योगेन्द्र शर्मा की युवाओं में खून उबाल भरने वाली कविता

भारत वीरों का देश रहा है और इनकी वीरता का यशगान करने के लिए अनेक कवियों ने अपनी रचनाओं को प्रस्तुत किया है , उनमें से एक कविता आज आपके सामने प्रसिद्ध वीर रस के योगेन्द्र जी शर्मा की कविता पेश कर रहे है ।।
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हैवानों को प्रीत प्यार के गीत सुनाना बंद करो।
धूर्त दरिंदों की बस्ती में आना जाना बंद करो।
अब तो उस कुत्ते की दुम से हाथ मिलाना बंद करो।
क्षमादान दे देकर अपने शीश कटाना बंद करो।

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हम भारत के स्वाभिमान पर अपना लहू बहाते हैं।
जब तक प्राण रहे तन में हम गीत वतन के गाते हैं।

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पर सत्ता के गलियारों में सब कुर्सी के हैं कायल।
कोई दर्द नहीं उनको जब भारत माता है घायल।
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शांतिवार्ता की भाषा के सदा उलट अंजाम हुए।
हरदम धोखे खाए हमने सैनिक भी कुर्बान हुए।

बादशाह पर नज़र उठाई वहशी कायर प्यादों ने।
कितने दंश दिए भारत को जिन्ना की औलादों ने।
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शांतिवार्ता छोड़ो दिल्ली शस्त्रों का संधान करो।
सेना को आदेश थमा रणचंडी का आह्वान करो।
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जो आँख उठे भारत पे कसम राम की आँख फोड़दो।
ले नापाक़ इरादे जो हाथ उठे तो हाथ तोड़दो।
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मातृभूमि पर घात बने बकरों को ऐसा झटका दो।
उनके जिन्दा शीश काटकर लाल किले पर लटका दो।
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गाँडीव उठालो अर्जुन फिर समर महाभारत करदो
लाहौर कराँची पिंडी सारा भारत ही भारत करदो।
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दहशतगर्दों की फाँसी ने देशद्रोह के फन कुचले।
लेकिन इन घटनाओं पर भी ग़द्दारों के मन मचले।

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ग़द्दारों के बहने वाले आंसू तो घड़ियाली हैं।
देश विभाजन के मंसूबे महज पुलाव ख़याली हैं।
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मस्तक भारत माता का हम कभी नहीं कटने देंगे।
ये सपने छोड़ो ग़द्दारों हम देश नहीं बँटने देंगे।
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जो लोग दरिन्दों की फाँसी को नाजायज़ बतलाते हैं।
गीदड़ भभकी दे भारत के शेरों को धमकाते हैं।
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उनका पारा आसमान में चढ़ता है तो चढ़ जाए।
ग़द्दारों का गुस्सा बेशक बढ़ता है तो बढ़ जाए।
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लेकिन गीदड़ भभकी सुनकर दिग्गज डोल नहीं सकते।
भारत की धरती पर तुम ये भाषा बोल नहीं सकते।
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आस्तीन में साँप पालना हमको अब स्वीकार नहीं।
हिंदुस्तान में ग़द्दारों को जीने का अधिकार नहीं।
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पृथ्वीराज की भूलों वाले पन्ने वापस मत खोलो।
शूल बिछे आँगन में हरगिज़ अंधे होकर मत डोलो।
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धूल चटादो गिद्दों को जो घर में घुसकर घात करे।
जीभ काटलो कुत्तों की जो काश्मीर की बात करे।
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हल्दीघाटी पर अंकित उन गाथाओं को याद करो।
तरुणाई में देशभक्ति का ज्वार उठे वो बात करो।
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ज़िंदा करदो भारत माँ के मरते स्वाभिमान को।
बिना चुनौती दिए मसल दो सरहद के शैतान को।
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या तो मस्तक लौटाकर दो अपने हिंदुस्तान का।
या दुनिया से नाम मिटादो वहशी पाकिस्तान का।
– योगेन्द्र शर्मा

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Gulshan Kumar gk

Shayri lover Article writer in Hindi

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