महाशिवरात्रि 2021 : शिव पूजा करने से पहले इन बातों का ध्यान रखें - शिव पूजा विधि, महूर्त, पूजा समय, महत्व, मुख्य बातें | Maha Shivratri 2021, Puja vidhi, Mantra, Puja Samagri



महाशिवरात्रि 2021 : शिव पूजा करने से पहले इन बातों का ध्यान रखें - शिव पूजा विधि, महूर्त, पूजा समय, महत्व, मुख्य बातें | Maha Shivratri 2021, Puja vidhi, Mantra, Puja Samagri



|| शिव पूजा की मुख्य बातें || 


किसी भी देव पूजन में मनुष्य को स्नान आदि से शुद्ध तो होना ही पड़ता है, यदि सम्भव हो और कठनाई न हो तो पूजा करने वाले को सिले हुए वस्त्र पहने हुए नहीं होना चाहिए। आसान शुद्ध होना चाहिए। पूजा के समय मुख को उत्तर या पूर्व दिशा में करके बैठे। संकल्प करना चाहिए। शिव पूजन के लिए निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए। 


1.) भस्म, त्रिपुण्ड और रुद्रमाला ये शिव पूजन के लिए विशेष सामग्री है जो पूजन के समय शरीर पर होनी चाहिए। 


2.) भगवान शंकर की पूजा में तिल का प्रयोग नहीं होता और किसी भी चम्पा का पुष्प नहीं चढ़ाया जाता। 


3.) शिव पूजा में भी दूर्वा, तुलसी जल चढ़ाया जाता है। इसमें सन्देह नहीं करना चाहिए। 


4.) शकरजी को सबसे ज्यादा बिल्ब-पत्र पसंद है अतः इसे पूजा की सामग्री में जरूर शामिल करें। 


5.) भगवान शंकर के पूजन के समय करताल नहीं बजाना चाहिए। 


6.) शिव की परिक्रमा में सम्पूर्ण परिक्रमा नहीं की जाती है। 


7.) दो शंक, दो चक्रशिला (गोमती चक्र), दो शिवलिंग, दो गणेश मूर्ति, दो सूर्य प्रतिमा और तीन दुर्गा जी की प्रतिमा का पूजन कभी भी एक साथ न करें। इससे दुःखो की प्राप्ति होती है। 


8.) शिवजी को भांग का भोग अवश्य लगाना चाहिए। शिवलिंग को स्पर्श किया गया भोग नहीं लेना चाहिए। 



|| शिव पूजा विधि || 


साधक को चाहिए की शिवलिंग के दक्षिण उत्तरभिमुख कुशासन या ऊन के आसन पर बैठक सर्वप्रथम अपने ऊपर जल छिड़कर कर इस मंत्र का जाप करें -


शास्त्रों के अनुसार वर्णित ''स्नान मंत्र' है -


ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। 

यः स्मरेत्पुंडरीकाक्षं स बाह्याभ्यंतरः शुचिः॥


इस मंत्र का अर्थ है – कोई भी मनुष्य जो पवित्र हो, अपवित्र हो या किसी भी स्थिति को प्राप्त क्यों न हो, जो भगवान पुण्डरीकाक्ष का स्मरण करता है, वह बाहर-भीतर से पवित्र हो जाता है। भगवान पुण्डरीकाक्ष पवित्र करें।


हिन्दू धर्म में पुण्डरीकाक्ष भगवान विष्णु का उल्लेख करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। भगवान विष्णु ही जल के देवता हैं तथा यदि कोई उनका जाप करते हुए स्नान करता है तो विष्णु उसे सभी संसारिक पापों से मुक्त कर देते हैं।


भगवान विष्णु के साथ उस व्यक्ति को विष्णु की पत्नी मां लक्ष्मी का भी आशीर्वाद मिलता है। धन की देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने से व्यक्ति के जीवन में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आती।


इसके बाद अब भगवान शंकर की पूजा करें शिव चालीसा, शिव स्तुति पाठ और शिव जी की आरती बोले। 


अगर आप महा शिवरात्रि पर भगवान भोले नाथ की विशेष पूजा कर रहे हो तो इन बातों का ध्यान रखे -


शिव पूजा की सामग्री : बेलपत्र, भांग, धतूरा, गाय का शुद्ध कच्चा दूध, चंदन, रोली, केसर, भस्म, कपूर, दही, मौली यानी कलावा, अक्षत् (साबुत चावल), शहद, मिश्री, धूप, दीप, साबुत हल्दी, नागकेसर, पांच प्रकार के फल, गंगा जल, वस्त्र, जनेऊ, इत्र, कुमकुम, पुष्पमाला, शमी का पत्र, खस, लौंग, सुपारी, पान, रत्न-आभूषण, इलायची, फूल, आसन, पार्वती जी के श्रंगार की सामग्री, पूजा के बर्तन और दक्षिणा। इन सब चाजों का प्रबंध एक दिन पहले ही कर लें।


पूजा विधि : पूजा करने से पहले अपने माथे पर त्रिपुंड लगाएं। इसके लिए चंदन या विभूत तीन उंगलियों पर लगाकर माथे के बायीं तरफ से दायीं तरफ की तरफ त्रिपुंड लगाएं। शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। आप चाहे तो खाली जल से भी शिव का अभिषेक कर सकते हैं। अभिषेक करते हुए महामृत्युंजय मंत्र का जप करते रहना चाहिए। शिव को बेलपत्र, आक-धतूरे का फूल, चावल, भांग, इत्र जरूर चढ़ाएं। चंदन का तिलक लगाएं। धूप दीपक जलाएं। शिव के मंत्रों का जाप करें। शिव चालीसा पढ़ें। खीर और फलों का भोग लगाएं। शिव आरती उतारें। संभव हो तो रात्रि भर जागरण करें। घर के पास शिव मंदिर नहीं है तो आप घर पर ही मिट्टी के शिवलिंग बनाकर उनका पूजन कर सकते हैं।


पूजा मुहूर्त : महाशिवरात्रि पूजा के लिए निशीथ काल मुहूर्त सबसे शुभ माना गया है। वैसे भक्त रात्रि के चारों प्रहर में से किसी भी प्रहर में शिव पूजा कर सकते हैं।


इस वर्ष साल 2021 महाशिवरात्रि महूर्त, पूजा समय 


निशिता काल पूजा समय – 12:06 AM से 12:55 AM, मार्च 12 


अवधि – 00 घण्टे 48 मिनट 


शिवरात्रि पारण समय – 06:34 AM से 03:02 PM 


प्रथम प्रहर पूजा समय – 06:27 PM से 09:29 PM


द्वितीय प्रहर पूजा समय – 09:29 PM से 12:31 PM, मार्च 12 


तृतीय प्रहर पूजा समय – 12:31 PM से 03:32 PM, मार्च 12


चतुर्थ प्रहर पूजा समय – 03:32 PM से 06:34 PM, मार्च 12


मंत्र : ऊं त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।

उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ।।



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