Khopdi Me Parmatma - कहानी : खोपड़ी में परमात्मा - आचार्य ओशो रजनीश की कहानी | Osho Stories Hindi | Prerak Kahaniya



Khopdi Me Parmatma - कहानी : खोपड़ी में परमात्मा - आचार्य ओशो रजनीश की कहानी | Osho Stories Hindi | Prerak Kahaniya, Motivational Story by Osho, Osho Hindi Speeches


मैंने सुना है, अरस्तु एक दिन सागर के किनारे टहलने गया और उसने देखा एक पागल आदमी—पागल ही होगा, अन्यथा ऐसा काम क्यों करता, एक गड्डा खोद लिया है रेत में और एक चम्मच लिए हुए है। 


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आचार्य ओशो रजनीश की कहानी - Osho Stories Hindi

बार - बार दौड़कर जाता है, सागर से चम्मच भरता है और आकर एक गड्डे में डालता है, फिर भागता है, फिर चम्मच भरता है, फिर गडुए में डालता है। अरस्तु घूमता रहा, घूमता रहा, फिर उसकी जिज्ञासा बढ़ी, फिर उसे अपने को रोकना संभव नहीं हुआ। 


दूसरा भी सज्जन आदमी था, अरस्तु एकदम से किसी के काम में बाधा नहीं डालना चाहता था, किसी से पूछना भी तो ठीक नहीं, अपरिचित आदमी से, यह भी तो एक तरह का दूसरे की सीमा का अतिक्रमण है।


मगर फिर बात बहुत बढ़ गई, उसकी भागदौड़, इतनी जिज्ञासा भरी थी की अरस्तु को भी दिल में बेचैनी हो गई कि आखिर यह मामला क्या है, यह कर क्या रहा है, पूछा कि मेरे भाई, करते क्या हो? 


उसने कहा, क्या करता हूं, सागर को उलीच कर रहूंगा आज ! इस गड्डे में न भर दिया तो मेरा नाम नहीं ! अरस्तु ने कहा कि मैं तो कोई बीच मे आने वाला नहीं हूं मैं कौन हूं जो बीच में कुछ कहूं। लेकिन यह बात बड़े पागलपन की है यह चम्मच से तू इतना बड़ा विराट सागर खाली कर लेगा ! जन्म—जन्म लग जाएंगे फिर भी न होगा, सदियां बीत जाएंगी फिर भी न होगा और इस छोटे से गड्डे में भर लेगा? और वह आदमी खिलखिलाकर हंसने लगा और उसने कहा कि तुम क्या सोचते हो, तुम कुछ अन्य कर रहे हो। 


तुम कुछ भिन्न कर रहे हो? तुम इस छोटी सी खोपड़ी में परमात्मा को समाना चाहते हो? अरस्तू बड़ा विचारक था। तुम इस छोटी सी खोपड़ी में अगर परमात्मा को समा लोगे, तो मेरा यह गड्डा तुम्हारी खोपड़ी से बड़ा है और सागर परमात्मा से छोटा है। पागल कौन है? 


अरस्तू ने इस घटना का उल्लेख किया है और उसने लिखा है कि उस दिन मुझे पता चला कि पागल मैं ही हूं। उस पागल ने मुझ पर बड़ी कृपा की। वह कौन आदमी रहा होगा? वह आदमी जरूर एक पहुंचा हुआ फकीर रहा होगा, समाधिस्थ रहा होगा, वह सिर्फ अरस्तू को जगाने के लिए, अरस्तू को चेताने के लिए उस उपक्रम को किया था। 


- आचार्य रजनीश


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