ने जोधपुर किले में हस्तलिखित पुस्तकों का एक पुस्तकालय पुस्तक प्रकाश स्थापित किया। जोधपुर में महामंदिर की प्रतिष्ठा। 
17 अप्रेल 1805 ई. - भरतपुर नरेश ने अंग्रेजो से दुबारा मित्रता व आपसी सहायता की संधि की। 
1807 ई. - जयपुर व जोधपुर की सेना के बीच परबतसर की घाटी (गंगोली) घाटी में युद्ध। जोधपुर की सेना हारी। 
1810 ई. - उदयपुर के महाराणा भीमसिंह ने अमीर खा के प्रस्ताव पर कृष्ण कुमारी को जहर पीला कर मार डाला। 
1817 ई. - नवंबर 9, करौली राज्य ने अंग्रेजी से मित्रता व सहायता की संधि की। 
26 दिसंबर 1817 - कोटा राज्य ने अंग्रेजों से मित्रता व सहायता की संधि की।
1818 ई. - 6 जनवरी, जोधपुर, 13 जनवरी उदयपुर, 10 फरवरी बूंदी, 20 फरवरी कोटा द्वारा अंग्रेजो से मित्रता व सहायता की संधि की। 
8 मार्च 1818 - कर्नल टॉड मेवाड़ व हाड़ौती का पॉलिटिकल एजेंट नियुक्त होकर उदयपुर पहुंचा। 
2 अप्रेल 1818 - जयपुर में कंपनी से सहायता व मित्रता संधि की।  
16 सितंबर - बांसवाड़ा से अंग्रेजो ने सहायता व मित्रता संधि की। 
5 अक्टूबर - प्रतापगढ़ राज्य से अंग्रेजो से मित्रता व सहायता की संधि हुई। 
31 अक्टूबर 1818 - सिरोही राज्य की अंग्रेजो से मित्रता व सहायता की संधि हुई। 
20 नवंबर - नसीराबाद में अंग्रेजी छावनी की स्थापना। 
11 दिसंबर 1818 - डूंगरपुर एवं 12 दिसंबर 1818 जैसलमेर से अंग्रेजो ने सहायता और मित्रता की संधि। 
1821 ई. - कोटा नरेश महारावल किशोर सिंह, कर्नल टॉड व जालिम सिंह की फौज से हारा। 
1822 ई. - मेरवाड़ा बटालियन की स्थापना की गई जिसमे मेर व मीणा ही भर्ती किये गए। 
11 सितंबर 1823 - सिरोही राज्य द्वारा अंगेजो से मित्रता व सरक्षण के लिए संधि की। 
1824 ई. - डूँगरपुर व बांसवाड़ा राज्यों ने स्थानीय सेना रखने के लिए अंग्रेजो से संधि की। 
1825 ई. - उत्तराधिकार मामले को लेकर अंग्रेजो ने भरतपुर पर आक्रमण किया। 
1826 ई. - भरतपुर गढ़ पर अंग्रेजो का कब्जा। 
1828 ई. - मारवाड़ में अव्यवस्था बताकर लार्ड विलियम बेंटिक ने महाराजा मानसिंह को राजगद्दी से हटाया। 
4 दिसंबर 1828 - लार्ड विलियन बेंटिक ने सती प्रथा बंद की। 
1832 ई. - अजमेर में राजपुताना रेजीडेंसी कायम। 
1834 ई. - 5 अप्रेल, जैसलमेर व बीकानेर की सेनाओ के बीच बसवाणी की लड़ाई हुई। राजस्थान के दो राज्यों के बीच यह अंतिम लड़ाई थी। 
1835 ई. - जोधपुर लीजियन का गठन। 
1837 ई. - एरिनपुरा छावनी (सिरोही) स्थापित की गई। 
1838 ई. - अंग्रेजी सरकार द्वारा जालिम सिंह (कोटा) के वंशज मदन सिंह को 17 परगने देकर झालावाड़ की स्थापना की गई। 
1839 ई. - अजमेर कमिश्नर सदरलैंड ने अंग्रेजी शिक्षा की पहली स्कूल स्थापित। 
1841 ई. - मेवाड़ भील कोर की स्थापना। 
1842 ई. - अलवर व भरतपुर राज्यों में अंग्रेजी शिक्षा की पहली स्कूल स्थापित। 
1844 ई. - जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, राज्यों में कन्या वध गैर क़ानूनी घोषित। जयपुर में अंग्रेजी शिक्षा की पहली स्कूल स्थापित। जयपुर में महाराजा कॉलेज की स्थापना। 
1845 ई. - एजीजी का कार्यालय अजमेर से जयपुर लाया गया। 
1847 ई. - जयपुर राज्य में बच्चों को बेचने को अवैध घोषित किया। 
1848 ई. - अजमेर नगर की पहली बार जनगणना। 
1853 ई. - उदयपुर में डाकन प्रथा गैर क़ानूनी घोषित। 
1854 ई. - सिरोही के राव शिव सिंह ने अपने राज्य का प्रबंध और अच्छी तरह चलाने जे लिए अंग्रेजो को सौंपा। 
1856 ई. - जयपुर में रामनिवास बाग की नींव रखी गई। 
1857 ई. - भारत में सिपाही विद्रोह मेरठ से प्रारंभ। 
21 मई 1857 - एरिनपुरा में सैनिक विद्रोह। 
28 मई 1857 - नसीराबाद छावनी में सेना की दो टुकड़ियों ने सशस्त्र विद्रोह किया। 
31 मई 1857 - भरतपुर की सेना ने होडल में विद्रोह किया। 
3 जून 1857 - नीमच छावनी नष्ट कर विद्रोह सैनिक निम्बाहेड़ा पहुंच वे उस पर कब्जा किया। 
11 जुलाई 1857 - नीमच तथा नसीराबाद के विद्रोह सैनिको ने अछनेरा में अलवर राज्य की सेना पर आक्रमण किया। 
8 सितंबर 1857 - बिठुआ के निकट जोधपुर की सेना तथा आऊवा के कुशाल सिंह के मध्य युद्ध। 
18 सितंबर 1857 - एजीजी लारेंस का आऊवा पर आक्रमण कर दिया। 
15 अक्टूबर 1857 - कोटा राज्य की सेना ने मेहताब खा के नेतृत्व में अंग्रेजी रेजीडेंसी पर आक्रमण कर दिया। 
1858 ई. - बम्बई से आई अंग्रेजी सेना ने विद्रोहियों को हरा कर कोटा पर कब्जा कर लिया।, राजस्थान की रियासतों के सिक्कों पर बादशाह के नाम के स्थान पर महारानी विक्टोरिया का नाम लिखा जाने लगा।, तात्या टोपे झालरापाटन पहुंचे। 
23 दिसंबर 1858 - तांत्या टोपे के सैनिक का प्रतापगढ़ में अंग्रेजी सेना से सामना हुआ। 
30 जनवरी 1858 - कैप्टन होम्स तथा जोधपुर सेना की सयुंक्त सेना द्वारा आऊवा पर आक्रमण। 
14 जनवरी 1859 - ब्रिगेडियर शावर्स जयपुर और भरतपुर के बीच देवसा में तांत्या और फिरोजशाह की सेना के बीच लड़ाई। 
21 जनवरी 1859 - कर्नल होम्स ने सीकर में तांत्या की सेना को पराजित किया। 
1860 ई. - झालावाड़  नरेश पृथ्वी सिंह ने झालरापाटन के पास नवलखा दुर्ग की नीव रखी। 
1861 ई. - बीकानेर नरेश को सिपाही विद्रोह के वक्त की सेवा के उपलक्ष्य में सिरसा जिले के टी. बी. परगने के 41 गाँव मिले। , जयपुर में पहला मेडिकल कॉलेज खोला गया।, निम्बाहेड परगना, उदयपुर से वापस लिया एवं टोंक के नवाब को दिया। 
1862 ई. - "मार्च 1862 राजस्थान के समस्त नरेशों को सिवाय टोंक के नवाब के गोद लेने का अधिकार अंग्रेज सरकार से मिला। टोक के नवाब को यह अधिकार 28 मई 1862 को मिला। 
1863 ई. - बूंदी में अंग्रेजी स्कुल खुला। 
1864 ई. - आउवा ले कुशाल सिहं, आजादी की अलख जगाने वाले सूरमा का उदयपुर में स्वर्गवास हुआ। 
1865 ई. - उदयपुर में अंग्रेजी भाषा की शिक्षा दी जाने लगी। जयपुर, उदयपुर तथा भरतपुर में कन्या पाठशालाएँ खोली गई। 
1867 ई. - टोंक का नवाब राजगद्दी से हटाया गया तथा लावा ठिकाना टोंक से स्वतंत्र किया गया। 
1867 ई. - जोधपुर में प्रथम अंग्रेजी स्कुल खोला गया। 
1868 ई. - 7 अगस्त जयपुर नरेश एवं अंग्रेजो के बीच सांभर नमक समझौता (27 जनवरी 1835 अंग्रेजो ने सांभर नगर तथा झील पर कब्जा किया था) 
फरवरी 1870 - जयपुर तथा जोधपुर नरेशों ने सांभर झील अंग्रेजो को सौंपी। 1872 ई. - बीकानेर में पहला सरकारी स्कूल खुला। 
1873 ई. - जयपुर में fa तक शिक्षा देते हुए महाराजा कॉलेज स्थापित। कोटा में पहला डाकघर खुला। 
अप्रेल 1874 - आगरा फोर्ट बांदीकुई रेल प्रारम्भ। 
12 जून 1874 - स्वामी दयानंद सरस्वती की सत्यार्थ प्रकाश ग्रंथ की रचना। 21 अक्टूबर 1875 - मेयो कॉलेज प्रारम्भ। 
10 अप्रेल 1875 - आर्य समाज की मुंबई में स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापना। 
1879 ई. - जोधपुर - अंग्रेजो के बीच डीडवाना, पंचपदरा, फलौदी नामक ग्रंथ। 
1883 ई. - आर्य समाज की परोपकारणी सभा का पुनगर्ठन कर उदयपुर में पंजीयन हुआ। 
12 अगस्त 1883 - दयानंद सरस्वती जोधपुर पहुंचे।  
29 सितंबर 1883 - स्वामी दयानंद को जोधपुर में जहर दिया गया। 
16 अक्टूबर 1883 - द्यानंद जोधपुर से आबू रवाना। 
30 अक्टूबर 1883 - अजमेर में द्यानंद सरस्वती की मृत्यु। 
28 दिसंबर 1883 - अजमेर में स्वामी द्यानंद की परोपकारिणी सभा का प्रथम अधिवेशन हुआ। 
1887 ई. - जोधपुर में महिला स्कुल स्थापित हुआ। 
1888 ई. - राजपूताने के एजीजी कर्नल वालटर की अध्यक्षता में वालटर राजपूत हितकारिणी सभा अजमेर में स्थापित की गई। 
1889 ई. - जोधपुर राज्य में सरदार रिसाला संगठित की गई। 
1891 ई. - खेतड़ी का अजित सिंह आबू में विवेकानंद से मिला। 
1895 ई. - अजमेर में पहला सप्ताहिक राजपुताना टाइम्स शुरू किया गया। 
1897 ई. - बिजौलिया किसान आंदोलन प्रारम्भ। 
1900 ई. - सर प्रताप सिंह जोधपुर रिसाला लेकर चीन युद्ध के लिए रवाना। जोधपुर में विजयशाही सिक्का बंद, जोधपुर टकसाल बंद।  
1 जनवरी 1903 - दिल्ली दरबार में राजस्थान के कई नरेश सम्मलित हुए। उदयपुर महाराणा दिल्ली जाकर भी दरबार में उपस्थित नहीं हुआ। 
1905 ई. - बंगाल विभाजन। सम्पूर्ण भारत में स्वतंत्रता आंदोलन की लहर से राजस्थान भी प्रभावित। 
1908 ई. - अजमेर में राजपुताना संग्रालय स्थापित। 
1911 ई. - जोधपुर राज्य में सोमवार के स्थान पर इतवार की साप्ताहिक छूटी की घोषणा। 
12 दिसंबर 1911 - दिल्ली दरबार, आयोजन राजधानी कलकत्ता बनाई गई। 
1912 ई. - जोधपुर में चीफ कोर्ट की स्थापना। 
23 दिसंबर 1912 - दिल्ली में वायसराय हार्डिंग पर चाँदनी चौक में बम फेका गया। 
1913 ई. - बांसवाड़ा में शासन द्वारा परेशान किये जाने पर भील आंदोलन की शुरुआत। 
1915 ई. - जोधपुर में मरुधरा हितकारणी सभा स्थापित। जोधपुर में अजायबघर तथा पुस्तकालय की स्थापना। 
21 फरवरी 1915 - राव गोपाल सिंह तथा विजय सिंह पथिक द्वारा खरवा के निकट सशस्त्र क्रांति की तिथि निश्चित की गई लेकिन यह योजना सफल नहीं हो सकी। 
1916 ई. - बिजौलिया किसान आंदोलन नेतृत्व विजय सिंह पथिक ने संभाला। 
1918  ई. - झालावाड़ नरेश को वंशानुगत महाराज राणा की पदवी भारत सरकार द्वारा। 
1920  ई. - जोधपुर में मारवाड़ सेवा संघ का भवरलाल सर्राफ की अध्यक्षता में गठन हुआ। 
1921  ई. - जमला लाल बजाज ने राव बहादुर की पदवी त्यागी। 
1922  ई. - सिरोही राज्य की रोहिड़ा तहसील में मोतीलाल तेजावत के नेतृत्व में भील व रासिया आंदोलन हुआ। 
1923  ई. - विजय सिंह पथिक गिरफ्तार। 
1924  ई. - मरुधरा मित्र हितकारणी सभा का नाम बदलकर मारवाड़ हितकारणी सभा किया गया। 
1925  ई. - जोधपुर के इतिहासकार जगदीश सिंह गहलोत ने पहली बार राजस्थान की भाषा राजस्थानी घोषित करने तथा राजस्थानी सम्मेलन स्थापित करने की मांग विभिन्न रियासतों से की। 
14 मई 1925 - नीमूचणा हत्याकांड। 
1926  ई. - जोधपुर राज्य ने दरोगा प्रथा बंद की। 
1927  ई. - गंगनहर का उद्घाटन वायसराय इरविन द्वारा किया गया। 
1928  ई. - राजस्थान में पहली महिला डॉक्टर "पार्वती गहलोत" जोधपुर राज्य की स्वास्थ्य सेवा में नियुक्त की गई। 
1929  ई. - मोतीलाल तेजावत गिरफ्तार। 
1930 ई. - जोधपुर में पहली बार दुर्गादास जयंती चाँदमल सारदा के सभापतित्व में मनाई जाएगी। 
1931 ई. - बिजौलिया किसान आंदोलन अंतिम चरण। 
जुलाई 1931 - जयपुर प्रजामंडल की स्थापना। 
सितंबर 1931 - कोटा में हाड़ौती प्रजामंडल की स्थापना। 
नवंबर 1931 - जोधपुर हवाई क्लब खुला, बूंदी में प्रजामंडल की स्थापना। 
1933 ई. - झालावाड़ नरेश ने मंदिरो में अछूतो को दर्शन करने की छूट दी और छुआछूत समाप्त किया। 
1934 ई. -  मारवाड़ प्रजामंडल की स्थापना। 
1935 ई. - लोहारू के सिहानी तथा आसपास के अन्य गावों में भीषण गोलीकाण्ड व नृशस हत्याकांड। 
1936 ई. - जोधपुर में संग्रालय तथा पुस्तकालय के नए भवन का उद्घाटन वायरसराय लार्ड विलिंगटन द्वारा किया गया। 
1937 ई. - अप्रेल, 1937 भारतीय शासन अधिनियम 1935 का प्रांतीय भाग लागु किया गया। 
1938 ई. - जयपुर सरकार द्वारा जमनालाल बजाज को गिरफ्तार किया गया।  जयपुर में जमनालाल की गिरफ्तारी पर गाँधी जी ने धमकी दी की वे इसे एक अखिल भारतीय मामला बना देंगे। 
1939 ई. - सिरोही में प्रजामंडल की स्थापना। 
1941 ई. - टोंक में मजलिसे आम का उद्घाटन, अर्जुनलाल सेठी का निर्धन, सागरमल गोपा जैसलमेर राज्य द्वारा गिरफ्तार कर लिए गए। 
1942 ई. - जमनालाल बजाज की मृत्यु, जयपुर में हाईकोट स्थापित किया गया। 
1943 ई. - बीकानेर नरेश गंगासिह का देहान्त हुआ। 
1944 ई. -  जोधपुर राज्य के उन समस्त कैदियों को जो भारत रक्षा नियम के अंतर्गत जेल में थे, मुक्त कर दिया। 
1945 ई. - बीकानेर में सवैधानिक सुधारो की घोषणा की गई। 
1946 ई. - जैसलमेर जेल में सागरमल गोपा को पेट्रोल से जलाकर मार डाला। 
26 नवंबर 1946 - झालावाड़ प्रजामंडल की स्थापना। 
1947 ई. - राजपुताना विश्वविधालय की स्थापना। 
13 मार्च 1947 - डीडवाना के डाबड़ा गाँव में किसान सम्मेलन हुआ जिसमे पांच किसान मारे गए तथा किसान सभा के कई कार्यकर्ताओं के साथ जागीरदारों ने मारपीट की। 
1 अप्रेल 1947 - जोधपुर राज्य का नया सविधान लागू। जोधपुर में हाई कोट स्थापित 
1947 ई. - मेवाड़ सविधान बना, जिसके अंतर्गत विधानसभा गठित होनी थी। सरदार वल्ल्भ भाई पटेल की अध्यक्षता में रियासती सचिवालय स्थापित हुआ। 
1948 ई. - सिरोही को गुजरात राज्य एजेंसी का भाग बना दिया गया। अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली राज्यों का संघ "मत्स्य संघ" बना जिसकी राजधानी अलवर रखी गई और राज प्रमुख धौलपुर नरेश को बनाया गया। 
4 अप्रेल 1948 - सयुंक्त राजस्थान में उदयपुर सम्मलित हुआ। इसका उद्घाटन जवाहरलाल नेहरू ने किया। 
8 नवंबर 1948 - सिरोही को केन्द्रीय प्रशासन के अंतर्गत लिया गया। 
1949 ई. - आबू पर केन्द्रीय सरकार के आदेश से बंबई सरकार का शासन स्थापित हुआ। 
30 मार्च 1949 - जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर राज्य वृहत राजस्थान में सम्मिलित हुए। 
7 अप्रेल 1994 - जयपुर में राजस्थान का प्रथम मंत्रिमंडल हीरालाल शास्त्री की अध्यक्षता में बनाया गया। जयपुर नरेश मानसिंह राजप्रमुख बने। 
15 मई 1949 - मत्स्य संघ राज्य में सम्मेलित। 
22 दिसंबर 1949 - राजस्थान लोकसेव आयोग कानून लागु किया गया। 
1950 ई. - अजमेर भारत में विलीन हुआ। 
1951 ई. - हिरलालशास्त्री ने मुख्यमंत्री पद छोड़ा। जयनारायण व्यास राजस्थान ने नए मुख्यमंत्री बने। 
29 मार्च 1952 - 160 सदस्यीय राजस्थान विधानसभा का उद्धघाटन। 3 मार्च टीकाराम पालीवाल मुख्यमंत्री। 
1 अप्रेल 1955 - आकाशवाणी जयपुर प्रसारण प्रारंभ। 
28 जनवरी 1958 - राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, जोधपुर राजस्थान ललित कला अकादमी, जयपुर में स्थापित। राजस्थान की सब जागीरों का पुनग्रहण किया गया। 

No comments:

Post a Comment