दिल्ली: यमुना नदी में कहां से आया जहरीला झाग - Toxic Foam in Yamuna River



हाल ही में 8 नवंबर, 2021 को दिल्ली में पर्यावरणविदों को चिंतित कर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ लोगों ने कालिंदी कुंज के पास झाग-लेपित यमुना के तट पर अपने चार दिवसीय छठ पूजा समारोह के एक भाग के रूप में प्रार्थना की है । 



दुनिया भर के लोगों ने सोमवार को वे तस्वीरें देखीं है जिनमें यमुना नदी झाग से भरी नजर आ रही है। इसी नदी में कमर तक गहरे पानी में खड़े होकर छठ पूजा कर रहे श्रद्धालु भी नजर आए। पिछले कुछ सालों में यमुना नदी की सफाई पर दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों ने लगभग 5,000 करोड़ रुपये की भारी रकम खर्च की है, लेकिन नतीजे निराशाजनक रहे हैं। 



अब दिल्ली में यमुना का पानी काला पड़ चुका है और यह नहाने या हाथ धोने के लायक भी नहीं है, पीना तो बहुत दूर की बात है। इस तरह देखा जाए तो दिल्ली वायु और जल प्रदूषण, दोनों ही तरह के खतरों का सामना कर रही है।


एक्सपर्ट्स का कहना है कि झाग से भरी नदी में नहाने से चर्म रोग हो सकते हैं। 4 दिनों तक चलने वाले छठ पूजा के पर्व की सोमवार को शुरुआत हो गई। इसके साथ ही श्रद्धालुओं के यमुना में स्नान को लेकर सियासत भी शुरू हो गई। जहां दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने यमुना तट पर पूजा-अर्चना पर रोक लगाई थी, वहीं स्थानीय नेताओं के नेतृत्व में बीजेपी के कार्यकर्ता सोमवार सुबह पूर्वांचल के श्रद्धालुओं के साथ अनुष्ठान के लिए नदी किनारे पहुंच गए। 



छठ के पर्व की शुरुआत नदी में नहाने से होती है। नदी के पानी से ही प्रसाद बनाया जाता है, खाना बनाया जाता है और घरों में छिड़काव होता है। झाग और इसके नीचे यमुना के प्रदूषित पानी को देखकर यह सोचना मुश्किल है कि भक्त किस स्थिति में अनुष्ठानों को संपन्न कर रहे होंगे।


यहाँ आपको काफी लोग इन जहरीले झाग के साथ अपनी सेल्फी लेते भी नजर आएंगे। 



झाग का निर्माणकैसे हुआ ?


झाग बनने की घटना कई झीलों और धाराओं पर होती है। यह झाग के बुलबुले कार्बनिक पदार्थों के अपघटन पर उत्पन्न होते हैं। झाग बनाने वाले अणुओं में दो सिरे होते हैं। इसका एक सिरा पानी को पीछे हटाता है जबकि दूसरा छोर पानी को आकर्षित करता है। ये अणु जल की सतह पर पृष्ठ तनाव (surface tension) को कम करने का कार्य करते हैं। झाग के बुलबुले पानी की तुलना में हल्के होते हैं। इस प्रकार, वे एक पतली फिल्म के रूप में सतह पर तैरते हैं और समय के साथ जमा हो जाते हैं।


यमुना में झाग बनने के कारण ?


झाग बनने के पीछे प्रमुख कारण दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से उत्पन्न अनुपचारित सीवेज में फॉस्फेट और सर्फेक्टेंट की उपस्थिति है। फॉस्फेट और सर्फैक्टेंट घटकों में 1 प्रतिशत झाग होता है, जबकि 99 प्रतिशत हवा और पानी होता है।



No comments:

Post a Comment