हिंद यवन सम्राज्य का इतिहास - Hind Yawan | Indo Greek History in Hindi | Videshi Samrajya



हिंद यवन सम्राज्य का इतिहास - Hind Yawan | Indo Greek History in Hindi - Indo Greek Coins


हिन्द यूनानी लोगों को इंडो-ग्रीक(Indo-Greek) तथा हिन्द-यवन(Hind-yawn) नामों से भी जाना जाता है। भारतीय ग्रंथों में इनके लिए यवन शब्द मिलता है। सिक्कों के आधार पर जानकारी मिलती है कि इंडो-ग्रीक कुल 30 शासक हुये, इनकी दो शाखायें थी –



 1.) डेमेट्रियस शाखा


2.) यूक्रेटाइड्स शाखा


1.) डेमेट्रियस शाखा 


- इस शाखा के शासक का नाम दमित्र था।


- बाद में मिनांडर आया। मिनांडर को एशिया का संरक्षक कहा गया है।


2.) यूक्रेटाइड्स शाखा


- इसका प्रथम शासक यूक्रेटाइट्स था, जो कि डेमेट्रियस का समकालीन था, इसने डेमट्रियस के बैक्ट्रियाई क्षेत्र को जीत लिया।


- यूक्रेटाइट्स ने तक्षशिला को राजधानी बनाया।


- इसके बाद हेलियाक्लिज व एण्टियालकीड्स शासक हुये। एण्टियालकीड्स ने शुंग शासक भागवद के दरबार में अपना राजदूत हेलियोडोरस को भेजा था। और डेमेट्रियस शाखा के विरुद्ध शुंग शासक से संधि कर ली थी।


Indo Greek Coins
 

- कुछ प्रसिद्ध हिंद - यवनी राजा थे: युथीडेमस देमेत्रियुस, युक्रेटाइड्स एवं मेनेन्डर।


- मेनेन्डर या मिनांडर (165-145 ई.पू.) ने सकाल (वर्तमान सियालकोट) पाकिस्तान में शासन किया।


- अंतलिखित एक हिंद – यवनी राजा था एवं हेलिओडोरस इसके दरबार से ही आया था।


- मिलिन्दपन्हो पुस्तक में मेनेन्डर (मिलिंद) द्वारा नागसेन से पूछे गए प्रश्नोन्तरो का विवरण है। बाद में मेनेन्डर ने बौद्ध धर्म अपना लिया था।


- हिंद – यवनी राजा ऐसे प्रथम राजा थे जिनके सिक्को पर अपने राजाओं की आकृति एवं उनके नाम अंकित थे।


- सोने के सिक्के जारी करने वाले ये पहले शासक थे


- गांधार कला विद्यालय हिंद - यवन साम्राज्य के समकाल ही विकसित की गई थी।


इसके बाद अब हम "शक वंश" के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे - शक वंश का इतिहास



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