अब घर पर भी मास्क पहनना जरूरी : जून में हर दिन 3000 लोगों की हो सकती है मौत, लांसेट की रिपोर्ट का दावा | Corona News in Hindi Today



लांसेट की रिपोर्ट में कोरोना की दूसरी लहर के बारे में विशेष जानकारी दी गई है। देश में बढ़ती कोरोना (Coronavirus) की रफ्तार के बीच एक रिपोर्ट (Report) ने चिंता और बढ़ा दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जून तक पहुंचते-पहुंचते हालात और भी ज्यादा खराब हो जाएंगे. कोरोना से हर दिन होने वाली मौतों का आंकड़ा ढाई हजार के पार निकल सकता है. लांसेंट जर्नल (Lancet Journal) में प्रकाशित हुए एक अध्ययन में भारत को लेकर यह दावा किया गया है। यहां गौर करने वाली बात ये है कि शोध से जुड़े वैज्ञानिक भारत सरकार की कोरोना टास्क फोर्स के सदस्य भी हैं। 


इस रिपोट में बताया गया है की जून के पहले सप्ताह तक कोरोना से मौत का आकड़ा भारत में 2320 तक पहुंच सकता है। 



अध्ययन के मुताबिक, पहली लहर के दौरान दस हजार प्रतिदिन नए केसों से 80 हजार प्रतिदिन नए केस होने में 83 दिन का वक्त लगा था, लेकिन इस बार फरवरी से अप्रैल की शुरूआत तक प्रतिदन 80 हजार मामले होने में मात्र 40 दिन लगे. रिपोर्ट में बताया गया है कि इस बार कोरोना के बिना लक्षण वाले मरीज ज्यादा तादाद में मिल रहे हैं, जिससे तुलनात्मक रूप से कम मौतें हो रही हैं. जबकि पहली लहर में लक्षण वाले मरीजों की तादाद बहुत अधिक थी, जिससे ज्यादा मौतें हो रही थीं। 


विशेषज्ञों ने कहा है कि सार्स-सीओवी-2 हवा में भी पाया गया है. लैब में किए गए एक्सपेरिमेंट्स में वायरस तीन घंटे तक हवा में रहा है. विशेषज्ञों ने उस दावे को खारिज कर दिया है कि संक्रमण हवा में कम फैला है. इसके लिए खसरा और टीबी की दलील दी गई थी, जो मुख्य रूप से वायु जनित रोग थे, लेकिन ये कमरे की हवा में नहीं फैले।


विशेषज्ञों के इन दावों से साबित होता है कि दुनियाभर में वायरस से बचाव के लिए अपनाई जा रही रणनीति में बदलाव करने की जरूरत है. लोगों के लिए ना केवल बाहर बल्कि घर के अंदर या यहां तक कि हर समय मास्क पहनना जरूरी है. विशेषज्ञों ने ये भी कहा है कि अगर संक्रमित शख्स सांस छोड़ता है, चिल्लाता है, गाना गाता है, छींकता है या फिर खांसता है, तो हवा में सांस लेने वाला शख्स भी संक्रमित हो सकता है. इससे पता चलता है कि दुनिया में कोरोना वयरस महामारी से बचाव के लिए जो तरीका अपनाया जा रहा है, उसमें बदलाव की जरूरत है। 



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