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बिन्दुसार का इतिहास और जीवन परिचय - Bindusara Ka Itihas | History of Bindusara in Hindi | Morya Samrajya in Hindi



बिन्दुसार का इतिहास और जीवन परिचय - Bindusara Ka Itihas | History of Bindusara in Hindi | Morya Samrajya in Hindi



- बिन्दुसार (राज 297 से 272 ई. पू.) मौर्य राजवंश के राजा थे जो चन्द्रगुप्त मौर्य के पुत्र थे। बिन्दुसार को अमित्रघात, सिंहसेन्, मद्रसार तथा अजातशत्रु वरिसार भी कहा गया है। बिन्दुसार महान मौर्य सम्राट अशोक के पिता थे।


- चंद्रगुप्तमौर्य के पश्चात् उनका पुत्र बिंदुसार गद्दी पर बैठा।


- बिंदुसार को अमित्रघात कहा जाता है अर्थात "दुश्मनों का संहार करने वाला"।


- बिंदुसार ने अपने ज्येष्ठ पुत्र सुमन (सुशिम) को दक्षशिला का राज्यपाल एवं अशोक को उज्जैन का राज्यपाल बनाया।


- बिन्दुसार के शासन में तक्षशिला के लोगों ने दो बार विद्रोह किया। पहली बार विद्रोह बिन्दुसार के बड़े पुत्र सुशीमा के कुप्रशासन के कारण हुआ। दूसरे विद्रोह का कारण अज्ञात है पर उसे बिन्दुसार के पुत्र अशोक ने दबा दिया।


- उसने दक्षिण भारत के कर्नाटक तक अपने राज्य की सीमाओं का विस्तार किया।


- बिंदुसार ने आजीवक सम्प्रदाय की पालना की।


- चन्द्रगुप्त मौर्य एवं दुर्धरा के पुत्र बिन्दुसार ने काफी बड़े राज्य का शासन संपदा में प्राप्त किया। उन्होंने दक्षिण भारत की तरफ़ भी राज्य का विस्तार किया। चाणक्य उनके समय में भी प्रधानमन्त्री बनकर रहे।


- बिंदुसार की मृत्यु के बाद राजगद्दी के लिए अगले चार वर्षो तक संघर्ष चला एवं अशोक अपने छ: भाईयों का वध कर 272 ई्.पू. में सिहासन पर बैठा।


इन सभी के बाद अब हम बिन्दुसार के पुत्र "सम्राट अशोक" के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे - महान सम्राट अशोक का इतिहास


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