बादामी के चालुक्य वंश का इतिहास (6 ईसवी शताब्‍दी-9 ईसवी शताब्‍दी) Badami Ke Chalukya Vansh Ka Itihas - Chalukya Dynasty in Hindi



बादामी के चालुक्य वंश का इतिहास (6 ईसवी शताब्‍दी-9 ईसवी शताब्‍दी) Badami Ke Chalukya Vansh Ka Itihas - Chalukya Dynasty in Hindi


चालुक्य प्राचीन भारत का एक प्रसिद्ध राजवंश है। इनकी राजधानी बादामी (वातापि) थी। अपने महत्तम विस्तार के समय (सातवीं सदी) यह वर्तमान समय के संपूर्ण कर्नाटक, पश्चिमी महाराष्ट्र, दक्षिणी मध्य प्रदेश, तटीय दक्षिणी गुजरात तथा पश्चिमी आंध्र प्रदेश में फैला हुआ था।



- "पुलकैशिन –I" पहला चालुक्य शासक था।


- बादामी के चालुक्य वंश का सर्वाधिक शक्तिशाली राजा पुलकेशिन –II था जो कीर्तिवर्मन का पुत्र था।


- यह हर्ष के समकालीन था।


- हर्ष ने पुलकेशिन –II पर आक्रमण किया परन्तु उसे पराज्य का सामना करना पड़ा। इस युद्ध का वर्णन पुलकेशिन –II के राजदरबारी कवि रविकृति द्वारा लिखित "ऐहोल अभिलेख" में किया गया है।


- पुलकेशिन –II ने पल्लव राजा महेन्द्रवर्मन –I पर आक्रमण किया एवं उसके क्षेत्र का उत्तरी भाग अपने अधिकार में ले लिया।


- पुलकेशिन –II ने महेन्द्रवर्मन –I के पुत्र नरसिम्हावर्मन –I पर भी आक्रमण किया परन्तु नरसिम्हावर्मन –I ने उसे युद्ध में मौत के घाट उतारते हुए वातापीकोंडा पर अधिकार कर लिया।


- विक्रमादित्य –II के शासनकाल तक चालुक्य –पल्लव संघर्ष लगभग समाप्त हो गया था।


- कीर्तिवर्मन –II का वध दंतिदुर्ग द्वारा किया गया एवं जिसे राष्ट्रकूट वंश का सस्थापक माना जाता है।


- चालुक्य के शासनकाल के दौरान स्थापत्य कला वेसर शैली का विकास हो चुका था, जिसे नागर एवं द्रविड शैली का मिश्रण माना जाता है।


- ऐहोल को चालुक्यों की सांस्कृतिक राजधानी कहा जाता था।


- ऐहोल में स्थित लडखान मंदिर स्थापत्य कला की वेसर शैली का एक उदाहरण है।


- बीजापुर तहसील में बदामी के निकट पट्टकल में वीरूपक्ष मंदिर स्थित है।


इसके बाद अब हम "कांचीपुरम के पल्ल्वो" के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे - कांचीपुरम के पल्ल्व



No comments:

Post a Comment