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वैदिक साहित्य एवं संस्कृति : वैदिक साहित्य का इतिहास - Vaidic Sahitya Evam Sanskriti | Vedic Literature in Hindi



वैदिक साहित्य एवं संस्कृति : वैदिक साहित्य का इतिहास - Vaidic Sahitya Evam Sanskriti | Vedic Literature in Hindi 



 परिचय


1- वैदिक साहित्य में साहित्यिक कृतियों के चार वर्ग है- वेद, ब्राहम्ण, आरण्यक एवं उपनिषद।


2- वेद भजन, प्रार्थना, आकर्षण सूची एवं बलि-विधियों का संग्रहण है। वेद चार प्रकार के है


वेद के प्रकार


*ऋग्वेद – भजनों का संकलन


*सामदेव – गीतों का संग्रह


*यजुर्वेद – बलि-विधियों का संग्रह


*अथर्ववेद – मंत्र एवं आकर्षण का संग्रह


1. ऋग्वेद


1- यह 1500-1200 ई.पू. संकलित किया गया था।


2- ऋग का शाब्दिक अर्थ प्रशंसा करना।


3- यह ईश्वर की प्रशंसा करने वाले भजनों का संग्रहण है।


4- यह दस संस्करणों में विभाजित किया गया है जिन्हे मण्डल कहा जाता है।


5- मण्डल II एवं VII सबसे पुराने मण्डल है। इन्हे पारिवारिक पुस्तके कहा जाता है क्योकि यह ऋषि – मुनियों के परिवारों से सम्बंधित है।


6- मण्डल VII एवं मण्डल IX मध्य काल से सम्बंधित है।


7- मण्डल I एवं मण्डल X सबसे अंत में संकलित किये गए थे।


8- मण्डल X में गायत्री मंत्र का उल्लेख है जिसका संकलन सावित्री देवी की प्रशंसा के लिए किया गया है।


9- मण्डल IX भगवान सोम को समर्पित हे जो पैड़ पौधों के ईश्वर है।


10- मण्डल X में एक भजन का उल्लेख है जिसे पुरूष सुक्त कहा गया है जिसमें वर्ण व्यवस्था का जिक्र किया गया है।


11- जो ऋषि –मुनि ऋग्वेद में निपुण होते थे उन्हे होत्र या होत्री कहा जाता था।


12- ऋग्वेद में बहुत सी बातें अवेस्ता के समान है,जो ईरानी भाषा का प्राचीनतम लेख है।


2. सामवेद


1- यह भजनों का संग्रहण हे जिसके अधिकतर भजन ऋगवेद से लिए गए है एवं इसमें उनकी धुन निर्धारित की गई है।


2- यह मंत्रों की पुस्तक है।


3- सामवेद के ज्ञान में निपुण व्यक्तियों को उद्गात्री कहा गया है।


4- सामवेद का संकलन भारतीय संगीत का शुभारंभ माना जाता है।


5- सामवेद में 1810 भजन है।


3. यजुर्वेद


1- यह बलि की विधियों एवं प्रकारों का संकलन है।


2- इसमें मंत्रोच्चारण करते समय किये जाने वाले अनुष्ठानों का वर्णन है।


3- यजुर्वेद के ज्ञान में निपुण व्यक्तियों को अध्वर्यु कहा जाता था।


4- यह गद्य एवं पद्य दोनों में पाया जाता था।


5- यह दो भागों में विभाजित था यथा कृष्ण यजुर्वेद एवं शुक्ल यजुर्वेद।


4. अथर्ववेद


1- यह सौदर्य एवं मंत्रों का संकलन है।


2- इसमें विभिन्न रोगों से छुटकारा पाने के लिए जादुई मंत्र थे।


3- भारतीय चिकित्सा विज्ञान जिसे आयुर्वेद कहता है वह अथर्ववेद से ही उत्पन्न हुआ है।


ब्राहम्‍ण


1- ये वे गद्य पुस्तके (पाठ) जिनमें वैदिक कालीन भजनों के अर्थ, उनके अनुप्रयोगो कथाओं एवं उनकी उत्पत्ति का विवरण है।


2- ऐतरेय या कौशितकी ब्राहम्ण ऋग्वेद, तंड्य एवं जैमिनी ब्राहम्ण सामवेद, तैतिरेय एवं शतपथ ब्राहम्ण यजुर्वेद एवं गोपथ ब्राहम्ण अथर्ववेद के लिए निर्दिष्ट है।


3- तंड्य ब्राहम्ण सबसे प्राचीनतम ब्राहम्ण लेख है।


4- शतपथ ब्राहम्ण सबसे स्थूल ब्राहम्ण लेख है।


अरण्‍यक


1- ये ब्राहम्ण लेखों का समापन भाग है।


2- वे अरण्यक इसलिए कहे जाते थे क्योंकि उनकी विषय वस्तु के रहस्यमयीता एवं दार्शनिक चरित्र के ज्ञान के लिए उनका अध्ययन अरण्य (वनों) के एकांत वातावरण में किया जाना चाहिए।


3- इन्होने भौतिक वादी धर्म की आध्यात्मिक धर्म में परिवर्तन की शुरूआत की। अत: इनसे एक परंपरा की रचना हुई जो उपनिषद के रूप में समापन हुई।


4- अरण्यक वेदों सहित ब्राह्ण लेखों एवं उपनिषदों के बीच के संयोजक की तरह है।


उपनिषद


1- ये वैदिक साहित्य की अंतिम अवस्था है


2- उपनिषद अध्यात्मविज्ञान अर्थात दर्शन शास्त्र पर आधारित है।


3- इन्हे वेदांत भी कहा जाता है क्योकि वे वैदिक साहित्य श्रंखला की अंतिम पुस्तके थी।


4- इनकी विषय वस्तु आत्मा, ब्राहम्ण, पुनर्जन्म एवं कर्म सिद्धांत आदि थी।


5- उपनिषद ज्ञान के मार्ग पर बल देते है।


6- उपनिषद का शाब्दिक अर्थ है पैर के पास बैठना


7- छन्दोग्य उपनिषद एवं ब्रहदारण्यक उपनिषद प्रमुख उपनिषद हैं।


8- अन्य मुख्य उपनिषद है- कथा उपनिषद, ईशा उपनिषद, प्रसना उपनिषद, मुण्डकोपनिषद आदि।


9- यम एवं नचिकेता के मध्य वार्ता, कथा उपनिषद की विषय वस्तु है।


10- राष्ट्रीय चिहन् में प्रयुक्त किया गया शब्द सत्यमेव जयते मुण्डको उपनिषद से ही लिया गया है।


वेदांग


1- 600 ई. पू. के बाद का समय सुत्र काल कहलाता है। इसी काल में वेदांगो की रचना हूई थी। अत: इन्हे सुत्र साहित्य भी कहा जाता है।


2- ये वेदों के अंग के रूप में जाने जाते है, अत: इन्हे वेदांग कहा जाता है।


ये संख्या में छ: है, जिनके नाम है


1. शिक्षा – स्वर विज्ञान या उच्चारण विज्ञान


2. कल्प – रस्में एवं समारोह


3. व्याकरण – व्याकरण


4. निरूक्त – शब्द- व्युपत्ति शास्त्र (शब्दों की उत्पत्ति)


5. छन्द – छन्द रूप एवं काव्य रचना के नियम


6. ज्योतिष – भविष्य वाणियाँ


 उपवेद


नाम - विषय वस्तु


*गंधर्ववेद – नृत्य, नाटक, संगीत


*आयुर्वेद – औषधि


*शिल्प वेद – कला एवं वास्तु कला


*धनुर्वेद – युद्ध कौशल


 प्राचीन कालनी नदियां


श्रगवैदिक नाम – आधुनिक नाम


*सिंधु – इंडस


*वितस्ता – झेलम


*आस्किनी – चिनाव


*पुरूष्णी – रावी


*विपाशा – व्यास


*शतुद्रि – सतलज


*द्रशद्वर्ती – घग्घर


*क्रुमु – कुर्रम


*गोमल – गोमती


इन सभी के बाद अब हम "बौद्ध धर्म" के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे - बौद्ध धर्म का इतिहास


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