अग्निमित्र शुंग का इतिहास और जीवन परिचय - Agnimitra Shunga Ka Itihas | Life History of Agnimitra Shunga in Hindi | Shunga Empire in Hindi



अग्निमित्र शुंग | शुंग वंश | मालविकाग्निमित्र - कालीदास - अग्निमित्र शुंग का इतिहास और जीवन परिचय - Agnimitra Shunga Ka Itihas | Life History of Agnimitra Shunga in Hindi | Shunga Empire in Hindi



- अग्निमित्र की शासनावधि 149 - 101 ईसा पूर्व बताई जाती है। 


- अग्निमित्र के पिता पुष्यमित्र शुंग थे। 


- अग्निमित्र शुंग वंश के दूसरे राजा थे। 


- अग्निमित्र पर बनाये गए नाटक को मालविकाग्निमित्रम् कहा जाता था। मालविकाग्निमित्रम् कालिदास द्वारा रचित संस्कृत नाटक है। यह पाँच अंकों का नाटक है जिसमे मालवदेश की राजकुमारी मालविका तथा विदिशा के राजा अग्निमित्र का प्रेम और उनके विवाह का वर्णन है।


- पुष्यमित्र के पश्चात् 149 ई. पू. में अग्निमित्र शुंग राजसिंहासन पर बैठा। पुष्यमित्र के राजत्वकाल में ही वह विदिशा का 'गोप्ता' बनाया गया था और वहाँ के शासन का सारा कार्य यहीं से देखता था। आधुनिक समय में विदिशा को भिलसा कहा जाता है।


- अग्निमित्र का आधार पुराण तथा कालीदास की सुप्रसिद्ध रचना 'मालविकाग्निमित्र' और उत्तरी पंचाल (रुहेलखंड) तथा उत्तर कौशल आदि से प्राप्त मुद्राएँ हैं। 'मालविकाग्निमित्र' से पता चलता है कि, विदर्भ की राजकुमारी 'मालविका' से अग्निमित्र ने विवाह किया था। यह उसकी तीसरी पत्नी थी। उसकी पहली दो पत्नियाँ 'धारिणी' और 'इरावती' थीं। इस नाटक से यवन शासकों के साथ एक युद्ध का भी पता चलता है, जिसका नायकत्व अग्निमित्र के पुत्र वसुमित्र ने किया था।


- पुराणों में अग्निमित्र का राज्यकाल आठ वर्ष दिया हुआ है।


- यह सम्राट साहित्यप्रेमी एवं कलाविलासी था।


- जिन मुद्राओं में अग्निमित्र का उल्लेख हुआ है, वे प्रारम्भ में केवल उत्तरी पंचाल में पाई गई थीं। जिससे रैप्सन और कनिंघम आदि विद्वानों ने यह निष्कर्ष निकाला था कि, वे मुद्राएँ शुंग कालीन किसी सामन्त नरेश की होंगी, परन्तु उत्तर कौशल में भी काफ़ी मात्रा में इन मुद्राओं की प्राप्ति ने यह सिद्ध कर दिया है कि, ये मुद्राएँ वस्तुत: अग्निमित्र की ही हैं।


अब हम अग्निमित्र शुंग के पुत्र वसुज्येष्ठ के बारे में जानेंगे - वसुज्येष्ठ का इतिहास



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