कण्व वंश का इतिहास - Kanva Vansh Ka Itihas | History of Kanva Dynasty in Hindi | Kanva Empire



कण्व वंश का इतिहास - Kanva Vansh Ka Itihas | History of Kanva Dynasty in Hindi | Kanva Empire



- शुंग वंश के अन्तिम शासक देवभूति के मन्त्रि वसुदेव ने उसकी हत्या कर सत्ता प्राप्त की और कण्व वंश की स्थापना की।


- इसका समय काल 75 ई.पू. - 25 ई.पू. माना जाता है। 


- कण्व भारत के पश्चिमी भाग में स्थित थे।


- वासुदेव ने शुंग वंश के अंतिम राजा की हत्या कर सत्ता अपने हाथों में ले ली।


- कण्व वंश के बाद सातवाहन का शासनकाल प्रारंभ हुआ।


- वसुदेव पाटलिपुत्र के कण्व वंश का प्रवर्तक था।


- वैदिक धर्म एवं संस्कृति संरक्षण की जो परम्परा शुंगो ने प्रारम्भ की थी उसे कण्व वंश ने जारी रखा।


- इस वंश का अन्तिम सम्राट सुशमी कण्य अत्यन्त अयोग्य और दुर्बल था और मगध क्षेत्र संकुचित होने लगा।


- कण्व वंश का साम्राज्य वर्तमान बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश तक सीमित हो गया और अनेक प्रान्तों ने अपने को स्वतन्त्र घोषित कर दिया।  तत्पश्चात उसका पुत्र नारायण और अन्त में सुशमी जिसे सातवाहन वंश के प्रवर्तक सिमुक ने पदच्युत कर दिया था।


- कण्व वंश की जानकारी के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्रोत बाणभट्ट रचित हर्षचरित है।


- कण्व भी शुंगों के समान ही ब्राम्हण थे।


- वसुदेव ने 9 वर्षों तक शासन किया। उसके बाद कण्व वंश के तीन शासकों ने शासन किया।  


- भूमिमित्र (14 वर्ष), नारायण (12 वर्ष) तथा सुशर्मा (10 वर्ष)


- सुशर्मा की मृत्यु के साथ ही कण्व राजवंश तथा शासन की समाप्ति हो गई। वायुपुराण से ज्ञात होता है कि सुशर्मा की हत्या उसके आंध्रजातीत भृत्य सिमुक ने कर दी। इस प्रकार कण्वों का अंत हो गया।


इसके बाद अब हम "विदेशी सम्राज्य" के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे - विदेशी सम्राज्य का इतिहास



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