कांचीपुरम के पल्लवों का इतिहास (6वी शताब्‍दी ईस्‍वी -9 शताब्‍दी ईसवी) Kanchipuram Ke Pallvo Ka Itihas - Pallava Dynasty in Hindi | पल्लव राजवंश



कांचीपुरम के पल्लवों का इतिहास (6वी शताब्‍दी ईस्‍वी -9 शताब्‍दी ईसवी) Kanchipuram Ke Pallvo Ka Itihas - Pallava Dynasty in Hindi | पल्लव राजवंश


पल्लव संभवतः एक स्थानीय जनजाति थे पल्लवों के सबसे पहले अभिलेख प्राकृत में शिलालेख और उसके बाद संस्कृत और तमिल दोनों में शिलालेख हैं। प्राकृत शिलालेख तब बनाए गए थे जब पल्लव कांचीपुरम (200 - 575 ईस्वी) में एक स्थानीय राजवंश थे।



पल्लव राजवंश प्राचीन दक्षिण भारत का एक राजवंश था। चौथी शताब्दी में इसने कांचीपुरम में राज्य स्थापित किया और लगभग 600 वर्ष तमिल और तेलुगु क्षेत्र में राज्य किया। 


बोधिधर्म इसी राजवंश का था जिसने ध्यान योग को चीन में फैलाया। यह राजा अपने आप को क्षत्रिय मानते थे।


- पल्लव वंश का संस्थापक "सिम्हाविष्णु" को माना जाता है।


- पल्लव वंश चालुक्य साम्राज्य के समकालीन थे।


- पल्लवों ने संस्कृत भाषा को संरक्षण दिया एवं उन्होने सम्पूर्ण दक्षिण पर शासन किया।


- महेन्द्रवर्मन–I ने संस्कृत भाषा में "मठविलास प्रसन्न" नामक एक नाटक लिखा। यह एक शराबी की कहानी है।


- पुलकेशिन–II ने महेन्द्रवर्मन –I को पराजित कर दिया एवं उसके जिस उत्तरी भाग पर वह शासन कर रहा था उसे उसने वापस अपने अधिकार में ले लिया।


- नरसिम्हावर्मन –II मंदिरों के निर्माण के लिए विख्यात था।


- नरसिम्हावर्मन –II ने राजसिम्हा की उपाधि धारण कर ली।


- संस्कृत भाषा में रचित दशकुमार चरित नामक ग्रंथ नामक ग्रंथ नरसिम्हावर्मन –I के राजदरबारी कवि दण्डी द्वारा लिखी गई है।


- नन्दीवर्मन –II ने चालुक्यों के साथ संघर्ष का अंत वैवाहिक सम्बंधो द्वारा किया।


- अंतिम पल्लव शासक अपराजित था जिसे आदित्य चोला ने पराजित किया था।


पल्‍लवों के मंदिर


क्र

मंदिर

 स्थिति

 शासक

 1

रथ मंदिर

 महाबलीपुरम्

नरसिम्हावर्मन -I

 2

शोर मंदिर

 महाबलीपुरम्

नरसिम्हावर्मन -II

 3

कैलाशनाथ मंदिर

 कांचीपुरम

नरसिम्हावर्मन -II

 4

वैकुण्ठ पीरूमल मंदिर

कांचीपुरम

 नंदीवर्मन -II


इसके बाद अब हम "गुप्त सम्राज्य" के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे - गुप्त वंश का इतिहास 



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