रक्षा सूत्र : हाथ में लाल मौली क्यों बांधते है ? कलावा बांधने के फायदे - Hath Me Moli Kyo Bandhte Hai



रक्षा सूत्र : हाथ में लाल मौली क्यों बांधते है ? कलावा बांधने के फायदे - Hath Me Moli Kyo Bandhte Hai 


दोस्तों अक्सर आपने देखा होगा की हिन्दू धर्म में हर विशेष कार्य पर पूजा, विवाह, यज्ञ आदि समय घर के सभी सदस्य हाथ पर लाल मौली बांधते है। इसे कलावा भी कहा जाता है। हमारे धर्म में सभी शुभ कार्यों में हाथ की कलाई पर लाल धागा यानि मौली बांधने की परंपरा है। 


यह परम्परा हिन्दू धर्म में लाखो वर्षो से चली आ रही है। जिस प्रकार पूजा आदि में तिलक लगाने का महत्व है ठीक उसी प्रकार हाथ पर मौली बांधने का भी विशेष महत्व है। आइए जानते है आखिर क्यों हम सभी मौली बांधते है। 


मौली बांधने के पीछे की कहानी 


दोस्तों मौली को रक्षा सूत्र भी कहा जाता है क्योकि सबसे पहले यह रक्षा सूत्र के तौर पर ही बांधा गया था। ऐसा माना जाता है कि असुरों के दानवीर राजा बलि की अमरता के लिए भगवान वामन ने उनकी कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधा था। 


बताया जाता है कि इंद्र जब वृत्रासुर से युद्ध करने जा रहे थे तब इंद्राणी शची ने इंद्र की दाहिनी भुजा पर रक्षा-कवच के रूप में कलावा बांध दिया था और इंद्र इस युद्ध में विजयी हुए। उसके बाद से ये रक्षा सूत्र बांधा जाता है। वहीं इसके अनुष्ठान की बाधांए दूर हो जाती है। शास्त्रों का ऐसा मत है कि कलावा बांधने से त्रिदेव, ब्रह्मा, विष्णु व महेश तथा तीनों देवियों लक्ष्मी, पार्वती व सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है। ब्रह्मा की कृपा से कीर्ति विष्णु की अनुकंपा से रक्षा बल मिलता है और शिव दुर्गुणों का विनाश करते हैं।


इसके पीछे की एक कहानी और भी है। 


दरसल द्वापर युग में जब भगवान श्री कृष्ण के हाथों पर अचानक चोट लगी और द्रोपती ने अपनी साडी का टुकड़ा भगवान श्री कृष्ण के हाथो पर बांधा उन्हें अपने सखा से भाई बना लिया, और इस रक्षा सूत्र का कर्ज भी आगे चलकर श्री कृष्ण ने उतारा और चीर हरण के समय अपनी बहिन की उन्होंने रक्षा भी की। इसे रक्षाबंधन का भी प्रतीक माना जाता है। 


मौली का अर्थ


'मौली' का शाब्दिक अर्थ है 'सबसे ऊपर', मौली का तात्पर्य सिर से भी है। मौली को कलाई में बांधने के कारण इसे कलावा भी कहते हैं। 


वैदिक नाम 


मौली का वैदिक नाम उप मणिबंध भी है। 


मौली बांधने के फायदे 


कहा जाता है कि हाथ में मौली धागा बांधने से मनुष्य बुरी दृष्टि से बचा रहता है क्योंकि भगवान उसकी रक्षा करते हैं !  हाथों में मौली धागा बांधने से मनुष्य के स्वास्थ्य में बरकत होती है। इस धागे को कलाई पर बांधने से शरीर में वात,पित्त तथा कफ के दोष में सामंजस्य बैठता है। ब्लड प्रेशर, हार्टअटैक, डायबिटीज और लकवा जैसे रोगों से बचाव के लिए मौली बांधना हितकर बताया गया है। 


इसे कब और कैसे धारण करें ?


पुरुषों और अविवाहित कन्याओं के दाएं हाथ में और विवाहित महिलाओं के बाएं हाथ में रक्षा सूत्र बांधी जाती है। जिस हाथ में कलावा या मौली बांधें उसकी मुट्ठी बंधी हो एवं दूसरा हाथ सिर पर हो। इस पुण्य कार्य के लिए व्रतशील बनकर उत्तरदायित्व स्वीकार करने का भाव रखा जाए। पूजा करते समय नवीन वस्त्रों के न धारण किए होने पर मौली हाथ में धारण अवश्य करना चाहिए। धर्म के प्रति आस्था रखें। मंगलवार या शनिवार को पुरानी मौली उतारकर नई मोली धारण करें, संकटों के समय भी रक्षासूत्र हमारी रक्षा करते हैं।


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