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Rajya Suchana Aayog - राज्य सूचना आयोग क्या है ? अध्यक्ष, कार्य एवं शक्तियाँ - State Information Commission in Hindi



Rajya Suchana Aayog - राज्य सूचना आयोग क्या है ? अध्यक्ष, कार्य एवं शक्तियाँ - State Information Commission in Hindi


राज्य में सूचनाओं के किर्यान्वयन के लिए राज्य सुचना आयोग का गठन किया गया है। किसी भी राज्य में राज्य सुचना आयोग की नियुक्ति राज्यपाल के द्वारा एक समिति की सिफारिशों द्वारा होती है। 


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State Information Commission in Hindi


इस समिति में निम्लिखित सदस्य शामिल होते है -


* मुख्यमंत्री जो इस समिति के अध्यक्ष होते है। 


* विधानसभा में विपक्ष का नेता और 


* मुख्यमंत्री द्वारा नामनिदिष्ट मंत्रिमंडल का एक मंत्री 


यह वह व्यक्ति होते है जिन्हे  विधि, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, समाज सेवा,प्रबंधन, पत्रकारिता, जन माध्यम या प्रशासन तथा शासन का व्यापक ज्ञान होता है। 


राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्त, संसद का सदस्य या किसी राज्य या सम राज्य क्षेत्र के विधानमंडल का सदस्य नहीं होगा या कोई लाभ का पद धारण नहीं करेगा या किसी राजनैतिक दल से सम्बद्ध नहीं होगा अथवा कोई कारोबार या वृत्ति नहीं करेगा।


केंद्र में Central Information Commission की तरह ही राज्य में State Information Commission का गठन किया गया है। 


राज्य सूचना आयोग का मुख्यालय राज्य में ऐसे स्थान पर होगा जो राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करें और राज्य सूचना आयोग राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से अन्य स्थानों पर अपना कार्यालय स्थापित कर सकेगा।


राज्य सूचना आयोग के कार्य एवं शक्तियाँ 


आयोग इस अधिनियम के प्रावधानों के कार्यान्व्यन से संबंधित अपनी वार्षिक रिपोर्ट राज्य सरकार को प्रस्तुत करता है। राज्य सरकार, राज्य विधानसभा के पटल पर इस रिपोर्ट को प्रस्तुत करती है। यदि कोई उचित आधार मिलता है तो राज्य सूचना आयोग किसी भी मामले में जांच का आदेश दे सकता है।


आयोग के पास लोक प्राधिकरण द्वारा अपने निर्णय के अनुपालन को सुरक्षित करने का अधिकार है। यह आयोग का कर्तव्य है कि किसी भी व्यक्ति से प्राप्त एक शिकायत की पूछताछ करे। एक शिकायत की जांच के दौरान आयोग ऐसे किसी भी रिकार्ड की जांच कर सकता है जो लोक प्राधिकरण के नियंत्रण में है और इस तरह के रिकॉर्ड को किसी भी आधार पर रोका नहीं जा सकता है।


जांच करते समय आयोग के पास निम्नलिखित मामलों के संबंध में सिविल न्यायालय की शक्ति है -


- दस्तावेजों की पड़ताल और निरीक्षण की आवश्यकता होती है। 


- गवाहों, या द्स्तावेजों और अन्य किसी मामलों का, जिसका निर्धारण किया जा सकता है, की पूछताछ के लिए सम्मन जारी करना।


- लोगों को बुलाना और या उन्हें उपस्थिति होने के लिए कहना तथा उन्हें सही मौखिक या लिखित सबूतों का प्रपत्र देना व दस्तावेजों या चीजों को उनके सम्मुख प्रस्तुत करना। 


- शपथ पत्र पर साक्ष्य प्राप्त करना। 


- किसी भी अदालत या कार्यालय से कोई भी सार्वजनिक रिकार्ड प्राप्त करने के लिए प्रार्थन करना।


- जब एक लोक प्राधिकरण इस अधिनियम के प्रावधानों का पालन नहीं करता है तब आयोग इसके पालन को सुनिश्चत करने के लिए कदम उठाने की सिफारिश कर सकता है।


मूल्यांकन


केंद्र की तरह, इन आयोगों के पास भी बकाया मामलों का बोझ बढता जा रहा है। कम स्टाफ और रिक्त पदों पर नियुक्ति नहीं होने के कारण बकाया मामलों में बढोत्तरी होते जा रही है। अक्टूबर 2014 में, उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा अपीले और शिकायतें लंबित थी। लेकिन, इस तरह के उदाहरण भी हैं जहां कोई भी बकाया मामला नहीं है जैसे- मिजोरम, सिक्किम और त्रिपुरा के पास कोई भी मामला लंबित नहीं है। जानकारी देने के लिए आयोग के पास सीमित शक्तियां हैं और विसंगतियों को देखने के बावजूद भी वह कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है।


हालांकि, राज्य सूचना आयोग सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं। इस प्रकार ये भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, उत्पीड़न और अधिकार के दुरुपयोग से निपटने में मदद कर रहे हैं।


कार्यकाल और सेवा


राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्त के पास 5 साल की अवधि या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तक अपने पद पर बने रह सकते हैं। वे पुनर्नियुक्ति के पात्र नहीं होते हैं।


 राजस्थान राज्य सुचना आयोग के बारे में महत्वपूर्ण बिंदु  (Rajasthan State Information Commission)


- आयोग का मुख्यालय जयपुर में स्थित है। 


- 18 अप्रेल 2006 को इसका गठन हुआ। 


- राजस्थान राज्य के प्रथम मुख्य सूचना आयुक्त श्री MD कौरानी थे।


- वर्तमान में राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त श्री सुरेश कुमार चौधरी है। 


- इनका कार्यकाल 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु जो भी पहले हो ,तक पद पर बने रह सकतें है । उन्हें पुनर्नियुक्ति की पात्रता नहीं होती है ।


- सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 15 के तहत राजस्थान सूचना आयोग का गठन किया गया। 


राज्य के "लोक नीति" के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लिक करें - लोक नीति


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