दक्षिण भारत का प्राचीन इतिहास - Dakshin Bharat Ka Itihas in Hindi | History of South India



दक्षिण भारत का इतिहास बहुत ही प्राचीन इतिहास है। भारत के दक्षिण भाग में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना के साथ-साथ तीन केंद्र शासित प्रदेशों लक्षद्वीप, अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह और पुडुचेरी का क्षेत्रफल है। 


भारत के दक्षिणी भाग को दक्षिण भारत भी कहते हैं। अपनी संस्कृति, इतिहास तथा प्रजातीय मूल की भिन्नता के कारण यह पहचान बना चुका है।। दक्षिण भारत में लोकसभा की 130 सीटें हैं।



दक्षिण भारत के इतिहास की खोज "कार्बन डेटिंग पद्धति" के द्वारा की गई है जिससे हमें पता चलता है की इसका इतिहास ईसा से करीब 8000 साल पुराना है। इसका प्राचीनतम साक्ष्य हल्लुर(उल्लुरू) से प्राप्त वस्तुएं मानी गयी हैं। दक्षिण भारत में लौह युग की अधिकांश जानकारी महापाषाण युगीन कब्रों की खुदायी से मिलती है। जब मृतकों को आबादी से दूर कब्रिस्तानों में पत्थरों के बीच दफनाया जाता था।


मालाबार और तमिल लोग संगम प्राचीन काल में यूनान और रोम से व्यापार किया करते थे। वे रोम, यूनान, चीन, अरब, यहूदी आदि लोगों के सम्पर्क में थे। प्राचीन दक्षिण भारत में विभिन्न समयों तथा क्षेत्रों में विभिन्न शासकों तथा राजवंशों ने राज किया।


यहाँ पर सातवाहन, चेर, चोल, पांड्य, चालुक्य, पल्लव, होयसल, राष्ट्रकूट आदि कुछ राजवंश हुए थे। जिसके बारे में हम आगे विस्तार से चर्चा करेंगे। 


 सन् 1323 में यहाँ तुर्कों द्वारा मुस्लिम बहमनी सल्तनत की स्थापना हुई। इसके कुछ सालों बाद हिन्दू विजयनगर साम्राज्य की स्थापना हुई। इन दोनों में सत्ता के लिए संघर्ष होता रहा। सन् 1565 में विजयनगर का पतन हो गया। बहमनी सल्तनत के पतन के कारण 5 नए साम्राज्य बने - बीजापुर तथा गोलकोण्डा सबसे शक्तिशाली थे। औरंगजेब ने सत्रहवीं सदी के अन्त में दक्कन में अपना प्रभुत्व जमा लिया पर इसी समय शिवाजी के नेतृत्व में मराठों का उदय हो रहा था। मराठों का शासन अट्ठारहवीं सदी के उत्तरार्ध तक रहा जिसके बाद मैसूर तथा अन्य स्थानीय शासकों का उदय हुआ। पर इसके 50 वर्षों के भीतर पूरे दक्षिण भारत पर अंग्रेज़ों का अधिकार हो गया। 1947 में स्वराज्य आया।


दक्षिण भारत के इतिहास को विस्तार से जानने और समझने के लिए हम सबसे पहले संगम राजवंश के बारे में पढ़ेंगे -


+ संगम राजवंश (चोल राजवंश, पांडियन राजवंश, चेरा राजवंश)


+ बादामी के चालुक्य (6 ईस्वी शताब्दी - 9 ईस्वी शताब्दी)


+ कांचीपुरम के पल्ल्व (6वी शताब्दी ईस्वी - 9 ईस्वी शताब्दी)


+ पल्ल्वों के मंदिर 



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