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गौतमी पुत्र शातकर्णी का इतिहास एवं जीवन परिचय - सातवाहन वंश (150 ई.पू. - 230 ई.पू.) | Satavahana Dynasty : Gautamiputra Satakarni History in Hindi



गौतमी पुत्र शातकर्णी का इतिहास एवं जीवन परिचय - सातवाहन वंश (150 ई.पू. - 230 ई.पू.) | Satavahana Dynasty : Gautamiputra Satakarni History in Hindi



परिचय

- दक्षिण एवं मध्य भारत में आंध्र प्रदेश एवं महाराष्ट्र को सम्मिलित करते हुए मौर्य राजवंश का स्थान सातवाहन राजवंश ने ले लिया था। सातवाहनों को दक्षिण में आंध्र भी कहा जाता था।


- इनकी राजधानी पैथन या प्रतिष्ठान थी।


- आंध्र अति प्राचीन लोग थे जिनका वर्णन ऐतरेय ब्राहम्ण में किया गया हैं।


- सिमुक इस वंश का संस्थापक था। उसके बाद उसका भाई कृष्ण राजगद्दी पर बैठा।


- गौतमी पुत्र शातकर्णी–I सर्वाधिक शक्तिशाली सातवाहन शासक था। इनकी उपलब्धियों का विवरण "नानाघाट" अभिलेख में दिया गया है। इसे दक्षिणपंथ का ईश्वर भी कहा जाता था।


- इनका नाम सांची स्तुप के द्वार पर भी अंकित है।


- शातकर्णी–I ने दो अश्वमेध यज्ञ करवाये थे।


- हाल एक महत्वपूर्ण शासक था, जिसने महाराष्ट्री प्राकृत में गाथासप्तशती नामक ग्रंथ की रचना की थी।


- गौतमीपुत्र सातकर्णि इसके बाद प्रमुख सातवाहन राजा था। उसे एक ब्राहम्ण भी कहा जाता था। इसने शक, यवन एवं पल्लवों के शासन को नष्ट किया था। शातकर्णी की उपलब्धियों का वर्णन इनकी माता गौतमी बालाश्री द्वारा नासिक अभिलेख में की गई है। मातृ नाम धारण करने वाला यह पहला शासक था।


- श्रीयज्ञ सातकर्णि व्यापार एवं नौसंचालन का समर्थक था एवं यह सातवाहन कुल का अंतिम महान शासक था। उसके सिक्कों पर जहाजों की आकृति अंकित थी।


- शक शासक रूद्रदामन –I ने सातवाहनों को दो बार पराजित किया था।


- अभिरास के महाराष्ट्र पर अधिकार एवं इक्शवकु व पल्लवों के पूर्वी प्रान्तों पर अधिकार के बाद सातवाहन साम्राज्य लडखड़ा गया था।


- सातवाहन शासकों ने सीसा धातु के सर्वाधिक सिक्के जारी किये।


गौतमी पुत्र शातकर्णी का इतिहास एवं जीवन परिचय 


- सातवाहन वंश ने गौतमी पुत्र श्री शातकर्णी के नेतृत्व में अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को पुर्नस्थापित कर लिया।


-  गौतमी पुत्र श्री शातकर्णी सातवाहन ईंश्वर के परम् भक्त थे। उन्होंने अपने शासन काल में न केवल अपने राज्य का विस्तार किया बल्कि दीन - दुखियों की सेवा भी की थी। इसी कारण उस समय के लोग उन्हें ईश्वर का अवतार मानने लगे थे। 


- ब्राह्मण वंश में जन्में शातकर्णी बहुत ही शक्तिशाली राजा थे जिनका सामना करने की साहस उस समय किसी में नहीं थी। 


- गौतमी पुत्र के समय तथा उसकी विजयों के बारें में हमें उसकी माता गौतमी बालश्री के नासिक शिलालेखों से सम्पूर्ण जानकारी मिलती है।


- उसका वर्णन शक, यवन तथा पहलाव शासको के विनाश कर्ता के रूप में हुआ है। उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि क्षहरात वंश के शक शासक नहपान तथा उसके वंशजों की उसके हाथों हुई पराजय थी।


- उसने 'त्रि-समुंद्र-तोय-पीत-वाहन' उपाधि धारण की जिससे यह पता चलता है कि उसका प्रभाव पूर्वी, पश्चिमी तथा दक्षिणी सागर अर्थात बंगाल की खाड़ी, अरब सागर एवं हिन्द महासागर तक था। 


सातवाहनों की प्रशासन व्‍यवस्‍था


- जिले को अहर कहा जाता था


- इनके अधिकारियों को अमात्य एवं महामात्य कहा जाता था।


- ग्रामीण क्षेत्रों का प्रशासन गौमिक नामक अधिकारी के हाथों मे था।


- कटक एवं स्कंधवर सैनिक छावनीयों के लिए प्रयुक्त किया जाता था।


सातवाहनों के धर्म


- ये लोग ब्राहम्णवाद के समर्थक थे एवं वैश्ण्व ईश्वर की पूजा करते थे।


- प्रसिद्ध चैत्य की कार्ला गुफाएँ सातवाहन साम्राज्य के काल के दौरान ही निर्मित की गई थी।


- इन्होने अमरावती स्तूप का निर्माण करवाया जो बुद्ध के जीवन की विभिन्न घटनाओं से सम्बंधित कलाकृतियों से युक्त है।


- ये ब्रहमी लिपि में लिखी प्राकृत भाषा का उपयोग करते थे।


इसके बाद अब हम "बादामी के चालुक्य वंश" के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे - बादामी के चालुक्य वंश


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