Arnab Goswami Ki Jivani - अर्णब गोस्वामी की जीवनी - Biography of Arnab Goswami in Hindi



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आज अर्णब गोस्वामी को भला कौन नहीं जानता है। भारत में जहाँ भी एक सच्चे और निष्ठावान पत्रकार की बात होती है तो अर्णब का नाम सबसे पहले लिया जाता है। लोगो के बीच यह पिछेल 1 साल से ही चर्चा में आए है जब इन्होने कश्मीर का धारा 370 का मुद्दा अपने चैनल पर उठाया था। इसके बाद इन्होने CAA और NCR के मुद्दे को भी बड़ी ही सच्चाई के साथ जनता के सामने पेश किया। 


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अर्णब गोस्वामी की जीवनी - Biography of Arnab Goswami in Hindi

अर्णब गोस्वामी हमेशा से ही हिन्दुओं और साधुओं के पक्ष की बात रखते है। यह जनता और सरकार के बीच की कड़ी का काम करना भी बेखुभी जानते है। जब पालघर में साधुओं की हत्या की गई तब इसी चेंनल ने R. भारत ने सभी तथ्यों को बारिकी से जनता के सामने पेश किया। इसके बाद सुशांत सिंह राजपूत केस जिसे एक सुसाइड करार दे दिया गया इसे भी अर्णब और अर्णब की टीम ने पर्दाफास किया और जनता को बता दिया की इन सब के पीछे किसका हाथ था। 


आज अर्णब जेल में है उन्हें एक ऐसे मामले में जेल में डाला गया है जो मामला 2 साल पहले बंद हो चूका था जिस केस को न्यायलय ने बंद कर दिया था ऐसे में महाराट्र की सरकार और महाराट्र की पुलिस ने बिना कोर्ट और जज की पूछताछ में उस केस को रीओपन किया और अर्णब गोस्वामी को सुबह 6 बजे उनके घर से किसी आंतकवादी की तरह उठा के ले जाया गया जो की भारत वर्ष के लिए बड़े ही शर्म की बात है। इस काले दिन को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। 


पत्रकार जनता और सरकार के बीच की कड़ी होता है। उसे लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ की संज्ञा भी दी गई है। ऐसे में इतने बड़े पत्रकार के साथ ऐसा व्यवहार यह साफ़ जाहिर करता है की महाराट्र में आम इंसान कितना असुरक्षित है। 


देश भर की जनता गुस्से में है ऐसे में सभी की मांग है की महाराट्र में राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। भारतीय जनता पार्टी के बहुत से नेताओं ने भी इसे इंदिरा गांधी सरकार के इमरजेंसी के दिनों की तुलना बताई है और कहा है की यह उन दिनों की याद करवाता है जब देश भर में इमरजेंसी लगा कर पत्रकारों को जेल में डाला जा रहा था। 


अर्णब को जेल में डालने के बाद अब भारत ही नहीं बल्कि अमेरिका और यूरोप से भी बहुत से लोगो के फोन आ रहे है की अर्णब को जल्द से जल्द रिहा किया जाए। 


New Update - जैसा की आज 11 नवंबर 2020 को 8 वे दिन अर्णब गोस्वामी को महाराष्ट्र की तनोजा जेल से रिहा कर दिया गया है। पहले उनका यह मामला HC से SC तक भेजा गया था। आज सुप्रीम कोट में सुनवाई के बाद सुप्रीम कोट ने अर्णब गोस्वामी को बेल दे दी है। तनोजा जेल के बाहर उनके समर्थन काफी संख्या में उनका इंतजार कर रहे है। 


अर्णब की रिहायी को लेकर पुरे देश की जनता एवं भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओ ने लड़ाई लड़ी थी और वह सफल भी रहे। "सत्यमेव जयते" 


अर्णब गोस्वामी को आज सब जानना चाहते है की आखिर कौन है अर्णब एवं इनका बच्चपन कहा बीता इन्होने शिक्षा कहा से ली और इनके कॅरियर की शुरुआत कहा से हुई। आज हम आपके लिए अर्णब गोस्वामी का जीवन परिचय लेकर आए है। आएये जानते है अर्णब गोस्वामी के जीवन के बारे में 

Arnab Goswami in Hindi

अर्णब गोस्वामी की जीवनी (Biography of Arnab Goswami)


नाम - अर्णब गोस्वामी 


पूरा नाम - अर्नब रंजन गोस्वामी


जन्म - 7 मार्च 1973 


आयु - 47 वर्ष 


जन्म स्थान - गोवाहटी (असम)


शिक्षा - हिन्दू कॉलेज से (BA), सेंट एंटनी कॉलेज, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी , इंग्लैंड (MA)


व्यवसाय - TIME NOW के मुख्य संपादक (2006 - 2016 तक) रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक (2017 से वर्तमान)


संगठन - Republic TV


पत्नी - पिपि गोस्वामी


बच्चे -  1 


जाति - ब्राह्मण


राष्ट्रीयता - भारतीय 


शौक - अच्छी किताबे पढ़ना, यात्रा, मूवी देखना, सच्ची पत्रकारिता 


पिता - मनरंजन गोस्वामी 


माता - सुप्रभा गेन-गोस्वामी 


वेतन - लगभग 1 करोड़ / महीना 


किताब - Combating Terrorism the Legal Challenge 


अर्नब रंजन गोस्वामी (जन्म 7 मार्च 1973) एक भारतीय समाचार एंकर हैं, जो रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के प्रबंध निदेशक और प्रधान संपादक हैं। अर्णब गोस्वामी का रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क वर्तमान में दो चैनल है अर्थात् अंग्रेजी में रिपब्लिक टीवी और हिंदी में रिपब्लिक भारत के वो मालिक है।


रिपब्लिक टीवी से पहले, गोस्वामी 2006 से 2016 तक टाइम्स नाउ और ईटी नाउ के प्रधान संपादक और समाचार एंकर थे। नवंबर 2016 में गोस्वामी ने टाइम्स नाउ के प्रधान संपादक के रूप में इस्तीफा दे दिया। उनका समाचार चैनल रिपब्लिक टीवी मई 2017 में लॉन्च किया गया था। 


अर्णब गोस्वामी का परिवार (Arnab Goswami Family)


अर्णब गोस्वामी का जन्म गुवाहाटी (असम) में 7 मार्च 1973 को असमिया परिवार में हुआ था। अर्णब गोस्वामी के पिता मनरंजन गोस्वामी और माता सुप्रभा गेन-गोस्वामी है। उनके पिता मनरंजन गोस्वामी 1960 के दशक की शुरुआत में भारतीय सेना में शामिल हुए और लगभग 30 वर्षों तक सेना में सेवा देने के बाद एक कर्नल के रूप में सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे।  उन्होंने विभिन्न किताबें लिखीं और 2017 में आसम साहित्य सभा पुरस्कार के प्राप्तकर्ता थे। अर्नब की माँ, सुप्रभा गेन-गोस्वामी एक लेखक हैं।


अर्णब गोस्वामी के नाना गौरीशंकर भट्टाचार्य, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के एक निर्वाचित विधायक थे और कई वर्षों तक असम में विपक्ष के नेता के रूप में कार्य किया। 


गोस्वामी के मामा, सिद्धार्थ भट्टाचार्य गौहाटी पूर्व निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के लिए असम विधानसभा के सदस्य हैं। उन्होंने 2015 तक भाजपा की असम इकाई का नेतृत्व किया।


अर्णब गोस्वामी की शिक्षा (Education of Arnab Goswami)


एक सेना अधिकारी के बेटे, अर्णब गोस्वामी ने भारत के विभिन्न हिस्सों के स्कूलों में भाग लिया। उन्होंने दिल्ली छावनी के सेंट मैरी स्कूल से 10 वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा दी और जबलपुर छावनी में केंद्रीय विद्यालय से 12 वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा दी। गोस्वामी के पास दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदू कॉलेज से समाजशास्त्र में स्नातक की डिग्री है। 1994 में गोस्वामी ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में सेंट एंटनी कॉलेज से सोशल एंथ्रोपोलॉजी में मास्टर की पढ़ाई पूरी की जहां वे फेलिक्स स्कॉलर थे। 



व्यवसाय एवं कॅरियर (Arnab Goswami Business & Career)


द टेलीग्राफ और एनडीटीवी - अर्णब गोस्वामी ने एक पत्रकार के रूप में कोलकाता में द टेलीग्राफ के साथ अपने करियर की शुरुआत की एक साल से भी कम समय के बाद वह दिल्ली चले गए और NDTV में शामिल हो गए।


गोस्वामी 1996 से 2006 तक NDTV का हिस्सा थे। एनडीटीवी में, उन्होंने न्यूज़ टुनाइट सहित दैनिक समाचार प्रसारणों को प्रसारित किया जो डीडी मेट्रो पर प्रसारित एक कार्यक्रम है। न्यूज़नाइट, जिसे गोस्वामी द्वारा होस्ट किया गया था। इससे उन्हें 2004 के सर्वश्रेष्ठ टेलीविज़न पुरस्कारों में एशिया के सर्वश्रेष्ठ समाचार एंकर के लिए पुरस्कार दिया।


टाइम्स नाउ - 2006 में, गोस्वामी ने एनडीटीवी को नए लॉन्च किए गए टाइम्स नाउ न्यूज़ चैनल में शामिल होने के लिए छोड़ दिया था।  इसके मुख्य संपादक के रूप में उन्होंने काम किया। उनका शो "द न्यूशोर" रात 9 बजे लाइव न्यूज़ कवरेज के साथ प्रसारित किया जाता था। 


रिपब्लिक टीवी - रिपब्लिक टीवी को एशियानेट द्वारा वित्त पोषित किया गया था, जो मुख्य रूप से राज्यसभा के एक तत्कालीन स्वतंत्र सदस्य राजीव चंद्रशेखर द्वारा वित्त पोषित था, जिनके भारतीय जनता पार्टी के साथ जटिल संबंध थे और केरल में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उपाध्यक्ष थे। अर्णब गोस्वामी प्रबंध निदेशक होने के साथ-साथ प्रधान संपादक थे। चैनल को 6 मई 2017 को एक फ्री-टू-एयर चैनल के रूप में लॉन्च किया गया था। चित्रा सुब्रमण्यम को संपादकीय सलाहकार के रूप में रखा गया था और टाइम्स नाउ से जुड़े कई व्यक्ति चैनल में शामिल हुए।


धीरे - धीर रिपब्ल्कि भारत देश के लोगो की आवाज बनने लगा और देश के गंभीर मुद्दों को उठाने के कारण मात्र कुछ ही सालो में यह देश का नंबर 1 चैनल भी बन गया। 


पुस्तक (Book of Arnab Goswami)


वर्ष 2002 में अर्णब गोस्वामी ने एक किताब लिखी - आतंकवाद का मुकाबला : कानूनी चुनौती


आत्महत्या के मामले में गिरफ्तारी 


गोस्वामी को मुंबई पुलिस द्वारा आईपीसी की धारा 306 और धारा 34 के तहत अन्वय नाइक के 2018 के आत्महत्या मामले में 4 नवंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था। नाइक ने अपने सुसाइड नोट में गोस्वामी सहित तीन व्यक्तियों से बकाया भुगतान न करने का आरोप लगाया था।


2020 के पालघर की भीड़ के मामले के संबंध में भी गोस्वामी के खिलाफ भड़काऊ भाषा के कथित उपयोग के साथ-साथ गलत सूचना के दावे के बारे में कई पहली सूचना रिपोर्टें दर्ज की गईं।


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