परीक्षा और तनाव - Exam and Stress



अक्सर यह देखा गया है की परीक्षा के दिनों में बच्चे ज्यादा तनाव में आ जाते है। हालाँकि परीक्षा के कुछ महीनों पहले उन्हें लगता है की सब कुछ सही है। मेरी तैयारी भी पूरी है और मेने सभी सब्जेक्ट्स की रीडिंग भी कर ली है फिर भी जैसे - जैसे एग्जाम की डेट नजदीक आती है वैसे - वैसे जो भी पढ़ा है अचानक दिमाग से गायब हो जाता है और फिर छात्र एवं छात्राएं धीरे - धीरे तनाव में आने लगते है। इस तनाव के कारण उनमें गुस्सा, चिड़चिड़ापन आदि समस्या भी कई बार देखी जाती है। 



अभी हाल ही में एक अमेरिकन शोध में यह भी पता चला है की कई लम्बी परीक्षा की तैयारी करने वाले बच्चे डिप्रेशन के शिकार भी हो गए है और उनका मानसिक संतुलन भी बिगड़ जाता है। 


में तनाव को एक गंभीर बीमारी मानता हूँ। यह गंभीर बीमारी जिसके बारे में स्कूल और कॉलेजों में कोई चर्चा नहीं होती। यह बीमारी जब ज्यादा हावी हो जाती है जब आपके ट्यूशन के टीचर आप पर ज्यादा जोर देते है और कहते है भागों नहीं तो पीछे रह जाओगे और फिर बच्चों पर फेमली का प्रेशर ऐसे में बच्चे के दिमाग में यह बीमारी हावी हो जाती है और लगता है बस भागों नहीं तो कुछ नहीं बन पाओगे। यही तनाव का मुख्य कारण है। 


हर बच्चे की सोचने और समझने की केपेसिटी अलग - अलग होती है और जो बच्चा ज्यादा सोचने वाला है वह इस बेबुनियादी बीमारी के चक्कर में फस जाता है। 


दोस्तों इस तनाव नाम की बीमारी के कारण कुछ बच्चे नशे में तो कुछ और बुरी आदतों में फस जाते है। कुछ मोबाइल में इधर - उधर कुछ खोजते रहते है ताकि उनका तनाव कुछ कम हो लेकिन उन चीजों से एक बार तो तनाव दूर हो जाता है पर थोड़े समय बाद फिर  वापस तनाव घेर लेता है। 


आज कल सरकारी नौकरियों में भी कम्पीटिशन बहुत ज्यादा हो गया है ऐसे में गरीब परिवार इतना सक्षम नहीं है की वह हर परीक्षा के 500 रूपये बच्चे को देता रहे। और यह भी भरोशा नहीं की नौकरी हाथ आएगी भी या नहीं। अभी पीछे कुछ समय पहले "राजस्थान पटवारी" के फॉर्म फ्लिप हुए थे जिनमे करीब 13 लाख बच्चो ने फॉर्म भरवाए है यानी आप सोच सकते है की करीब 300 बच्चों पर एक सीट है। बढ़ती बेरोजगारी भी चिंता का एक विशेष कारण है। 


कुछ बच्चे तो अपना खुद का व्यापर कर के कुछ कमा - खा रहे है वरना इस शिक्षा प्रणाली के कारण आज सभी को चंदा मांगना पड़ता। 


अब भारत की शिक्षा प्रणाली में विशेष बदलाव का समय है ताकि युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध किये जा सके। 


यहाँ 12वी तक कुछ नहीं मिलने वाला उसके बाद आपको कॉलेज करनी होगी फिर कॉलेज के बाद आपको उच्च विश्वविद्याल  से डिग्री लेनी होगी तब जाकर कोई 10 - 15 हजार रूपये कमा पाओगे साथ ही अगर आपको सरकारी नौकरी लगनी है तो कॉलेज की डिग्री को तो साइड में रखो पहले सरकारी एग्जाम पास करो। कभी - कभी तो हंसी आती है की जीवन के 17 साल बर्बाद किये पढ़ाई में और कोई 5 हजार की नौकरी भी नहीं देने वाला। 


अगर कॉलेज किया है तो कॉलेज के बाद क्यों नहीं लग सकते सरकारी जॉब उसके बाद अलग पढ़ाई क्यों ? सरकार को कुछ ऐसे नियम अब बनाने की जरूरत है जिनके जरिए ज्यादा से ज्यादा रोजगार दिए जा सके। वरना आने वाले समय में यहाँ बेरोजगारों की एक मंडली होगी और एक उनका सरदार जो सरकार के विपरीत खड़ा हो सकता है। 


में इसमें केवल केंद्र की सरकार की गलती नहीं मानता बल्कि इसमें भारत के सभी नागरिकों की गलती है क्योकि यह सरकार तो अब आई है हमें पहले से ही ऐसी कुछ व्यवस्था और योजना तैयार रखनी थी ताकी आने वाले समय में छात्र - छात्रों को सही पथ की और मोड़ सके और उन्हें "उच्च शिक्षा ही नहीं बल्कि उच्च शिक्षा के साथ उच्च रोजगार" उपलब्ध करवाए जा सके।  

दोस्तों ये सब बाते बता कर मेरा उद्देश्य आपको परीक्षा के दिनों में कमजोर करना नहीं बल्कि मजबूत करना है। ताकि जब आप परीक्षा पास करके उच्च नौकरी हासिल करो तो बाकि और बच्चो के लिए एक सुगम मार्ग तैयार करो ताकि बिना भष्टाचार के उन्हें अपनी मेहनत का फल मिले। 


परीक्षा में तनाव होना सहज है लेकिन इससे बचने के लिए भी आपको यह मानना होगा की ये एक परीक्षा जीवन का अंत नहीं है। जीवन इन छोटी - छोटी परीक्षाओ से भी काफी ऊपर है। अपनी आस - पास की सभी चीजों और घटनाओं को देखो और समझो। परीक्षा के दिनों में कुछ पल अकेले बैठो और आपको समझ आएगा की जो भी आपने पढ़ा है वो कही गायब नहीं हुआ बल्कि आपके भीतर ही है। हमारे दिमाग की आदत है भूलने की ताकी हम तनाव से बच सके। इसलिए कभी - कभी हमें लगता है की हम सब कुछ भूल चुके है। दिमाग तो पूरा शांत हो चूका है। लेकिन ऐसा नहीं है कुछ पल आराम से बैठे और अपने दिमाग में ही याद करे शुरू से जो - जो विषय आपने पढ़े है। 


अचानक आपको सब याद आने लगेगा। ये सब तनाव की बीमारी के कारण ही होता है की हम अचानक सब कुछ भूल बैठते है। इसके लिए कुछ नियम है कृपया आप परीक्षा के दिन इनका पालन भी करें। 


1. परीक्षा के दिनों में हमेशा 1 या 2 घंटे जल्दी उठे यानी सुबह 4 से 5 बजे के बीच। 


2. कुछ समय ध्यान, व्यायाम या कही बाहर टहलने के लिए जाए। 


3. अब अपना डेली का रूटीन बनाए करीब 10 दिनों तक का बना ले की इन दिनों मुझे ये - ये सब्जेक्ट्स पढ़ने है। 


4. परीक्षा के दिनों में भोजन कम खाये। भोजन के साथ सलाद भी खाए। 


5. सुबह - सुबह बादाम या चने भिगों कर खाये इससे आपके मष्तिक को भरपूर ऊर्जा मिलेगी और यह सही कार्य करेगा। 


6. दिन भर 2 से 3 अलग - अलग सब्जेक्ट्स पढ़े। 


7. परीक्षा के दिन टीवी, मोबाइल, फालतू की न्यूज़ से दूर रहे। 


8. अपना ध्यान सिर्फ और सिर्फ अपने लक्ष्य की तरफ रखे। अपनी सारी ऊर्जा को सफलता की तरफ लगा दे। 


9. समय पर सोए और गहरी नींद ले। नीद से तनाव दूर होता है। तम्बाकू एवं अन्य नशीले पर्दार्थो के सेवन से बचे क्योकि यह तनाव के साथ - साथ जो भी याद किया है वह भी भुला देंगे। हा थोड़ी - थोड़ी मात्रा में चाय का सेवन कर सकते हो यह परीक्षा के दिनों में बूस्ट का काम करेगी। लेकिन ज्यादा न पिये। 


10 . यह भी ध्यान में रखे की सफलता और असफलता यह दोनों जीवन के एक अभिनय अंग है। असफलता के बाद जो सफल होता है उसका मजा ही अलग और शानदार है। इसलिए घबराए नहीं परीक्षा में फेल होना यहाँ कम नंबर आये तो यह नहीं दर्शाता की आप जीवन में भी कमजोर हो बल्कि जो टॉपर नहीं है उन्होंने भी इस दुनियाँ में कई इतिहास रचे है। जिन्हे आज हम सब पढ़ रहे है। 


आज के लिए बस इतना ही दोस्तों में विपिन पारीक आपसे फिर मिलूँगा एक नए आर्टिकल के साथ एक नए जोश के साथ। आप सभी अपने जीवन में सफल हो यही मेरी कामना है। 


धन्यवाद !!


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