चंद्रगुप्त मौर्य का इतिहास और जीवन परिचय - Chandragupta Maurya Ka Itihas | History of Chandragupta Maurya in Hindi | Chandragupt Mourya Biography



चंद्रगुप्त मौर्य का इतिहास और जीवन परिचय - Chandragupta Maurya Ka Itihas | History of Chandragupta Maurya in Hindi | Chandragupt Mourya Biography




- चक्रवर्ती सम्राट चन्द्र गुप्त मौर्य का जन्म 340 ई. पू. पाटलीपुत्र, बिहार में हुआ था। 


-  चन्द्रगुप्त मौर्य ने अपने गुरू चाणक्य की सहायता से अन्तिम नंद शासक घनानन्द को युद्ध भूमि मे पराजित कर मौर्य वंश की नींव डाली थी।


- चन्द्रगुप्त मौर्य ने नन्दों को पराजित कर मौर्य साम्राज्य की स्थापना की।


- जिस समय चन्द्रगुप्त राजा बना था भारत की राजनीतिक स्थिति बहुत खराब थी। उसने सबसे पहले एक सेना तैयार की और सिकन्दर के विरुद्ध युद्ध प्रारम्भ किया। 


- अब चन्द्रगुप्त मौर्य सिन्ध तथा पंजाब का एकक्षत्र शासक हो गया। पंजाब और सिन्ध विजय के बाद चन्द्रगुप्त तथा चाणक्य ने घनानन्द का नाश करने हेतु मगध पर आक्रमण कर दिया। युद्ध में घनानन्द मारा गया अब चन्द्रगुप्त भारत के एक विशाल साम्राज्य मगध का शासक बन गया। सिकन्दर की मृत्यु के बाद सेल्यूकस उसका उत्तराधिकारी बना। वह सिकन्दर द्वारा जीता हुआ भू-भाग प्राप्त करने के लिए उत्सुक था। इस उद्देश्य से 305 ई. पू. उसने भारत पर पुनः चढ़ाई की। 


-  चन्द्रगुप्त ने पश्‍चिमोत्तर भारत के यूनानी शासक सेल्यूकस निकेटर को पराजित कर एरिया (हेरात), अराकोसिया (कंधार), जेड्रोसिया (मकरान), पेरोपेनिसडाई (काबुल) के भू-भाग को अधिकृत कर विशाल भारतीय साम्राज्य की स्थापना की। सेल्यूकस ने अपनी पुत्री हेलना (कार्नेलिया) का विवाह चन्द्रगुप्त से कर दिया। उसने मेगस्थनीज को राजदूत के रूप में चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में नियुक्‍त किया।


- जब भारतवर्ष के लोग नंद शासक धनानंद के बुरे कार्यो से परेशान और पीड़ित थे। उसी समय भारत की धरती पर एक महान योद्धा ने जन्म लिया जिसका नाम था चन्द्रगुप्त मौर्य। 


- महान चन्द्रगुप्त मौर्य के गुरु भी महान ही थे। जिन्होंने चन्द्रगुप्त मौर्य को धर्म, राजनीती, व्यवस्था, युद्ध कुशलता आदि में अनेकों अनेक शिक्षाए दी। 


- चन्द्रगुप्त मौर्य के गुरु चाणक्य थे जिन्हें कौटिल्य के नाम से भी जाना जाता है। 


- विष्णुगुप्त भी कौटिल्य का ही एक अन्य नाम है। 


- अर्थशास्त्र नामक पुस्तक की रचना कौटिल्य ने ही की थी। 


- चंद्रगुप्त मौर्य ने कौटिल्य (चाणक्य) की सहायता से मौर्य वंश की स्थापना की।


- उसने साम्राज्य के पूर्वी भाग में सेल्युकस निकेटर को पराजित किया जो सिकंदर को हरा कर वहां का सम्राट बना था।


- सेल्युकस ने मेगस्थनीज को राजदूत के रूप में चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा था एवं इसने अपनी पुस्तक "इंडिका" में भारत की तत्कालीन स्थिति का वर्णन किया है।


- युनानी साहित्यों में चंद्रगुप्त को "सेन्ड्रोकोट्टस" कहा गया है।


- जुनागढ प्रशास्ति के अनुसार चंद्रगुप्त ने सौराष्ट्र में सिचाई कार्य के लिए एक झील का निर्माण करवाया जिसे सुदर्शन झील नाम दिया ।


- जीवन के अंतिम दिनों में उन्होंने जैनधर्म को अपना लिया भद्रबाहू के साथ दक्षिण भारत की तरफ चले गए। उन्होंने स्वयं को भूखा रख श्रवनबेलागोला (मैसूर) में प्राण त्याग दिये ।


इन सभी के बाद अब हम चन्द्रगुप्त मौर्य के पुत्र "बिन्दुसार" के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे - बिन्दुसार का इतिहास



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