अख़ामनी वंश का इतिहास : हख़ामनी साम्राज्य - Hakhamani Vansh Ka Itihas | Hakhamani Dynasty in Hindi | Hakhamani Samrajya



अख़ामनी वंश का इतिहास : हख़ामनी साम्राज्य - Hakhamani Vansh Ka Itihas | Hakhamani Dynasty in Hindi | Hakhamani Samrajya 



- ईरान का पुराना नाम फ़ारस है और इसका इतिहास बहुत पुराना रहा है जिसमें इसके पड़ोस के क्षेत्र भी शामिल रहे हैं। इरानी इतिहास में साम्राज्यों की कहानी ईसा के 600 साल पहले के हख़ामनी शासकों से शुरु होती है।


- अख़ामनी वंश (ई.पू. 550-330) प्राचीन ईरान का प्रथम ज्ञात शासकीय वंश माना जाता है। 


- इस वंश के संस्थापक साइरस प्रथम ने 551-530 के बीच भारत में अपना साम्राज्य पेशावर से लेकर ग्रीस तक फैला लिया था। 


- अख़ामनी शासकों ने आज के लगभग सम्पूर्ण ईरान पर अपनी प्रभुसत्ता स्थापित कर ली थी।


- इनके द्वारा पश्चिम एशिया तथा मिस्र पर ईसापूर्व 530 के दशक में हुई विजय से लेकर अठारहवीं सदी में नादिरशाह के भारत पर आक्रमण करने के बीच में कई साम्राज्यों ने फ़ारस पर शासन किया। इनमें से कुछ फ़ारसी सांस्कृतिक क्षेत्र के थे तो कुछ बाहरी।


- डेरियस प्रथम इस राजवंश का वह प्रथम शासक था, जिसके समय में ईरान अपने उत्कृष्ट की चरम सीमा पर पहुँच गया था। 


-  इतिहास में फ़ारस के अख़ामनी वंश को ही भारत पर चढ़ाई करने वाला पहला विदेशी वंश माना जाता है।


- इसी समय मेसीडोनिया (मकदूनिया) में सिकन्दर का उदय हो रहा था।


- डेरियस का पिता 'विष्तास्पह्य' भी 'अख़ामनी राजवंश' का क्षत्रप था। समझा जाता है कि उसने साइरस के अधीन भी काम किया था। 


- डेरियस प्रथम ने साइरस महान् की आन, बान और शान को पूरी तरह से कायम रखा था, इसीलिए उसके जीवन काल में ही उसे भी "डेरियस महान" कहा जाने लगा था।


- अख़ामनी वंंश की राजधानी पर्सेपोलिस के शिलालेखों पर ऐसा ही दर्ज है। पुरातत्व पर्यटन के लिए मशहूर पर्सेपोलिस शहर डेरियस की राजधानी हुआ करता था। ऐसा माना जाता है कि यह शहर उसने ही बसाया था।


- 'अख़ामनी वंश' का पतन सिकन्दर के आक्रमण से सन 330 ई.पू. में हुआ, जिसके बाद इसके प्रदेशों पर 'यूनानी' (मेसीडोन) प्रभुत्व स्थापित हो गया था।


No comments:

Post a Comment