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पार्थियन साम्राज्‍य या पहलवी साम्राज्य का इतिहास - Parthian Dynasty | Parthian Samrajya History in Hindi | Videshi Samrajya



पार्थियन साम्राज्‍य या पहलवी साम्राज्य का इतिहास - Parthian Dynasty | Parthian Samrajya History in Hindi | Videshi Samrajya



- शकों के बाद पार्थियन लोग भारत में आए अनेक भारतीय संस्कृत के मूल पाठों में एक साथ इन दोनों कबीलों के लिए “शक-पहलव” संज्ञा का प्रयोग किया गया है. इस तरह इंडो-पार्थियनों को ‘पहलव (पह्लव)’ कहा गया है. इनके शासन को सुरेन साम्राज्य (Suren Kingdom) के नाम से भी जाना जाता है


- पार्थियन को पहलव भी कहा जाता था। ये ईरान के लोग थे। इन्होने अपना शासन पेशावर से किया।


- इस साम्राज्य का प्रथम शासक वोनोन्स था, जिसने राजाओं के राजा का शीषर्क धारण किया।


- मिथ्रीडेट्स प्रथम पार्थियन सम्राट था, जिसने भारत के पश्चिमोत्तर प्रदेश पर आक्रमण किया था. उसने बेक्ट्रियन सेना (उस समय इस क्षेत्र पर बेक्ट्रियन शासक डिमेट्रियस का शासन था) को परास्त कर सिन्धु और झेलम के बीच के प्रदेश को जीत लिया। 


- गॉन्डोफर्नीज (19-45 ईस्वी) सबसे शक्तिशाली पार्थियन राजा था।


- गॉन्डोफर्नीज के शासन काल में सेंट थॉमस (एक ईसाई धर्म सुधारक) ने इसके राज्य का भ्रमण किया था।


गॉन्डोफर्नीज की मृत्यु के बाद पार्थियन राज्य की शक्ति घटती ही रही और धीरे-धीरे इस राज्य का पतन हो गया. कुषाण जाति ने इस जनगण के साम्राज्य का अंत किया; वह तथ्य दो अभिलेखों से प्रमाणित होती है। 


- हजारा जिले  के पंजतर अभिलेख (65 ई. के) में “महाराज कुषाण का राज्य” लिखा है तथा तक्षशिला अभिलेख (79 ई. के) में शासक के लिए “महाराज राजाधिराज देवपुत्र कुषाण” लिखा है। 


इसके बाद अब हम "कुषाण वंश या युकीज़" के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे - कुषाण वंश या का इतिहास


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