राजस्थान के सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दे : Social and Cultural Issues in Rajasthan



हर एक राज्य के अपने - अपने सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दे होते है। यह मुद्दे राज्य की स्थति के बारे में दर्शाते है। जब भारत मुगलों के बाद अंगेजो के चंगुल में फस गया था उस समय पुरे भारत भर में गरीबी, भुखमरी जैसे हालात थे। ऐसे में शिक्षा की कमी के कारण प्रत्येक राज्य में कुछ अंधविश्वासी क्रूर प्रथाएं चल पड़ी जो की असल में हमारे समाज के ऊपर एक कलंक थी। 


ऐसे में इन प्रथाओं के जाल में हर कोई फसता चला गया और फिर कुछ ऐसे लोग आए जिन्होंने सही शिक्षा और जानकारी दे कर समाज को इस दलदल से बाहर निकाला। लेकिन आज भी कई गावो में इन प्रथाओं का बोल - बाला है। यही हमारे आज के सांस्कृतिक मुद्दे है, की आखिर अब तक ये प्रथाएं क्यों और इन्हे कैसे खत्म किया जाए। कैसे लोगो को अधिक से अधिक जागरूक किया जाए। 



अन्य राज्यों की तरह राजस्थान भी इन अंधविश्वासी क्रूर प्रथाएं में बुरी तरह फस चूका था। यहाँ के ग्रामीण लोग इन प्रथाओं को बहुत मानने लगे थे और जो इन प्रथाओं को नहीं मानता उन्हें समाज और यहा तक की राज्य से भी बाहर कर दिया जाता था। 


दोस्तों आज हम इन सभी सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों के बारे में ही बात करेंगे। यह आपके पटवार, पुलिस और अन्य एग्जाम के लिए भी अतिमहत्वपूर्ण है। इस विषय में इंटरनेट पर सबसे पहले जानकारी हम ही लेकर आये है ताकी आपकी तैयारी में कही कोई कमी न रहे। इसलिए हो सके तो "मधुशाला डॉट इन्फो" को आज ही फॉलो करें और हमारे फेसबुक पेज से भी जुड़े। ताकी आपको सभी अपडेट सबसे पहले मिले। 


अगर सामाजिक मुद्दों की बात करे तो  - गरीबी, भ्रष्टाचार, कुपोषण और अपर्याप्त सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा, जल संकट आदि राज्य के सामाजिक मुद्दे है। 


अगर सांस्कृतिक मुद्दों की बात करें तो - बाल प्रथा, दहेज, सती प्रथा, विधवा प्रथा, भ्रूण हत्या आदि राज्य के सांस्कृतिक मुद्दे है। 


तो चलिए शुरू करते है। सबसे पहले हम राजस्थान के सामाजिक मुद्दों के बारे में विस्तार से जानेंगे 


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