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Rajasthan Ki Prashasnik Vyavastha - राजस्थान की राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था - Political and Administrative System of Rajasthan in Hindi



Rajasthan Ki Rajvyavastha - राजस्थान की राजव्यवस्था - Rajasthan Ki Prashasnik Vyavastha - राजस्थान की राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था - Political and Administrative System of Rajasthan in Hindi


राजस्थान की प्रशासन व्यवस्था एवं राजव्यवस्था के बारे में विस्तार से नीचे समझाया गया है। यह पटवारी 2020 भर्ती परीक्षा के सिलेबस के आधार पर है। ऐसे में आप राजस्थान की किसी भी परीक्षा की तैयारी कर रहे हो फिर चाहे वह एलडीसी हो या पुलिस सभी में यह प्रश्न पूछे जाते है। 


राजस्थान की सभी प्रतियोगिता परीक्षाओं में RPSC एवं अन्य State Level Exam पर आधारित "राजस्थान की राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था"


RAS | PCS | SSC | Bank | Police | LDC | Patwari | RRB Group D | आदि सभी एग्जाम्स के लिए सम्पूर्ण राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था निम्लिखित है -

Rajasthan Ki Prashasnik Vyavastha - राजस्थान की राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था


महत्वपूर्ण टॉपिक - 


* राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था,

* राज्य विधानसभा,

उच्च न्यायालय

* लोक सेवा आयोग,

* जिला प्रशासन,

* राज्य मानवाधिकार आयोग ,

* राज्य निर्वाचन आयोग,

* लोकायुक्त,

* राज्य सुचना आयोग,

* लोक नीति 


राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था (Rajasthan Ki Prashasnik Vyavastha)


क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य राजस्थान ही है। भारत के बाकि राज्यों के अनुसार राजस्थान में भी संसदीय प्रणाली की व्यवस्था है। 


यहाँ पर पूरा प्रशासन व्यवस्थापिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका द्वारा संचालित किया जाता है। राजस्थान में एक सदनीय व्यवस्थापिका का प्रावधान है, जिसे विधानसभा कहा जाता है। राजस्थान में व्यवस्थापिका का दूसरा सदन विधान परिषद् नहीं है।


विधान मंडल : राज्य की समस्त विधायी शक्ति विधान मंडल में होती है। भारत के प्रत्येक राज्य में विधान मंडल का निर्माण राज्यपाल एवं राज्य के एक या दो सदनों से होता है। राय के ये सदन विधानसभा एवं विधान परिषद् कहलाते है। राजस्थान में विधान मंडल राज्यपाल एवं एक सदन (विधानसभा) से मिलकर बना हुआ है।


भारत में केवल सात राज्यों में विधान मंडल का निर्माण राज्यपाल एवं दो सदन मिलकर करते है। उन राज्यों के नाम इस प्रकार है:


जम्मू कश्मीर

उत्तर प्रदेश

बिहार

कर्नाटक

महाराष्ट्र

आंध्रप्रदेश

तेलंगाना


राज्यपाल : स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात राजस्थान में राजप्रमुख का पद होता था, जो 1 नवम्बर 1956 के बाद में राज्यपाल के पद में परिवर्तित हो गया। एकीकरण के पश्चात् 1 नवम्बर 1956 को राजस्थान का वर्तमान स्वरुप सामने आया।


राजस्थान के प्रथम राज प्रमुख 30 मार्च 1949 को महाराजा सवाई मानसिंह बनाये गए। ये राजस्थान के इकलौते राज प्रमुख भी हैं।


1 नवम्बर 1956 (राजस्थान के एकीकरण) के पश्चात् राजस्थान के प्रथम राज्यपाल गुरुमुख निहाल सिंह बने।


- राज्यपाल का संवैधानिक स्वरुप

- राज्यपाल उस राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है।

- राज्यपाल में राज्य की सभी कार्यपालिका एवं विधायी शक्तियां निहित होती है।

- राज्यपाल राज्य का प्रथम व्यक्ति होता है।

- संविधान के अनुछेद 153 में प्रत्येक राज्य में एक राज्यपाल की व्यवस्था की गयी है।

- राज्यपाल की नियुक्ति केंद्रीय मंत्रिपरिषद की अनुशंसा पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

- राज्यपाल को उस राज्य का मुख्यन्यायाधीश या उसकी अनुपस्थिति में वरिष्ठतम न्यायाधीश शपथ दिलाता है।


राजस्थान में अब तक कुल 4 बार राष्ट्रपति शासन लागू हो चुका है –

13 मार्च से 26 अप्रैल 1967

30 अप्रैल से 21 जून 1977

17 फरवरी से 5 जून 1980

15 दिसंबर 1992 से 3 दिसंबर 1993


राजस्थान राज्य की विधानसभा के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लिक करें -  राज्य विधानसभा 


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