Rajasthan Ke Pramukh Vyaktitva or Swatantrata Senani - राजस्थान के प्रमुख व्यक्तित्व एवं स्वतन्त्रता सेनानी - Famous Personality and Freedom Fighter of Rajasthan



Rajasthan Ke Pramukh Vyaktitva - राजस्थान के प्रमुख व्यक्तित्व एवं स्वतन्त्रता सेनानी - Famous Personality and Freedom Fighter of Rajasthan - Rajasthan Ke Pramukh Swatantrata Senani



अर्जुन लाल सेठी 


अर्जुन लाल सेठी का जन्म 9 सितंबर 1880 ई. को जयपुर के एक जैन परिवार में हुआ था। 1902 में उन्होंने इलाहाबाद से बीए की परीक्षा पास की। इसके बाद वह चोमूँ के ठाकुर देवी सिंह के शिक्षक नियुक्त हुए। 1960 में उन्होंने लोगों को राजनीतिक शिक्षा देने के लिए जयपुर में वर्धमान विद्यालय की स्थापना की। प्रत्यक्ष रुप से वह एक धार्मिक विद्यालय था, किंतु वास्तव में यहां क्रांतिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता था। इस विद्यालय में न केवल राजस्थान से बल्कि देश के अन्य भागों से भी क्रांतिकारी प्रशिक्षण लेने आते थे। धीरे-धीरे अर्जुन लाल सेठी का स्कूल राजस्थान में क्रांतिकारियों की गतिविधियों का अड्डा बन गया।


 हीरालाल शास्त्री


जन्म 24 नवंबर 1899 जन्म स्थल जोबनेर जयपुर, वनस्थली विद्यापीठ नामक महिला शिक्षण संस्थान के संस्थापक शास्त्री जी भारतीय देशी राज्य लोक परिषद के प्रधानमंत्री तथा 30 मार्च 1949 को वृद्ध राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री बने, टोंक जिले के निवाई तहसील के वनस्थली ग्राम में स्थित जीवन कुटीर नामक संस्था के संस्थापक शास्त्री जी 1958 से 62 तक सवाई माधोपुर के लोकसभा सदस्य रहे तथा 28 दिसंबर 1974 को स्वर्ग सिधार गए प्रत्यक्ष जीवन शास्त्र नामक पुस्तक का लेखक किया एवं प्रशिक्षण नमो नमो नमः गीत लिखा जो बहुत लोकप्रिय हुआ


अमरचंद बांठिया


राजस्थान की राजपूतानी शौर्य भूमि बीकानेर में शहीद अमरचंद बांठिया का जन्म 1793 में हुआ था। देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा शुरू से ही उनमें था। बाल्यकाल से ही उन्होंने ठान रखा था कि देश की आन-बान और शान के लिए कुछ कर गुजरना है। इतिहास में स्व. अमरचंद के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं मिलती, लेकिन कहा जाता है कि पिता के व्यावसायिक घाटे ने बांठिया परिवार को राजस्थान से ग्वालियर कूच करने के लिए मजबूर कर दिया और यह परिवार सराफा बाजार में आकर बस गया। ग्वालियर की तत्कालीन सिंधिया रियासत के महाराज ने उनकी कीर्ति से प्रभावित होकर उन्हें राजकोष का कोषाध्यक्ष बना दिया। उस समय ग्वालियर का गंगाजली खजाना गुप्त रूप से सुरक्षित था जिसकी जानकारी केवल चुनिन्दा लोगों को ही थी। बांठिया जी भी उनमें से एक थे। वस्तुतः वे खजाने के रक्षक ही नहीं वरन ज्ञाता भी थे। उनकी सादगी, सरलता तथा कर्तव्य परायणता के सभी कायल थे।


मोतीलाल तेजावत


मोतीलाल तेजावत 'आदिवासियों का मसीहा' के नाम से जाने जाते हैं। इन्होंने वनवासी संघ की स्थापना की। इनहोंने भील, गरासिया तथा अन्य खेतिहरों पर होने वाले सामन्ती अत्याचार का विरोध किया और उन्हें एकजुट किया।


सन 1920 में आदिवासियों के हितों को लेकर 'मातृकुंडिया' नामक स्थान पर एकी नामक आन्दोलन शुरू किया। इन्होंने किसानों से बेगार बन्द बनाई और कामगारों को उनकी उचित मजदूरी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आदीजा के बाद उदयपुर व चितौडगढ़ से लोकसभा सदस्य रहे तथा राजस्थान खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष भी बने।


भोगीलाल पांडया


भोगीलाल पंड्या ने 15 वर्ष की अल्पायु में ही डूंगरपुर में एक विद्यालय की स्थापना की। इसके बाद उन्होंने बच्चों व प्रोढ़ों के लिए पाठशालाओं की श्रंखला स्थापित करना शुरू कर दिया। ताकि उस आदिवासी क्षेत्र में राजनीतिक चेतना का प्रभाव हो सके। उन्हे ‘बागड़ के गांधी’ के नाम से भी जाना जाता था ।


गोकुल भाई भट्ट 


जन्म 25 जनवरी 1818 (उपनाम - राजस्थान के गांधी) जन्म - स्थल हाथल सिरोही जमनालाल बजाज पुरस्कार 1982 से सम्मानित भट्ट जी मैं 1972 से 1981 तक मध्य निषेध के लिए अथक प्रयास किया, सन 1948 ईस्वी में राष्ट्रीय कांग्रेस अधिवेशन के स्वागताध्यक्ष भट्ट जी ने सिरोही राज्य में प्रजामंडल की स्थापना की एवं राजपूताना प्रांतीय देशी राज्य प्रजा परिषद के अध्यक्ष पद को सुशोभित किया आबू का राजस्थान में विलय उनके प्रयासों से हुआ


मोहनलाल सुखाड़िया


जन्म- 31 जुलाई, 1916, झालावाड़, राजस्थान; मृत्यु- 2 फ़रवरी, 1982, बीकानेर) राजस्थान के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञों में से एक थे। उन्हें "आधुनिक राजस्थान का निर्माता" भी कहा जाता है। मोहन लाल सुखाड़िया सबसे लम्बे समय तक राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे थे।


जमुना लाल बजाज


जमनालाल बजाज का जन्म 4 नवम्बर 1889 को जयपुर राज्य के सीकर में '"काशी का बास" में एक गरीब मारवाड़ी परिवार में हुआ था। वे केवल चौथी कक्षा तक पढ़े थे। अंग्रेजी नहीं आती थी। वर्धा के एक प्रौढ़ निःसन्तान दम्पत्ति ने बहुत ही चालाकी से जमनालाल की मां से वचन ले लिया और फिर उस बहुत ही धनी परिवार ने जमनालाल को गोद ले लिया।


बाल-विवाह के उस दौर में जमनालाल का विवाह 13 वर्ष की उम्र में ही नौ वर्ष की जानकी से कर दिया गया। केवल 17 वर्ष की उम्र में कारोबार संभालने वाले जमनालाल ने एक बाद एक कई कंपनियों की स्थापना की थी, जो आगे चलकर बजाज समूह कहलाया । आज यह भारत के प्रमुख व्यवसायी घरानों में से एक है।


युवा जमनालाल के भीतर आध्यात्मिक खोजयात्रा आरम्भ हो चुकी थी और वह किसी सच्चे कर्मयोगी गुरु की तलाश में भटक रहे थे। इस क्रम में पहले वे मदनमोहन मालवीय से मिले। कुछ समय तक वे रबीन्द्रनाथ ठाकुर के साथ भी रहे। अन्य कई साधुओं और धर्मगुरुओं से भी वह जाकर मिले। जमनालाल धीरे-धीरे स्वाधीनता आन्दोलन में जुड़ते गए। 1906 में जब बाल गंगाधर तिलक ने अपनी मराठी पत्रिका केसरी का हिन्दी संस्करण निकालने के लिए विज्ञापन दिया तो युवा जमनालाल ने एक रुपए प्रतिदिन के हिसाब से मिलने वाले जेब खर्च से जमा किए गए सौ रुपए तिलक को जाकर दे दिए।


हरिदेव जोशी


हरिदेव जोशी (17 दिसम्बर 1921 - 1995) एक भारतीय राजनीतिज्ञ और स्वतंत्रता सेनानी थे। उनका जन्म खांदू नामक गाँव में हुआ जो बांसवाड़ा के पास है। उनका निधन 28 मार्च 1995 को मुंबई में हुआ। वे भारत के राजस्थान राज्य से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के नेता थे।


भारत की स्वतंत्रता के बाद 1952 में उनका प्रवेश राजनीति में हुआ, तब से वे 10 बार राज्य विधानसभा का चुनाव लड़े और हर बार विजयी रहे। सबसे पहले 1952 में उन्होंने डूंगरपुर से चुनाव जीतने की शुरुआत की, इसके बाद 1957 में घाटोल से और बाक़ी 8 बार बांसवाड़ा से निर्वाचित हुए थे।


वे पहली बार 11 अक्टूबर 1973 से 29 अप्रैल 1977 तक राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे, दूसरी बार 10 मार्च 1985 से 20 जनवरी 1988 तक और अंत में 4 दिसम्बर 1989 से 4 मार्च 1990 तक मुख्यमंत्री के रूप में अपनी सेवाएँ दी हैं। वे असम, मेघालय और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी रहे।


रामनारायण चौधरी 


जन्म 1800 ईस्वी जन्म स्थल नीमकाथाना सीकर 1934 में गांधी जी की दक्षिणी भारतीय हरिजन यात्रा के दौरान हिंदी सचिव के रूप में चौधरी ने राजस्थान में जन चेतना के लिए नया राजस्थान नामक समाचार पत्र का प्रकाशन किया तरुण राजस्थान के संपादक चौधरी ने 1932 में हरिजन सेवक संघ की स्थापना राजस्थान शाखा का कार्यभार संभाला


 दामोदर दास राठी 


जन्म 8 फरवरी 1884 जन्म स्थल पोकरण जैसलमेर दामोदर दास राठी एक महान व्यक्ति थे जिन्होंने ब्यावर में सनातन धर्म स्कूल है उन नवभारत विद्यालय की स्थापना की राठी साहब क्रांतिकारियों को अन्य गतिविधियों के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करते


माणिक्य लाल वर्मा 


जन्म 4 दिसंबर 1897 जन्म स्थल बिजोलिया भीलवाड़ा मेवाड़ का वर्तमान शासन नामक पुस्तक के प्रकाशन माणिक्यलाल वर्मा ने अक्टूबर 1938 में विजयदशमी के दिन प्रजामंडल पर लगी रोक हटाने के लिए हुए सत्याग्रह आंदोलन का अजमेर में संचालन किया सन 1941 में मेवाड़ प्रजामंडल के पहले अधिवेशन की अध्यक्षता की वर्मा जी का लिखा हुआ पंखिड़ा ना गीत बहुत लोकप्रिय हुआ 1948 में संयुक्त राजस्थान के प्रधानमंत्री व 1963 में राजस्थान खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष रहे


जय नारायण व्यास 


जन्म 18 फरवरी 1899 जन्म स्थल जोधपुर लोक नायक जय नारायण व्यास 1927 में तरुण राजस्थान के प्रधान संपादक 1936 में अखंड भारत के प्रकाशक रहे के साथ साथ आगे बढ़ना मक राजस्थान पत्रिका प्रकाशन का कार्य किया व्यास जी वर्ष 1951 से 1956 की अवधि में दो बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे राजस्थान में प्रथम व्यक्ति चैनल व्यस्त हैं जिन्होंने सामंतशाही के विरुद्ध संघर्ष किया एवं जागीरदारी प्रथा समाप्त करने की आवाज उठाई भारत सरकार के सदस्य की हत्या करने की योजना बनाई लेकिन समय पर नहीं पहुंचने के कारण हत्या ना हो सकी। 


बलवंत सिंह मेहता


बलवन्त सिंह मेहता राजस्थान के सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्वतंत्रता सेनानी थे। वे सन 1915 से राजनीतिक जागृति के प्रेरक तथा प्रताप सभा के संचालक भी रहे। सन् 1938 में प्रजामंडल के प्रथम अध्यक्ष रहे। भारत छोड़ो आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आजादी के बाद संविधान निमात्री सभा के सदस्य भी रहे। भारत सेवक समाज की अध्यक्षता की और 1943 में उदयुपर में वनवासी छात्रावास की स्थापना की।


हरिभाऊ उपाध्याय


जन्म 9 मार्च 1893 जन्म स्थल भौरासा ग्वालियर MP हरिभाऊ उपाध्याय ने वाराणसी में रघुवर नामक मासिक पत्रिका का संपादन किया 1916 से 1919 तक महावीर प्रसाद द्विवेदी के साथ सरस्वती नामक पत्रिका का संपादन किया नमक सत्याग्रह के दौरान उपाध्याय को राजस्थान का प्रथम डॉक्टर बनाया और उस के नेतृत्व में अजमेर में नमक कानून का उल्लंघन किया हरिभाऊ उपाध्याय ने रास्ता साहित्य मंडल हटूंडी गांधी आश्रम महिला शिक्षा सदन की स्थापना की 1952 में अजमेर राज्य में प्रथम मुख्यमंत्री बने हैं 1916 में पदम श्री से सम्मानित हुए। 


राव गोपाल सिंह खरवा 


राव गोपालसिंह खरवा 1872 - 1939 राजपुताना की खरवा रियासत के शासक थे। अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह करने के आरोप में उन्हें टोडगढ़ दुर्ग में 4 वर्ष का कारावास दिया गया था।राजपूताने में वीर भारत सभा के नाम से कुछ सैनिक संगठन बना गया था जिस के संस्थापक एवं संचालन केसरी सिंह बारहठ के साथ खारवा के राव गोपाल सिंह का महत्वपूर्ण योगदान था क्रांतिकारियों को धन एवं शस्त्र दिलाने का कार्य राव गोपाल सिंह ने किया 21 फरवरी 1915 को तय की गई सशस्त्र क्रांति में राजपूताना राव गोपाल सिंह खरवा एवं सेठ दामोदर दास राठी को ब्यावर और भूप सिंह को अजमेर नसीराबाद का पर कब्जा करने का कार्य सौंपा। 


गोविंद गिरी


वागड़ क्षेत्र डूंगरपुर बाँसवाड़ा में गोविन्द गुरु ने भीलों के सामाजिक एवं नैतिक उत्थान के लिए अथक प्रयास किये. वे महान समाज सुधारक थे. गोविन्द गुरु का जन्म 20 दिसम्बर 1858 डूंगरपुर राज्य के बसियाँ गाँव में हुआ था. 1880 में स्वामी दयानन्द सरस्वती जब उदयपुर आए, गोविन्द गुरु उनके विचारों से प्रभावित हुए और उन्होंने भील समाज में सुधार एवं जन जागृति के लिए महत्वपूर्ण कार्य शुरू किया


छगन राज चौपासनी वाला


राजस्थान एक व्यक्तित्व जिसने स्वतंत्रता आंदोलन में जोधपुर की ओर से महत्वपूर्ण भूमिका अदा की. भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इस सेनानी ने जीवन में तमाम अभाव व कठिनाइयों को झेलने बाद देशभक्ति की राह को नहीं छोड़ा. ये गांधीजी के रचनात्मक कार्यों के सहयोगी बने. मारवाड़ हितकारिणी सभा, यूथ लीग, बाल भारत सभा, पीपुल्स एसोसिएशन प्रजामण्डल, लोक परिषद आदि संस्थाओं के संस्थापक सदस्य भी रहे.


पंडित नैनू राम शर्मा


कोटा में जन जाग्रति का श्रेय राजस्थान सेवा संघ के कार्यकर्ता पंडित नयनूराम शर्माको है पंडित नयनूराम शर्मा ने 1918 में कोटा में प्रजा प्रतिनिधि सभा की स्थापना की थी  हाडोती क्षेत्र में जन जाग्रति के लिए पंडित नयनूराम शर्मा की अध्यक्षता में हाड़ोती सेवा संघ की स्थापना की गई कोटा राज्य में जन जागृति के जनक पंडित नयनूराम शर्मा थे इन्होंने थानेदार के पद से इस्तीफा देकर सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया था यह श्री विजय सिंह पथिक द्वारा स्थापित राजस्थान सेवा संघ के सक्रिय सदस्य बन गए थे इन्होने हाडौती सेवा संघ के माध्यम से, कोटा राज्य में बेगार विरोधी आंदोलन चलाया था जिसके परिणाम स्वरुप बेगार की सख्तियों में कमीआई थी पंडित नयनूराम शर्मा ने सन 1934 में हाडौती प्रजामंडलकी स्थापना की लेकिन महाराज उम्मेदसिंह द्वितीय की अनुदार नीति के कारण यह संस्था निष्क्रिय हो गई थी


प्रोफेसर गोकुल लाल असावा


गोकुल लाल असावा का जन्म 2 अक्टूबर 1901 को देवली के एक माहेश्वरी परिवार में हुआ. इनकी प्रारम्भिक शिक्षा शाहपुरा के मिडिल स्कूल में हुई.


1926 ई में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से बी ए और 1928 ई में दर्शनशास्त्र में एम ए किया. इसके बाद इन्होंने कोटा के हावर्ड कॉलेज में अध्यापन कार्य शुरू किया, किन्तु राष्ट्रीय गतिविधियों को देखकर उन्हें कॉलेज सेव से पृथक् कर दिया गया.


बाबा नरसिंह दास


बाबा नरसिंह दास भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे। नरसिंह दास ने राजस्थान में विद्यालय खोला जिसमें नौजवानों को क्रांति की प्रेरणा देते थे। दास अपने यहाँ क्रांतिकारियों को प्रश्रय भी देते थे।


पंडित अभिन्न हरि


कोटा में जन जाग्रति का श्रेय राजस्थान सेवा संघ के कार्यकर्ता पंडित नयनूराम शर्माको है पंडित नयनूराम शर्मा ने 1918 में कोटा में प्रजा प्रतिनिधि सभा की स्थापना की थी  हाडोती क्षेत्र में जन जाग्रति के लिए पंडित नयनूराम शर्मा की अध्यक्षता में हाड़ोती सेवा संघ की स्थापना की गई कोटा राज्य में जन जागृति के जनक पंडित नयनूराम शर्मा थे इन्होंने थानेदार के पद से इस्तीफा देकर सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया था यह श्री विजय सिंह पथिक द्वारा स्थापित राजस्थान सेवा संघ के सक्रिय सदस्य बन गए थे इन्होने हाडौती सेवा संघ के माध्यम से, कोटा राज्य में बेगार विरोधी आंदोलन चलाया था जिसके परिणाम स्वरुप बेगार की सख्तियों में कमीआई थी पंडित नयनूराम शर्मा ने सन 1934 में हाडौती प्रजामंडलकी स्थापना की लेकिन महाराज उम्मेदसिंह द्वितीय की अनुदार नीति के कारण यह संस्था निष्क्रिय हो गई थी


विशंभर दयाल


बहरोड़ का यह महान क्रांतिकारी 1931 में देश के लिए शहीद हो गया। बहरोड़ के सबलपुरा मोहल्ला निवासी शहीद पंडित विशंभरदयाल भी अंग्रेजों के समय क्रांतिकारी रहे। सबलपुरा में पंडित के साथ क्रांतिकारी सुभाष चन्द्र बोस, भगतसिंह, राजगुरु सुखदेव, चन्द्रशेखर आजाद यहां आते थे। पंडि़त का जन्म 1893 में हुआ था। सबलपुरा मोहल्ले में हुआ।पंडि़त की योग्यता स्नातक थी। पंडित अपने जीवनकाल में अविवाहित रहे। 19 साल की उम्र में सन 1912 में क्रांतिकारी बने व देश के लिये लड़ते लड़ते सन 1931 में शहीद हो गए थे।


बाबू राजबहादुर


भरतपुर के स्वतंत्रता सेनानी स्वाधीन भारत का नया संविधान निर्मित करने के लिए बनाई गई संविधान सभा मेँ मनोनित किए गए मत्स्य प्रदेश के दो प्रतिनिधियोँ मेँ से एक श्री राजबहादुर व दूसरे अलवर के श्री रामचन्द्र उपाध्याय थे ये केन्द्रीय मंत्रिमंडल मेँ नेहरु सरकार मेँ उपमंत्री रहे


शोभाराम कुमावत


मत्स्यप्रदेश के प्रथम प्रधानमंत्री एवं स्वतंत्रता सेनानी बाबू शोभाराम कुमावत की 103वीं जयंती अखिल भारतीय क्षत्रिय कुमावत मंच जयपुर के तत्वावधान में राष्ट्रीय संयोजक हनुवंत कुमावत के सानिध्य में रविवार सुबह 11 बजे पुराना बस स्टैंड स्थित मारू कुम्हारों की बगेची में मनाई जाएगी। इसको लेकर तैयारियां जोर शोर से चल रही है।मंच के प्रवक्ता प्रभुराम कुमावत मादड़ी, मांगीलाल कुमावत तथा श्रवण कुमावत ने बताया कि बाबू शोभाराम कुमावत का जन्म 7 जनवरी 1915 को अलवर के कठूमरा गांव के किसान परिवार के कुमावत परिवार में हुआ। 1942 में वकालात छोड़ भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया। कई बार जेल भी गए। कुमावत समाज से पहले सांसद, विधायक और मंत्री भी आप ही रहे। आजादी के बाद गठित मत्स्य प्रदेश का इन्हें प्रथम प्रधानमंत्री बनाया गया। जयंती कार्यक्रम में कुमावत समाज के कई बंधु मौजूद रहेंगे।


स्वामी केशवानंद


स्वामी केशवानंद (1883-13.9.1972) एक महान शिक्षा-संत, स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, हिन्दी के श्रेष्ठ सेवक, कला-मर्मज्ञ, त्यागी, तपस्वी, दृढ़ प्रतिज्ञ और निष्काम कर्मयोगी जनसेवक थे।


पंडित जुगल किशोर चतुर्वेदी


किशोर चतुर्वेदी (अंग्रेज़ी: Jugal Kishore Chaturvedi, जन्म- 8 नवंबर, 1904, मथुरा, उत्तर प्रदेश) स्वतंत्रता सेनानी तथा जानेमाने राजनेता थे।जुगल किशोर चतुर्वेदी का जन्म मथुरा ज़िले के सौंख नामक गाँव में हुआ था।सन 1939 में प्रजामंडल की मान्यता के लिए जब भरतपुर में आंदोलन प्रारंभ किया गया, तो उसमें जुगल किशोर जी ने सक्रिय रूप से भाग लिया।1942 में आपने 'भारत छोड़ो आंदोलन' में भी भाग लिया। इसके फलस्वरूप 10 अगस्त, 1942 को उन्हें गिरफ्तार कर ढाई महीने तक जेल में रखने के बाद रिहा कर दिया गया।16 मार्च, 1948 को जब राजस्थान में 'मत्स्य संघ' की स्थापना की गई, तब जुगल किशोर चतुर्वेदी को उप-प्रधानमंत्री बनाया गया।बाद के समय में जयनारायण व्यास के मंत्रिमंडल में भी जुगल किशोर जी को मंत्री बनाया गया।


कपूरचंद पाटनी


1931 में जयपुर प्रजा मंडल की स्थापना किसने की - अर्जुनलाल सेठी और कपूरचंद पाटनी। कपूरचंद पाटनी जयपुर प्रजामंडल के संस्थापक थे। 


ऋषि दत्त मेहता


1931 में बूंदी प्रजामंडल की स्थापना की गई ऋषि दत्त मेहता ,नित्यानंद नगर, गोपाल कोटिया, गोपाल लाल जोशी मोतीलाल अग्रवाल ,पूनमचंद आदि बूंदी प्रजामंडल के प्रमुख सक्रिय कार्यकर्ता थे प्रजामंडल ने सरकार के समक्ष उत्तरदायी शासन और नागरिक अधिकारों की मांग प्रस्तुत की महाराज ने इस मांग को अस्वीकार करते हुए जनसभाओं पर प्रतिबंध लगा दिए इसके फलस्वरुप जनता का आक्रोश और उग्रहो गया और प्रजा मंडल के माध्यम से प्रशासनिक सुधारोंकी मांग करने लगा सरकार की दमन नीति भी उग्र होने लगी तब सरकार ने 1936 मे समाचार पत्र पर प्रतिबंध लगा दिए 1937में प्रजामंडल के तत्कालीन अध्यक्ष श्री ऋषि दत्त मेहता को 3 वर्षों के लिए राज्य से निर्वासित कर दिया गया और प्रजामंडल को अवैध घोषित कर दिया गया ऋषि दत्त मेहता की गिरफ्तारी के बाद ब्रज सुंदर शर्मा ने प्रजामंडल का नेतृत्व संभाला


कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी


दैनिक नवज्योति अखबार के संस्थापक, संपादक कप्तान दुर्गा प्रसाद चौधरी मिशनरी, दूरदर्शी, सच्चे, निष्पक्ष और स्वतंत्र पत्रकारिता के प्रतीक हैं। आज के दौर में कप्तान साहब रचनात्मक पत्रकारिता, दबे-कुचले, वंचित और हाशिये पर खड़े लोगों के लिए आदर्श हैं। 2 अक्टूबर 1936 को कप्तान दुर्गा प्रसाद चौधरी ने अजमेर से साप्ताहिक नवज्योति के रूप में शुरूआत की और वे इस मिशनरी अखबार के संस्थापक संपादक थे और स्वतंत्रता के बाद नवज्योति एक दैनिक समाचार पत्र में परिवर्तित हो गई। 1948 में अजमेर से नवज्योति साप्ताहिक से दैनिक नवज्योति बन गया और बाद में 1960 से दैनिक नवज्योति जयपुर से शुरू हुआ और वर्तमान में दैनिक नवज्योति कोटा, जोधपुर और उदयपुर से भी प्रकाशित हो रहा है। पिछले 50 वर्षों में राजस्थान की पत्रकारिता के इतिहास में कप्तान साहब जैसा कोई पत्रकार नहीं था, जो कप्तान साहब की तरह खुले विचारों वाला, लोकतांत्रिक संपादक, प्रकाशक और पत्रकार हो।


बृज मोहन लाल शर्मा


बृज मोहन लाल शर्मा एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे। 1938 में वे वकील बने। उन्हें 1940 के सत्याग्रह के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। शर्मा ने 1951 के अजमेर विधान सभा चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में ब्यावर सिटी उत्तर सीट जीती। उन्हें 2,372 वोट मिले।


चन्दनमल बहड़


चूरू के स्वतंत्रता सेनानी सर्वहितकारिणी सभा के सदस्य थे, जिन्होंने चूरू शहर के मध्य स्थित धर्मस्तुप पन तिरंगा झंडा फहराया, बहड़ व उनके साथियो ने लंदन में आयोजित दूसरे गोलमेल सम्मेलन के अवसर पर बीकानेर राज्य के आतंक और अत्याचारों का कच्चा चिट्ठा तैयार कर उसे हजारों नागरिकों के हस्ताक्षर के साथ लंदन पहुँचा दिया।


सुमनेश जोशी


इनका जन्म जोधपुर में 1916 में हुआ था। 1945 के अंत में इन्होंने जोधपुर से ‘रियासती’ पत्र का प्रकाशन प्रंभन किया। इस पत्र का सबसे बड़ा स्कूप’ महाराजा जोधपुर के पाकिस्तान में मिलने के षड़यंत्र का पर्दाफाश था।


पंडित हरिनारायण शर्मा


अलवर राज्य में जनजागृति का श्रेय पंडित हरिनारायण को दिया जाता है।


श्यामजी कृष्ण वर्मा


राजस्थान के सभी क्रांतिकारियों के प्रेरणा स्रोत एवं मार्गदर्शक। ये स्वामी दयानन्द सरस्वती को प्रेरणा से राजस्थान में क्रांतिकारी गतिविधियों के मुख्य सूत्रधार बने। इन्होंने इंग्लैण्ड में इंडिया हाउस की स्थापना की। उन्हीं के एक शिष्य मदन लाल धींगड़ा ने 1 जुलाई, 198 भारत सचिव कर्जन विली को गोली मारी थी।


बालमुकुंद बिरसा


भाई बालमुकुंद (अंग्रेज़ी: Bhai Balmukund, जन्म- 1889; शहादत- 8 मई, 1915, दिल्ली) भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले क्रांतिकारियों में से एक थे। 'दिल्ली षड़यंत्र' में फ़ाँसी पाने वाले प्रमुख क्रांतिकारियों में से वे एक थे।


गोकुल जी वर्मा 


भरतपुर की जन-जागृति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। ‘शेर-ए-भरतपुर’ के नाम से जाने जाते हैं।


वैद्य मंगाराम 


बीकानेर में आजादी के आंदोलन के जनक 1936 में इन्होंने बीकानेर प्रजामंडल की स्थापना की, ‘दूधवा खारा किसान आंदोलन’ के नाम से प्रसिद्ध आंदोलन का नेतृत्व किया। 9 दिसम्बर, 1942 को बीकानेर में झंडा सत्याग्रह किया।


जीतमल पुरोहित 


जैसलमेर में सर्वप्रथम तिरंगा झंडा फहराया था, उपनाम-‘जीता भा।


जानकी देवी बजाज 


जानकी देवी बजाज (अंग्रेज़ी: Janaki Devi Bajaj, जन्म- 7 जनवरी, 1893; मृत्यु- 21 मई, 1979) गाँधीवादी जीवन शैली की कट्टर समर्थक थीं। उन्होंने कुटीर उद्योग के माध्यम से ग्रामीण विकास में काफी सहयोग किया। वह एक स्वावलंबी महिला थीं, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया था।


 श्रीमती रतन शास्त्री


पंडित हीरा लाल शास्त्री और उनकी सहगामिनी श्रीमती रतन शास्त्री .... भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के अति महत्वपूर्ण सेनानी थे। दोनों ही घोर गाँधीवादी थे।


अचानक ही उनकी बेटी, शान्ता बाई (जिसे दोंनो बेहद प्यार करते थे) बीमार हुई और साढ़े बारह साल की नन्ही उम्र में ही अपने माता पिता को बिलखता हुआ छोड़कर इस नश्वर संसार से विदा ले गई। 25 अप्रैल 1935 के दिन उस बच्ची की मृत्यु हो गई।


माता रतन शास्त्री इस सदमें को सहन नही कर पाई। हालत ऐसी हुई कि वे खुद मरणासन्न हो गई। उस अवस्था में उन्हें मौत के मुँह में जाने से बचाने की एक ही तरकीब थी और पंडित जी ने वो ही अपनाई।


पड़ोस की चार छोटी छोटी बच्चियाँ इक्कठी करी और अपनी पत्नी से कहा -

"देखो ! एक शान्ता बाई की जगह मैं चार शान्ता बाई लाया हूँ। इन्हें पढ़ाओ और इनकी देखभाल करो। और जो प्यार अपनी एक बेटी को देती : अब इन चारों को दो।"


माता रतन शास्त्री को जीने का बहाना मिल गया। इस प्रकार उस स्कूल की नीँव पड़ी, जो उस दु:खद घटना से करीब साढ़े चार महीने बाद बदस्तूर 06 अक्टूबर 1935 को शुरू हुआ।




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