बारिश के दिनों में बिजली क्यों गिरती है ? क्या है बिजली चमकने का कारण और इसके बचाव - Lightning Strikes | Bijli Kyu Kadakti hai | Bijli Girne Ka Karn Kya hai



दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम जानेगे की आखिर बारिश के दिनों में आसमान में बिजली क्यों चमकती है। साथ ही यह आसमानी बिजली आखिर जमीन पर क्यों गिरती है। 


यह तो आप सभी जानते ही हो की आखिरकार आसमान में बिजली बादलों के कारण ही बनती है। और इसे रात्रि के समय तेज चमकता हुआ साफ़ देखा भी जा सकता है। बिजली बारिश के दिनों में आकाश में चमकने वाली तेज रौशनी होती है। जो आकाश में कई बार तेज आवाज के साथ हमें सुनाई भी देती है और दिखाई भी देती है। 



हम कई बार न्यूज में भी देख चुके है और अख़बार में भी इस बारे में पढ़ चुके है की उमुख जगह बिजली गिरने के कारण इतने लोगो की मौत हो गयी है। आसमान की बिजली हमेशा से ही हमे अपनी और आकर्षित करती रही है और हर कोई यह जानना चाहता है की आखिर यह कैसे चमकती है और क्यों धरती पर मौजूद ज्यादा तर चीजों पर यह अचानक गिर जाती है। तो चलिए दस्तो जानते है इसके पीछे का पूरा विज्ञान -


आसमान में धनात्मक और ऋणात्मक आवेशित बादल उमड़ते-घुमड़ते हुए जब एक-दूसरे के पास आते हैं और एक दूसरे से जब टकराते है इससे (घर्षण) से उच्च शक्ति की बिजली उत्पन्न होती है। इससे दोनों तरह के बादलों के बीच हवा में विद्युत-प्रवाह गतिमान हो जाता है। विद्युत-धारा प्रवाहित होने से रोशनी की तेज चमक पैदा होती है। जिसे हम सभी बिजली बोलते है। 


मौसम विज्ञानी के अनुसार बादलों से गिरने वाली बिजली की ऊर्जा एक अरब वोल्ट तक हो सकती है। सामान्य रूप से इसका तापमान सूर्य की ऊपरी सतह से भी अधिक होता है। इसकी क्षमता 300 किलोवाट यानी 12.5 करोड़ वाट से अधिक होती है।  


इन दिनों इतनी बिजली क्यों गिर रही है ?


दोस्तों हाल ही में समाचारो में आप सभी ने सुना होगा की राजस्थान, उत्तरप्रदेश, गुजरात में बिजली गिरने से अभी तक सेकड़ो लोगो की मौत हो चुकी है तो आखिर सभी के मन में यह सवाल उठना भी लाजमी है की आखिर अब आकाशीय बिजली इतनी क्यों गिर रही है तो इसका कारण है। बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम की वजह से नम हवा दो से तीन किलोमीटर की ऊंचाई तक जा रही है, यह नम हवा जब ऊपर उठती है तो बादल बनते हैं और झमाझम बारिश होती है। 


इस समय उत्तर भारत में तीन किलोमीटर की ऊंचाई के ऊपर पछुआ हवा का भी जोर है। पांच किलोमीटर की ऊंचाई तक बह रही यह पछुआ हवा सूखी है। यानी इसमें नमी काफी कम है। इससे नम और शुष्क हवा के बीच उत्तर प्रदेश के ऊपर टकराव से बारिश हुई। इस टकराव से बादलों में जबरदस्त घर्षण से बिजली पैदा हुई, जिससे रविवार को उत्तर प्रदेश में कई जगह जन और पशु हानि हुई। इसी के साथ उत्तर प्रदेश में कहर बनकर टूटी आकाशीय बिजली, कई जिलों में 41 लोगों की मौत व कई झुलसे। 


इसके आलावा जयपुर के आमरे फोर्ट पर भी इन दिनों बिजली गिरी जिसके कारण वहाँ घूमने आए सैलानियों की मौके पर ही मौत हो गई। यह वाकई में बहुत ही दुःखद खबर थी। 


बिजली चमकना एक प्राकृतिक क्रिया है। जब ज्‍यादा गर्मी और नमी मिलती है तो बिजली वाले खास तरह के बादल 'थंडर क्‍लाउड' बन जाते हैं और तूफान का रूप लेते हैं।


सतह से करीब 8-10 किलोमीटर ऊंचे इन बादलों के निचले हिस्‍से में निगेटिव और ऊपरी हिस्‍से में पॉजिटिव चार्ज ज्‍यादा रहता है। दोनों के बीच अंतर कम होने पर तेजी से होने वाला डिस्‍चार्ज बिजली कड़कने के रूप में सामने आता है।


बादलों के बीच बिजली कड़कना हमें नजर आता है और उससे नुकसान नहीं है। नुकसान तब होता है जब बादलों से बिजली जमीन में आती है।


एक साथ भारी मात्रा में ऊर्जा धरती के एक छोटे से हिस्‍से पर गिरती है। एक बार बिजली गिरने से कई करोड़ वॉट ऊर्जा पैदा होती है। इससे आसपास के तापमान में 10,000 डिग्री से लेकर 30,000 डिग्री तक का इजाफा हो सकता है।


पेड़ पर बिजली क्यों गिरती है ?


दोस्तों बारिश के दिनों में साथ में जब आकाश में तेज बिजलिया चमक रही हो उन दिनों हमे पेड़ से दूर ही रहना चाहिए। क्योकि इन दिनों सबसे ज्यादा बिजली पेड़ पर गिरती है। 



पेड़ के नीचे शरण लेने वालों के ऊपर बिजली गिरने का ज्‍यादा खतरा रहता है। इस घटना को 'साइड फ्लैश' कहते हैं। ऐसा तब होता है जब बिजली पीड़‍ित के नजदीक की किसी लंबी चीज पर गिरती है और करंट का एक हिस्‍सा लंबी चीज से होते हुए पीड़‍ित तक पहुंचता है। भारत में एक-चौथाई मौतें पेड़ के नीचे या पास खड़े लोगों की हुईं।


1800 से 2000 बार बादलों की गर्जना होती है हर सेकंड में


22400 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धरती पर गिरती है बिजली


44,000 बार बिजली चमकती है हर रोज आसमान में


0.002 सेकंड लगता है बिजली को आसमान से धरती तक पहुंचने में


20,000 से ज्यादा मौतें होती हैं हर साल पूरी दुनिया में बिजली से


जैसा की हमको मालूम है की एक ही तरह के चार्ज एक दूसरे से दूर जाते हैं और बिपरीत चार्ज एक दूसरे के समीप आते हैं , नेगेटिव वाले चार्ज बादल के नीचे फैलना शुरू कर देते हैं और नीचे से पॉजिटिव चार्ज जमीन के ऊपर फैलना शुरू कर देते हैं।


तो जो चीज ऊंचाई पर होती है जैसे की बिल्डिंग या पेड़ तो उस पर पॉजिटिव चार्ज रहते हैं और वह बादल के नजदीक भी होता है।


जब पॉजिटिव और नेगेटिव चार्ज एक दूसरे से मिलते हैं तो नेगेटिव चार्ज डिस्चार्ज होकर धरती में आते हैं जिसको आप आकाशीय बिजली के नाम से जानते हैं।


जो चीज़ सब से अधिक उचाई पर होती है उसमे डिस्चार्ज होने की सबसे ज्यादा वजह होती है।



जैसे की यह टावर जिसमे पॉजिटिव चार्ज है और बादल में नेगेटिव।


किसी बैटरी की तरह , इन बादलों में “प्लस” और “माइनस” होता है यानी ये postively तथा negatively चार्ज हो जाते हैं। पॉजिटिव(+ve) चार्ज बादल के ऊपर तथा निगेटिव(-ve) चार्ज बदल के नीचे हितें हैं। जब निचले हिस्से में पर्याप्त मात्रा में चार्ज जमा हो जाते हैं तब लाइटनिंग यानी आकाशीय बिजली धरती पे गिरती है । ये निगेटिव (-ve) चार्ज पॉजिटिव(+ve) चार्ज से आकर्षित होती है जो कि आमतौर पर खुले मैदानों तथा ऊँची इमारतों तथा पेड़ों पर होती जिस कारण से उन पर बिजली गिरने की संभावना ज्यादा होती है यही कारण है कि जब बिजली गिरती है तो खुले मैदानों तथा पेड़ों से दूर रहने के लिए कहा जाता है।


आखिर आसमान में क्यों चमकती है बिजली ?


बादलों में नमी होती है। यह नमी बादलों में जल के बहुत बारीक कणों के रूप में होती है। हवा और जलकणों के बीच घर्षण होता है। घर्षण से बिजली पैदा होती है और जलकण आवेशित हो जाते हैं यानि चार्ज हो जाते हैं। बादलों के कुछ समूह धनात्मक तो कुछ ऋणात्मक आवेशित होते हैं। धनात्मक और ऋणात्मक आवेशित बादल जब एक-दूसरे के समीप आते हैं तो टकराने से अति उच्च शक्ति की बिजली उत्पन्न होती है। इससे दोनों तरह के बादलों के बीच हवा में विद्युत-प्रवाह गतिमान हो जाता है। विद्युत-धारा के प्रवाहित होने से रोशनी की तेज चमक पैदा होती है।


बिजली क्यों गरजती है ?


जब बिजली आसमान से तेजी से धरती पर किसी चीज पर गिरती है तो तेज कम्पन के साथ आवाज भी होती है। इसे समान्य भाषा में बिजली गरजना कहते है। जो तेज आवाज के साथ हमे सुनाई देती है। 


बिजली किस चीज पर गिरती है ?


ज्यादा तर यह बिजली किसी ऊँची जगह पर गिरती है। कई बार ऐसी जगह भी यह बिजली गिर जाती है जहाँ काँसे का अर्थ ज्यादा हो या जहाँ काँसे की कोई धातु रखी हो। इसके आलावा यह पेड़, सांप, इंसान, पशु, पक्षी, मोबाइल आदि सभी पर गिर सकती है। 


आकाशीय बिजली से बचने के क्या उपाय है ?


- दोस्तों यदि आप बारिश के मौसम में किसी खुले स्थान में हैं तो तत्काल किसी पक्के मकान की शरण ले लें। 


- खिड़की, दरवाजे, बरामदे और छत से दूर रहें।


- लोहे के पिलर वाले पुल के आसपास तो कतई नहीं जाएं।


- ऊंची इमारतों वाले क्षेत्रों में शरण न लें, क्योंकि वहां वज्रपात का खतरा ज्यादा होता है।


- अपनी कार आदि वाहन में हैं तो उसी में ही रहें, लेकिन बाइक से दूर हो जाएं, क्योंकि उसमें पैर जमीन पर रहते हैं।


- विद्युत सुचालक उपकरणों से दूर रहें और घर में चल रहे टीवी, फ्रिज आदि उपकरणों को बंद कर दें।


- बारिश के दौरान खुले में या बालकनी में मोबाइल पर बात न करें।


- तालाब, जलाशयों और स्वीमिंग पूल से दूरी बनाएं।


- अगर खेत या जंगल में हैं तो घने और बौने पेड़ की शरण में चले जाएं, लेकिन कोशिश करें कि पैरों के नीचे प्लास्टिक बोरी, लकड़ी या सूखे पत्ते रख लें।


- समूह में न खड़े हों, बल्कि दूर-दूर खड़े हों। इसके साथ ही ध्यान दें कि आसपास बिजली या टेलीफोन के तार न हों।


- वज्रपात में मृत्यु का तात्कालिक कारण हृदयाघात होता है। ऐसे में जरूरी हो तो संजीवन क्रिया, प्राथमिक चिकित्सा कार्डियो पल्मोनरी रेस्क्यूएशन (सीपीआर) प्रारंभ कर दें।


दोस्तों इसी कारण आकाश में उड़ रही फ्लाइट में सफर के दौरान हमारे मोबाइल को स्विच ऑफ किया जाता है क्योकि उतनी ऊंचाई में और बादलों के समीप  बिजली गिरने के चांस सबसे ज्यादा होते है। ऐसे में हमें फोन को ऑफ करना पड़ता है। साथ ही कुछ पाहडी इलाको में भी वहाँ की सरकार बारिश के दिनों में यह सुचना जारी कर देती है की जब बिजलियाँ चमकती हो या बारिश होती हो तब आप फोन पर बात न करें। 


आसमानी बिजली के खतरे को कम कैसे कर सकते हैं?


- सक्युलंट पौधे जैसे नीम, पीपल और बगरद आदि लगाए जाएं


- सड़कों के किनारे कच्ची जगहों पर फलदार पौधे लगाएं।


- ऊंची बिल्डिंगों पर तड़ित चालक (लाइटनिंग कंडक्टर) लगाना जरूरी किया जाए।


- बिजली पैदा करने वाली चीजों से दूरी बनाकर रखें, जैसे रेडिएटर, फोन, धातु के पाइप, स्टोव इत्यादि।


- अगर आप बादलों के गरजने के समय घर के अंदर हैं तो घर के अंदर ही रहें।


- बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान या पेड़ के नीचे न रहकर किसी ऊंची बिल्डिंग के नीचे खड़े हों।


- इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल न करें।


- जिस समय बिजली कड़क रही हो, मोबाइल का इस्तेमाल मत करें। 


दोस्तों अगर आप इस जानकारी को जन - हित में अपने परिवार और दोस्तों के साथ शेयर करेंगे तो हमें भी ख़ुशी होगी। पोस्ट पढ़ने के लिए धन्यवाद !!


सोशल मीडिया अपडेट्स के लिए हमें Facebook (https://www.facebook.com/HindiMadhushala) और Twitter (https://twitter.com/HindiMadhushala) पर फॉलो करें। 




No comments:

Post a Comment