मौर्य वंश का इतिहास - Maurya Vansh Ka Itihas | History of Maurya Dynasty in Hindi | मगध साम्राज्य



मौर्य वंश का इतिहास - Maurya Vansh Ka Itihas | History of Maurya Dynasty in Hindi | मगध साम्राज्य 


मौर्यवंश के स्‍त्रोत


- पुरालेखीय स्त्रोत, साहित्यिक स्त्रोत विदेशी स्त्रोत एवं पुरातात्विक खुदाई से प्राप्त स्त्रोंतो द्वारा मौर्य वंश के विषय में ज्ञात होता है।


- कुछ बौद्ध लेख यथा जातक कथाएँ, दिव्यावदान एवं अशोकावदान।


- श्रीलंकाई लेख महावंश एवं दीपवंश भी मौर्य साम्राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण लेख है।


- पुराणों में भी मौर्यों की चर्चा की गई है।


- कौटिल्य द्वारा शास्त्रीय संस्कृत में लिखी गई अर्थशास्त्र भी एक महत्पूर्ण स्त्रोत है। यह राजनीतिक अर्थव्यवस्था अथवा शासन प्रबंध से सम्बंधित पुस्तक है।


- मेगस्थनीज़ द्वारा संकलित इण्डिका भी एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है। यह लगभग नष्ट हो चुकी है एवं जिसे विभिन्न युनानी लेखकों की टिप्पणीयों द्वारा पुनर्जीवित किया गया है।


- विशाखदत द्वारा संस्कृत में रचित मुद्राराक्षस में चंद्रगुप्त द्वारा नंद वंश को समाप्त करने के बारे में चर्चा की गई है। विशाखदत उत्तर वैदिक काल के समय का संकलन है।


- सोमवेद की कथासरितसागर, क्षेमेंद्र की वृहद्कथा मंजरी एवं कल्हण की रजतरंगिनी भी मौर्य वंश पर कुछ प्रकाश डालती है।


मौर्य वंश के प्रमुख राजाओं का इतिहास -


+ चंद्रगुप्त मौर्य का इतिहास 


+ बिन्दुसार का इतिहास (297-272 ई.पू.)


+ महान सम्राट अशोक का इतिहास (272-232 ई.पू.)


+ अशोक के शिलालेख


 मौर्य अर्थव्‍यवस्‍था


- जनसंख्या में सर्वाधिक प्रतिशत कृषकों का था। कृषि को अति महत्व दिया जाता था। जलाशयों एवं बांधों का निमार्ण किया गया एवं कृषि के लिए जल वितरण किया गया।


- उद्योग विभिन्न मंडलीयों का संघो में विभाजित किया गया संघ के मुखिया को ज्येष्ठक कहा जाता था।


- व्यापार राज्य द्वारा विनियमित किया जाता था।


- विदेशी व्यापार समुद्री मार्ग एवं भूमिगत मार्गों द्वारा किया जाता था।


- कौटिल्य के अनुसार पूर्ण कोषागार या भरा हुआ कोषागार राज्य की समृद्धि की गारण्टी थी।


मौर्यकाल में भूमि का वर्गीकरण


1. कृष्ठ - सिंचित भूमि


2. अकृष्ट - असिंचित भूमि


3. विवित - चारागाह भूमि


- राजस्व का मुख्य स्त्रोत भूमि कर था एवं व्यापार कर आदि भी लगाया जाता था।


- ब्राहम्णों बच्चो एवं अक्षय व्यक्तियों पर कर प्रणाली लागू नहीं थी।


- राजा की स्वयं की भूमि से प्राप्त आय को सीता कहा जाता था।


- साहूकारी प्रचलन में थी।


- पण एवं मासिक पंच के चिह्न युक्त क्रमश: चाँदी एवं ताँबे के सिक्के थे।


- काकिनी मासिक का एक चौथाई भाग थी।


मौर्य राजनीति एवं प्रशासन


मौर्य साम्राज्य प्रांतो में विभाजित था यथा


(अ) उत्तर पठ या उत्तर पश्चिमी प्रान्त जिसकी राजधानी तक्षशिला थी।


(ब) अवन्ती जिसकी राजधानी उज्जैन थी।


(स) दक्षिण पठ जिसकी राजधानी स्वर्णगिरि थी।


(द) कलिंग जिसकी राजधानी वैशाली थी।


मौर्य साम्राज्‍य के प्राधिकारी


1. अमात्य - सवौच्च सैन्य प्राधिकारी, मेगस्थनीज द्वारा मजिस्ट्रेट एवं पार्षद भी कहे जाते थे एवं अशोक द्वारा महामात्य


2. समर्घ्थ - करों का नियंत्रण


3. सन्निधाता - मुख्य खजानची


4. अक्षपटलाध्यक्ष - महालेखाकार या बहीखाताध्यक्ष संभालने वाला प्राधिकारी महालेखांकार या


5. द्युताध्यक्ष - जुऍ पर नियंत्रण रखने वाला अधिकारी


6. द्वारका - शाही महल का मुख्य अधिकारी


7. युक्त - सचिवीय कार्य एवं लेखा कार्य का अधीनस्थ अधिकारी


8. रज्जुका - भूमि सर्वेक्षण एवं आंकलन के लिए जिम्मेदारी अधिकारी


9. प्रदेशिका - तहसील प्रशासन का अध्यक्ष


10. नगरीका - मुख्य कमांडर


11. जम्हारिक - संदेशवाहक


12. रक्षिणा - पुलिस


13. राष्ट्र –पाल - प्रान्तीय गर्वनर या राज्यपाल


- मुख्य प्रान्तों का नियंत्रण सीधे कुमारी (राजकुमारों) के हाथ में था।


- ग्राम प्रशासन की अंतिम ईकाई थी।


- ग्रामों के मुखिया को ग्रामिक कहा जाता था एवं ग्रामीणों के समूहों की देखभाल गोपा की सहायता से स्थानिक द्वारा की जाती थी।


- मौय साम्राज्य के पास एक विशाल सेना थी एवं नौकरशाही कौटिल्य के सप्तांग सिद्धांत पर आधारित थी।


- प्रशासन कार्यों में राजा की सहायता के लिए मंत्रीपरिषद होती थी।


- पाटलीपुत्र नगर मौर्य नगरपालिका संबंधी कार्यो का प्रेरणास्त्रोत थी। मेगस्थनीज के अनुसार शहर का प्रशासन 30 सदस्यों की एक समिति द्वारा किया जाता था जिन्हे बराबर सदस्यों के पांच भागों में बांटा गया था।


मौर्य समाज एवं संस्‍कृति


- मेगस्थनीज के अनुसार मौर्य समाज सात जातियों में विभक्त था। यथा- दार्शनिक, किसान, सैनिक, चरवाह, कारीगर, मजिस्ट्रेट एवं पार्षद।


- मेगस्थनीज ने बताया कि दासता भारत में नहीं थी।


- घरेलू जीवन में संयुक्त परिवार चलन था।विधवा महिलाओं को समाज में एक आदरणीय स्थान प्राप्त था ।


- वर्ण व्यवस्था राजकुमारों की इच्छानुसार कार्यरत थी।


मौर्यों की  कला एवं स्‍थापत्‍य कला


मौर्य काल की कला एवं स्थापत्य कला के उदारहरण निम्नलिखित हैं


- शाही महल एवं पाटलीपुत्र शहर के अवशेष।


- बाराबार में अशोक स्तंभ एवं राजधानी।


- रॉक कट चैत्य गुफाएं एवं नागार्जुनी पहाडि़यां।


- मौर्यकाल की व्यक्तिगत कलाकृतियां एवं मिट्टी की मूर्मियां।


अशोक स्तंभो के शीर्ष पर पशुओं की कला कृतिया चित्रित थी। मुख्य पशु जिनकी कलाकृति अशोक स्तंभ के शीर्ष पर थी वे थे –घोड़े, सांड, हाथी एंव शेर।


कुछ यक्ष एवं याक्षियों के आंकडे भी मथूरा, पवाया एवं पटना से प्राप्त हुए है, जिसमें एक महिला को हाथ में कौडी पकड़े हुए दिखाया गया है।


इन सभी के बाद अब हम "पूर्व गुप्तकाल" के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे - शुंग वंश का इतिहास


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